किसानों ने कहा किसी का नहीं मस्तूरी विधायक…अब दिलीप लहरिया के बिना लेंगे बीमा…करेंगे मुख्यमंत्री का घेराव

बिलासपुर– मस्तूरी जनपद पंचायत के गांव जोंधरा.चिस्दा गोपालपुर,भिलौनी,टिकारी परसोड़ी के किसानों ने एक साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जिला प्रशासन से शिकायत की है। किसानों ने बताया कि सूखे की चपेट में आने से गांव स्थिति बहुत दयनीय हो चुकी है। फसल बरबाद होने के बाद ना तो बीमा राशि मिली है और ना ही सूखा राहत मुआवजा। विधायक भी हमारी स्थिति को लेकर बहुत गंभीर नहीं है। यदि हमें राहत नहीं मिलती है तो मस्तूरी में होने वाले विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे।

                     मस्तूरी जनपद पंचायत के आधा दर्जन से अधिक गांव के किसानों ने आज कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आप बीती सुनाई। किसानों ने बताया कि राज्य गठन के बाद फसल बीमा योजना से सभी काश्तकारों को जोड़ा गया है। फसल बरबाद होने के बाद आज तक फसल बीमा योजना का लाभ किसी भी किसान को नहीं मिला है। नाराज किसानों ने बताया कि जब काश्तकार कृषि ऋण पटाने जाता है तो दबाव डालकर प्रीमियम राशि जमा करवा लिया जाता है। इतना ही नहीं बल्कि ऋण माफी के बाद भी कर्मचारी ऋण की जबरदस्ती वसूल करते हैं।

                                 किसानों ने बताया कि इन आधा दर्जन गांवों में फसल नुकसान होने के बाद भी आज तक फसल बीमा का लाभ नहीं मिला है। जबकि 2017 में शासन ने मस्तूरी जनपद पंचायत के अन्य गांवों के साथ जोंधरा,चिस्दा,गोपालपुर,भिलौनी,टिकारी और परसोड़ी को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इन गावों की 92 हजार हेक्टेयर पर धान की फसल चौपट हो चुकी है। इससे हजारो किसान प्रभावित हुए हैं। सभी किसानों से साढ़े छः करोड़ राशि बीमा प्रीमियम में जबरदस्ती काटा गया है। फसल बीमा भुगतान के लिए केन्द्र और राज्य सरकार ने भी बीमा अंशदान राशि दी है। बावजूद इसके अभी तक बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया है।

                            इधर बीमा इफको टोकियो और रिलायन्स का कहना है कि जनपद पंचायत मस्तूरी के जोंधरा क्षेत्र में मात्र तीन किसानों की ही फसल बरबाद हुई है। किसानों ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है। जबकि शासन ने पूरे मस्तूरी क्षेत्र को सूखा घोषित किया है। किसानों ने बताया कि अधिकारी लोग बिना बताए प्रीमियम राशि काट लेते हैं। तब हम लोग कुछ नहीं कहते। अब राशि देने के समय बीमा कम्पनी और अधिकारी टाल मटोल कर रहे हैं। अधिकारियों और बीमा कम्पनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

किसी काम का नहीं घोषणा वाला विधायक

                         नाराज किसानों ने बताया कि स्थानीय विधायक दो एक बार गांव में आए थे। लेकिन घोषणा करने के बाद आज तक गांव नहीं आया। धोंधरा के  दिनेश शर्मा,राजू चन्देल,सुकदेव प्रजापति,अयोध्या थवाइत,तामेश जाधव, ने बताया कि विधायक से विश्वास उठ चुका है। अब विकास यात्रा में मुख्यमंत्री मस्तूरी आ रहे हैं। सभी किसान मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे। फसल बीमा,सूखा राहत राशि के अलावा अन्य समस्याओं को सामने रखेंगे।

            किसानों ने बताया कि दिलीप लहरिया ने अभी तक क्षेत्र में कुछ नहीं किया है। उन्होने गांव में अलग अलग जगहों पर दो साल पहले पचरी घाट बनाने का एलान किया था। इसके बाद पचरी घाट बनना तो दूर विधायक के दर्शन ही नहीं हुए। कुदरीपारा में छत निर्माण के लिए तीन लाख रूपए देने का वादा किया।आज तक छत निर्माण नहीं हुआ।

                        नाराज ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय विधायक दिलीप लहरिया ने दो जगह शेड़ निर्माण का वादा किया था। उन्होने एलान किया था कि श्मशान घाट में दो लाख रूपए खर्च कर शेड़ बनाया जाएगा। लेकिन घोषणा के बाद शेड निर्माण तो दूर विधायक के भी दर्शन नहीं हुए।

पानी की विकराल समस्या

                   ग्रामीणों ने बताया कि मस्तूरी क्षेत्र खासकर जिस गांव से हम लोग आते हैं पानी की विकराल समस्या है। विधायक दिलीप लहरिया ने चार अलग अलग क्षेत्रों में 4 बोर का एलान किया। आज तक बोर नहीं हुआ है। पानी के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है। सीसी रोड निर्माण की भी घोषणा विधायक ने की है। लेकिन हुआ कुछ नहीं। समझ नहीं आ रहा है कि आखिर विधायक को जब कुछ करना ही नहीं है तो मुंह खोलकर एलान क्यों कर देते हैं। नाराज किसानों ने यहा तक कह दिया कि अब हम लोग अपनी मांग को बिना नेता के प्रशासन से पूरा करवाएंगे। दिलीप लहरिया की अब जरूरत नहीं है।

प्रशासन से की है शिकायत..फिर कहेंगे…दिलीप लहरिया

                     दिलपी लहरिया ने बताया कि किसानों की समस्याओं को प्रशासन के सामने दो बार रखा है। फसल बीमा राशि नहीं मिलने की लिखित शिकायत की है। पानी शेड निर्माण,पचरी घाट से लेकर बोर और छल निर्माण करने को भी कहा है। सीसी रोड की बात को भी गंभीरता से रखा है। दिलीप लहरिया ने बताया कि किसानों की नाराजगी जायज है। कल जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने किसानों की बातों को एक बार फिर गंभीरता से रखूंगा।

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