MP में शिक्षा कर्मियों के संविलयन का फैसला 20 साल के संघर्ष का सुखद परिणामः विकास राजपूत बोले – अब छत्तीसगढ़ में भी जल्ही हो एलान

रायपुर । मध्यप्रदेश सरकार की ओर से शिक्षा कर्मियों के संविलयन के फैसले को लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक प्रतिक्रिया हो रही है। यहां के शिक्षा कर्मी नेताओँ और आम शिक्षा कर्मियों ने मध्यप्रदेश सरकार के इस फैसले का व्यापक रूप से स्वागत किया है। लोग इसे  बीस साल के संघर्ष का सुखद परिणाम मान रहे हैं।  साथ ही उम्मीद जताई है कि मध्यप्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी सरकार जल्दी ही शिक्षा कर्मियों के संविलयन के फेसले पर मुहर लगाएगी।

नवीन शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेशाध्यक्ष व शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के संचालक विकास सिंह राजपूत ने बयान जारी कर कहा कि अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा शिक्षक पद को डाइंग कैडर घोषित कर 1998 से शिक्षको के पद के विरुद्ध शिक्षाकर्मी भर्ती अल्प वेतनमान मे प्रारम्भ किया गया ।  जिसके बाद से ही अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से ही शिक्षाकर्मियों के शिक्षा विभाग मे संविलियन की मांग की जा रही  है  ।  आज 20 वर्षो के  संघर्ष का परिणाम  है कि मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के मंत्रिमंडल ने शिक्षक पद को पुनर्जीवित कर मध्यप्रदेश के समस्त शिक्षाकर्मियों के शिक्षा विभाग मे संविलियन की मंजूरी प्रदान कर दी है  ।जिसका छत्तीसगढ़ के एक लाख अस्सी हजार शिक्षाकर्मियों ने स्वागत किया है और उम्मीद जताई है की मध्यप्रदेश सरकार की तरह छत्तीसगढ़ मे भी सरकार जल्दी ही वेतन विसंगति मे सुधार करते हुए समस्त शिक्षाकर्मियों के शिक्षा विभाग मे सम्पूर्ण शासकीय सुविधाओं के साथ संविलियन करने का ऐतिहासिक निर्णय ले ।  जिससे प्रदेश के एक लाख अस्सी हजार शिक्षाकर्मियों को अपने स्कूल को छोड़कर सड़क पर उतरकर धरना प्रदर्शन या आंदोलन करने की जरूरत न पड़े । नवीन शिक्षाकर्मी संघ के महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष उमा जाटव व प्रवक्ता गंगा पासी ने मध्यप्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह को शिक्षक हितैषी बताते हुए मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मियों का शिक्षा विभाग मे संविलियन के निर्णय का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार से भी जल्दी ही छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों के संविलियन पर निर्णय लेने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *