शिक्षाकर्मियोंं को सरकार का तोहफा..शिक्षक नेता अमित ने बताया…बिना अनुमति पदोन्नत शिक्षकों को भी मिलेगा अनुभव का लाभ

बिलासपुर– नीचे के पदों से उच्च पदों पर पदोन्न्त होकर गए शिक्षाकर्मियों के लिए अच्छी खबर है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इजाजत और बिना इजाजत दोनों तरह के शिक्षाकर्मियों की सेवा गणना में छूट दी है। विभाग ने निम्न पदों पर किये सेवा अवधि को जोड़ते हुए सेवा गणना का आदेश जारी कर दिया है। आदेश के अनुसार ऐसे शिक्षक, जो निम्न पद से उच्च पद पर गये हैं…भले ही उन्होंने अनुमति ली हो या ना ली हो, उनकी निम्न पदों पर की गयी सेवा अवधि को जोड़ते हुए 8 साल सेवा पर पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ दिया दिया जाएगा।
                        नवीन शिक्षा कर्मी संघ प्रदेश उपाध्यक्ष अमित कुमार नामदेव ने शासन के फैसले का स्वागत किया है।अमित ने बताया कि संविलियन आदेश में कुछ पहलुओं को शामिल नही किया गया था। एक बिंदु पूर्व निम्न पद पर कार्यरत शिक्षा कर्मियों की निम्न पद की सेवा अवधि की गणना कर आठ वर्ष का पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ प्रदान करने की मांग प्रमुख थी।
              अमित के अनुसार शासन के इस आदेश के बाद पुनरीक्षित वेतनमान के साथ कई साथी संविलियन के हकदार हो जायेगे। हालांकि शिक्षा विभाग ने अपने संविलियन के आदेश में इस बात की छूट पहले ही दे रखी है। जिन्होंने निम्न से उच्च पदों पर जाने के लिए अनुमति भले ना ली हो, उन्हें भी अनुमति लिया मान लिया जायेगा। लिहाजा उनका संविलियन तो हो गया था। लेकिन उन्हें पुनरीक्षित वेतनमान पंचायत विभाग की तरफ से नहीं मिल पाया था।
                                  निम्न से उच्च पदों पर गये अनुमति के साथ गये शिक्षकों को पुनरीक्षित वेतनमान के साथ नया वेतन मिला था। जबकि बिना अनुमति वालों को विभागीय आदेश ना होने की वजह से बिना पुनरीक्षित वेतनमान से नया वेतन मिला था। लेकिन इस आदेश के बाद वेतन का अंतर अब खत्म हो जायेगा। और सितंबर में मिलने वाला नया वेतन बढ़कर रहेगा।  अनुमति के साथ उच्च पदों पर गये शिक्षकों के बराबर ही मिलेगा।
             आदेश में एक शर्त भी है कि आदेश न्यायालय के अध्ययीन होगा। ऐसा लिखने की मुख्य वजह राज्य सरकार ने बिना अनुमति निम्न से उच्च पदों पर गये शिक्षाकर्मियों को सिंगल बैच के आये फैसले को डबल बैंच में चैलेंज किया है। जाहिर है कि कोर्ट अगर सरकार के खिलाफ फैसला देती है, तो आदेश बदल सकता है।
डबल बैंच में राज्य सरकार का चैलेंज
                      दरअसल निम्न से उच्च पद पर गये शिक्षाकर्मियों का मसला हाईकोर्ट पहुंचा था। जहां बिना इजाजत उच्च पदों पर गये शिक्षाकर्मियों ने याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने शिक्षाकर्मियों के पक्ष में फैसला दिया था। आदेश के बाद शिक्षाकर्मियों को पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ मिलने लगा था। लेकिन इसी बीच सरकार ने डबल बैंच में चैलेंज कर दिया। इसके बाद शिक्षाकर्मियों को लाभ मिलना बंद हो गया था।
                                    अमित नामदेव ने कहा कि आदेश के बाद प्रदेश के लगभग पांच हजार शिक्षको को पुनरीक्षित वेतनमान मिलने का रास्ता साफ हुआ है। लेकिन जरूरी है कि संविलियन में  तीन मुख्य मांगों पर लगाए गए बंधन को खत्म किया जाए। वर्ग 3 की वेतन विसंगति दूर कर समतुल्य वेतनमान प्रदान किया आए। क्रमोनत वेतनमान का लाभ  दिया जाए। इसके बाद ही छत्तीसगढ़ का शिक्षाकर्मी संविलियन देश के लिए एक मिशाल बनेगा।

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