ओबीसी बैंक पर नेताओं की नजर…शैलेन्द्र ने जमा किया आवेदन…पार्टी चाहेंगी तो चुनाव लड़ने के लिए तैयार..लेकिन संगठन का निर्णय इच्छाओं से ऊपर

बिलासपुर–पिछले चार साल में गतिविधियों से शहर में अपना स्थापित करने वाले कांग्रेस पार्षद शैलेन्द्र जायसवाल ने भी बिलासपुर विधानसभा के लिए दावेदारी की है। आवेदन फार्म जमा करने के बाद शैलेन्द्र ने नपे तुले शब्द में कहा। पीसीसी ने मौका दिया..मैने आवेदन जमा कर दिया। यदि टिकट दिया जाता है तो वह भी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हूं। बहरहाल टिकट योग्य को ही दिया जाएगा। जिसे भी दिया जाएगा कांग्रेस के कार्यकर्ता मिलजुलकर प्रत्याशी को जिताएंगे।

                              मालूम हो कि शैलेन्द्र जायसवाल पेशे से इंजीनीयर भी हैं। कांग्रेसी परिवार से नाता रखते हैं। पहली बार पार्षद बनकर निगम हाल तक पहुंचे। इन चार सालों में उन्होने मुद्दों को उठाकर सत्ता पक्ष को घुटने पर लाया। जनहित मुद्दों को लेकर शैलेन्द्र ने सदन से सड़क तक उठाया। चाहे मुद्दा निगम  सफाई कर्मचारियों का हो या सिवरेज का। उन्होने कभी पीछे कदम नहीं किया। सड़क निर्माण में तो उन्होने कलेक्टर को सड़क पर बुलाकर ठेकेदार की पोल ही खोल दी। अंत में कलेक्टर को भी मानना पड़ा कि सड़क निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। ना जाने ऐसे कितने मुद्दे हैं…जिसे शैलेन्द्र जायसवाल ने सामने लाया। आज उन्हें बिलासपुर की चिंता करने वालों में पर्याय के रूप में देखा जाता है।

टिकट की दावेदारी

            बहरहाल शैलेन्द्र ने तो टिकट का दावा कर ही दिया है। फैसला स्क्रिनिंग कमेटी के हाथ में है। शैलेन्द्र के शुभचिन्तकों और शहर के प्रबुद्धजनों का मानना है कि शैलेन्द्र ना केवल टिकट के लिए योग्य हैं। बल्कि उनके पास बिलासपुर विकास को लेकर एक विजन भी है। यदि उन्हें टिकट मिलती भी है तो शहर सुरक्षित हाथों में ही होगा।

जैन्टलमैन नेता

                             राजनीति के कुछ जानकारों ने दबी जुबान में बताया कि बीआर यादव के बाद जिले की वागडोर कभी भी ओबीसी के हाथ में नहीं आया। वाणी राव ने प्रयास किया लेकिन हार का सामना करना पड़ा। लेकिन शैलेन्द्र के साथ ऐसा नहीं है। एक सामान्य पार्षद होकर उन्होने मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष को घेरकर रखा। यदि कांग्रेस शैलेन्द्र पर दांव लगाए तो गलत नहीं होगा। बीआर यादव ने जेन्टलमैन नेता थे। उनका आज भी सम्मान है। चार बार विधायक भी बने। इसमें सर्वाधिक योगदान ओबीसी का था।

                              एक कांग्रेस नेता ने बताया कि बिलासपुर में आधे मददाता ओबीसी से तालुल्क रखते हैं। बीर यादव की जीत का सबसे बडा कारण भी पचास प्रतिशत ओबीसी मतदाता ही थे। शैलेन्द्र जायसवाल भी ओबीसी से आते हैं। निश्चित रूप से उनकी दखल सर्व समाज में है। लेकिन मतदाताओं की पचास प्रतिशत आबादी का उन्हें जरूर फायदा होगा।

मतदाताओं का आंकड़ा

                    कांग्रेस नेता के अनुसार बिलासपुर विधानसभा में ओबीसी के पचास प्रतिशत को छो़ड़कर बात करें तो ब्राम्हम मतदाताओं की संख्या 25 हजार है। इसी तरह मुस्लिम मतदाताओं का आंकड़ा इसी के ईर्द गिर्द है। सिंधी समाज से 9 हजार मतदाता है।अग्रवाल समाज से तीन हजार,पंंजाबी समाज से पांच हजार कायस्थ समाज से तीन हजार है। विधानसभा में एसटी की आबादी 2 हजार के आसपास है। जबकि एससी की आबादी 18 हजार है। पचास प्रतिशत आबादी वाले बिलासपुर विधानसभा के पचास प्रतिशत वाले ओबीसी समाज से आने वाले शैलेन्द्र जायसवाल का अन्य पचास प्रतिशत समाज में जमकर दखल और लोकप्रियता है। कुछ बुद्धिजीवियों का मानना है कि बीआर यादव के बाद कम से कम कांग्रेस को एक बार फिर ओबीसी समाज के वोट बैंक को हासिल करने ओबीसी उम्मीदवार को टिकट दिया जाए तो कांग्रेस को फायदा जरूर होगा। लेकिन टिकट उसी को दिया जाए जो अन्य समाज में दखल रखता हो। जैसे शैलेन्द्र जायसवाल।

                     इधर शेख नजरूद्दीन ने भी खुशी जाहिर की है। कि हमारा पार्षद टिकट का दावेदार है। शैलेन्द्र योग्य हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी जिसे भी टिकट देगी उसे जिताया जाएगा। शैलेन्द्र जायसवाल इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं।

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