जनता कांग्रेस नेता ने कहा..बेखबर सरकार डेंगू को महामारी घोषित करे…मरीजों की पहचान के बाद निःशुल्क ईलाज भी

बिलासपुर—प्रदेश में 470 डेंगू मरीज की पुष्टि के बाद भी महामारी के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना राज्य सरकार की संवेदनहीनता को जाहिर करता है। जनता कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता मनीशंकर पान्डेय ने कहा कि प्रदेश में डेंगू उत्पात मचा रहा है। सरकार सुरक्षा के जरूरी कदम उठाने की वजाय जमे हुये पानी की तरह शांत बैठी है। स्वास्थ विभाग से पुष्टि होने के बाद भी डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे जाहिर होता है कि सरकार ने डेंगू को भी अभी भी गंभीरता से नहीं लिया है।
                 जनता कांग्रेस प्रवक्ता मणिशंकर ने बताया कि प्रदेश के दूरस्थ अंचलो के शासकीय और  निजी अस्पतालों में डेंगू जाँच की किट उपलब्ध नहीं है। आज भी पहचान के अभाव में डॉक्टर मरीजों को आम मौसम आधारित बीमारी मान कर उसका इलाज कर रहे हैं। प्रदेश के बहुसंख्यक गरीब जनता उचित इलाज के अभाव में मौत की मुंह में जा रहे हैं।
                    जनता कांग्रेस नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉक्टर भी हैं। उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि डेंगू अतिमारक गंभीर बीमारी है। बावजूद इसके पिछले एक महीने से डेंगू रोकथाम के लिए उचित प्रयास नहीं किया गया। केबिनेट की बैठक आयोजित कर युद्ध स्तर पर निपटने का उपाय किया जाना था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहा है।
                पाण्डेय ने कहा कि उच्चस्तरीय बैठक कर प्रदेश के सभी अस्पतालों को डेंगू के पहचान सम्बंधित दिशा निर्देश जारी करना था। आम लोगो के बीच डेंगू से बचने जाकरूक अभियान चलाया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मरीज अब बीमारी को लेकर दर दर भटकने को मजबूर हैं।
                               मनीशंकर पान्डेय ने कहा कि प्रदेश के समुदायिक स्वास्थ केंद्र के पास डेंगू किट नहीं है। स्मार्ट कार्ड से डेंगू के मरीजों के ईलाज के लिए पहले अप्रूवल लेना पड़ रहा है। 20 हजार रूपये से लेकर अधिकतम रूपये पचास हजार तक मरीज की स्थिति देखकर इंश्योरेंस कम्पनी अप्रूवल कर रहे हैं | पूरी प्रक्रिया में समय भी लग रहा है। आरएसबीवाय और एमएसबीवॉय के अभिकर्ता मरीजों के परिजनों से कमीशन वसूल रहे हैं। जबकि डेंगू का ईलाज महँगा है मरीज को प्लेटलेट चढ़ाने से लेकर दवाइयों में न्यूनतम एक लाख रूपए खर्च आता है|
              जनता कांग्रेस नेता के अनुसार लगभग एक सप्ताह से मुख्यमंत्री प्रदेश से बाहर हैं। मुख्यमंत्री को तत्काल कैबिनेट की बैठक बुलाकर डेंगू को महामारी घोषित करने की जरूरत है | युद्ध स्तर पर  प्रदेश के सभी समुदायिक स्वास्थ केन्द्रों तक डेंगू की किट उपलब्ध कराए। डेंगू की पहचान होने पर मरीज पूरा ईलाज प्रदेश के शासकीय और निजी सर्वसुविधायुक्त अस्पताल में राज्य शासन के खर्च पर किया जाये |
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