समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के साथ बोनस की राशि किसानों के खाते में जमा होगी,CM डॉ.रमन ने दी राज्य सरकार के ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी

रायपुर।मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने आज प्रसारित मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ में’ राज्य मंत्रिपरिषद के ऐतिहासिक निर्णय के बारे में बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ ही बोनस की राशि का वितरण भी किया जाएगा दी। प्राथमिक सहकारी समितियों के उपार्जन केंद्रों में धान बेचने वाले किसानों को समर्थन मूल्य सहित बोनस की राशि ऑनलाइन दी जाएगी, जो सीधे उनके खाते में जमा हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्तर पर कृषि उत्पादों के समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया है। जिसके अनुसार धान के समर्थन मूल्य में एक साथ, एक मुश्त 200 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। डॉ. सिंह ने कहा-हमने पहले ही किसान भाइयों से वादा किया है कि धान का बोनस 300 रूपए प्रति क्विंटल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने देखा कि जब माननीय प्रधानमंत्री जी समर्थन मूल्य में इतनी बड़ी वृद्धि का फैसला ले सकते हैं, तो हम बोनस की राशि भी उसी के साथ देने की व्यवस्था क्यों नहीं कर सकते।

धान बोनस के लिए विधानसभा का विशेष सत्र 11 और 12 सितंबर को

मुख्यमंत्री ने कहा- विधानसभा का औपचारिक समापन हो चुका है और मंत्रिमंडल के फैसले को अमल में लाने के लिए 2400 करोड़ रुपए राशि की स्वीकृति की जरूरत होगी, इसलिए रास्ता कठिन जरूर था लेकिन जहां किसानों की खुशहाली का सवाल है, वहां कोई भी कठिनाई का सामना करने के लिए हम तैयार हैं। इसलिए हमने विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने का निवेदन किया था कि धान खरीदी के साथ ही बोनस की राशि भी दी जा सके। इस खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 के लिए केंद्र सरकार द्वारा ग्रेड ऐ धान पर 1770 रुपए और कामन धान पर 1750 प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार की ओर से 300 रूपए प्रति क्विंटल बोनस देने पर किसानों को धान की किस्म के अनुसार प्रति क्विंटल क्रमशः 2070 रुपए या 2050 रुपए मिलेंगे। इस प्रकार किसानों को प्रति क्विंटल 2000 रूपए से ज्यादा राशि प्रदान करने का सपना भी पूरा होगा। डॉ. सिंह ने रेडियो वार्ता में कहा- नगद और लिंकिग में धान खरीदी 1 नवंबर 2018 से शुरू की जाएगी और 31 जनवरी 2019 तक चलेगी। धान खरीदी की अधिकतम सीमा लिंकिंग सहित 15 क्विंटल प्रति एकड़ तय की गई है। निश्चित तौर पर यह बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला है। जिसके लिए हमें परिपाटी को तोड़ना भी पड़ा है और कुछ आलोचनाएं भी सुननी पड़ी हैं, लेकिन हम हर हालत में 11 और 12 सितंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर यह व्यवस्था कर देंगे।

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