निगम का जर्जर चिंगराजपारा स्कूल…ना पानी ना बिजली..जोखिम में बच्चों की जान..मध्यान्ह भोजन भी नसीब नहीं

बिलासपुर– चिंंगराजपारा स्थित निगम का स्कूल काफी जर्जर है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सभी मौसम का मार झेलना पड़ रहा है। कुल मिलाकर बच्चों की जिन्दगी खतरे में है। स्कूल की स्थित जर्जर होने के कारण बारिश में बच्चों को बैठना मुश्किल हो गया है। जर्जर छत होने के कारण बारिश का पानी स्कूल के अन्दर पहुंंच रहा है। बिजली नहीं होने से बच्चों को अंधेरे में पढ़ाई करना पड़ता है। असामाजिक तत्वों ने रात तो दूर दिन दहाड़े खिड़की चौखट को पार कर दिया है। व्यवस्था को लेकर कई बार शिकायत हुई। लेकिन निगम प्रशासन ने प्रबंधन को आश्वासन देकर चलता कर दिया।

                  निगम प्रशासन के आश्वासन के बीच स्कूल की स्थिति कुछ ऐसी हो गयी है कि बीच क्लास में पहुंचकर असामाजिक तत्व ना पढ़ने देते हैं और ना ही शासकीय काम काज को करने देते हैं।पार्षद और एसएमसी के सदस्यों की शिकायत को निगम आयुक्त और महापौर अबी भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यदि कोई अनहोनी हो जाए तो आश्चर्य की बात नहीं होगी।

                   शिक्षा पर शासन बहुत ज्यादा फोकस है। लेकिन बीच शहर में चिंंगराजपारा स्कूल की स्थिति देखने के बाद  ऐसा कहीं भी नजर नहीं आता कि सरकार और शासन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है। स्कूल प्रबंधन, पार्षद के अलावा स्थानीय लोग, एसएमसी के सदस्यों ने चिंगराजपारा स्कूल की जर्जर व्यवस्था को लेकर निगम आयुक्त और महापौर से कई बार लिखित शिकायत की। बावजूद इसके  बच्चों की समस्या को लेकर कोई भी गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। शिकायत पर हर बार स्कूल प्रबंधन को जनप्रतिनिधियों और निगम अधिकारियों से आश्वासन ही मिला है।

                               बच्चों के साथ एसएमसी सदस्य,पार्षद और शिक्षकों ने बताया कि इ बार मानसून में बारिश का एक एक बूंद स्कूल के बाहर नहीं गया। स्कूल में लम्बे समय से बिजली नहीं है। जिसके कारण पढ़ने और पढ़ाने में कफी परेशानी हुई। अंधेरा होने के कारण बच्चों में भय की स्थिति बनी रही। बिजली नहीं होे से गर्मी में कई बच्चे बेहोश भी हो चुके हैं। जिससे पढ़ाई लिखाई को बहुत ज्यादा नुकसान पहु रहा है।

              शिकायतकर्ताओं ने लिखित में बताया कि स्कूल को असामाजिक तत्वों ने अड्डा बना लिया है। खिड़की चौखट उखाड़ ले गए हैं। कार्यालय के दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं है। कभी कभी दस्तावेज बी इधर उधर बिखरे हुए मिलते हैं। यदि एक दिन आलमारी का ताला टूटा हुआ मिले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। जबकि असामाजिक तत्वों ने  अन्दर घुसकर टेबल कुर्सी को भी तोड़ा है।

               शिकायत कर्ताओं के अनुसार शहर स्मार्ट बन रहा है। साफ सफाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है। लेकिन बच्चों के भविष्य को लेकर ना तो निगम प्रशासन और ना ही जनप्रतिनिधियों को किसी प्रकार की चिंता है। स्कूल में महीनों से पानी नहीं आ रहा है। टायलेट प्रयोग करने लायक नहीं है। बीमारी की हमेशा आशंका बनी रहती है। मध्यान्ह भोजन का संचालन भी ठीक से नहीं हो रहा है। बच्चों को कभी खाना मिल जाता है। तो कभी भूखे पेट लौटना पड़ता है।

                 एसएमसी के सदस्यों ने बताया कि अवारा तत्वों ने शिक्षकों और छात्रों का जीना मुश्किल कर दिया है। दिन दहाड़े क्लास में घुस जाते हैं। बच्चों को उकसाने के साथ ऊल जुलुल हरकत करते हैं। जब निगम प्रशासन को स्कूल पर ध्यान नहीं देना है तो कम से कम बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्कूल ही बंद कर दे। क्योंकि स्कूल की जर्जर हालत देखते हुए कभी भी कोई हादसा हो सकता है। ऐसे में जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।

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