कर्मचारी नेता पी आर यादव ने भाजपा को दिलाया याद…… घोषणा पत्र – 2013 के कौन से वादे नहीं हुए पूरे….?

रायपुर ।  इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र तैयार करने भारतीय जनता पार्टी ने भी तैयारी शुरू कर दी है ।  इसके लिए प्रदेश सरकार के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को संयोजक बना बनाया गया है  । घोषणा पत्र तैयार करने के लिए समाज के सभी वर्गों से सुझाव मनाया जा रहे हैं ।  इस सिलसिले में छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष पी.आर. यादव ने बृजमोहन अग्रवाल को एक सुझाव पत्र भेजकर 2013 विधानसभा चुनाव के समय के भाजपा के घोषणा पत्र की याद दिलाई है  ।  उन्होंने पूरे विवरण के साथ बताया है कि 2013 में की गई घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं ।  जिससे कर्मचारियों को प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है ।  उन्होंने आचार संहिता लागू होने से पहले 2013 की घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने की मांग की है । जिससे गोषणा पत्र की विश्वसनीयता बनी रहे।

छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांत अध्यक्ष पी आर यादव ने भाजपा चुनाव घोषणा पत्र समिति के संयोजक बृजमोहन अग्रवाल और समिति के अन्य सदस्यों के नाम यह सुझाव पत्र भेजा है  । जिसके साथ  2013 के चुनाव घोषणा पत्र की प्रति भी संलग्न की गई है  । उन्होंने   अपने पत्र में लिखा है कि विधानसभा चुनाव 2018 के लिए चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने समिति का गठन किया गया है ।  इस समिति द्वारा समाज के सभी वर्गों के साथ साथ कर्मचारी वर्ग से भी सुझाव मांगा गया है ।  इस सिलसिले में कर्मचारी संगठन ने याद दिलाया है कि 2013 के चुनाव के समय भाजपा द्वारा जारी घोषणा पत्र में कहा गया था कि प्रदेश के अधिकारी कर्मचारियों की वेतन विसंगति ,पदोन्नति , क्रमोन्नति को युक्तियुक्तकरण के लिए आयोग का गठन किया जाएगा  । राज्य शासन ने इसे लेकर पूर्व मुख्य सचिव एस के मिश्रा की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय  आयोग का गठन किया है  । यह आयोग पिछले 3 साल से कार्यरत हैं  । इसके बावजूद आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट शासन को नहीं दी है ।  ऊपर से राज्य शासन ने इस आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2018 तक बढ़ा दिया है ।  इसका मतलब है कि राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग 1 जनवरी 2019 के पहले अपनी अनुशंसाएं राज्य शासन को नहीं सौंपेगा ।  प्रदेश के लिपिक ,शिक्षक, कार्यपालिक और तकनीकी संवर्ग के कर्मचारी वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर पिछले 4 वर्षों से शासन का ध्यान आकर्षण करने हेतु आंदोलित है ।  क्योंकि वेतन विसंगति दूर करने का विषय आयोग के समक्ष विचाराधीन है ऐसा बहाना बनाकर शासन के उच्च अधिकारी वेतन विसंगति का निराकरण नहीं कर रहे हैं  ।

पीआर यादव ने लिखा है कि कर्मचारियों से किए गए वादे के अनुसार प्रदेश के विभिन्न वर्ग के कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर नहीं होने से विधानसभा चुनाव 2013 के घोषणापत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है  । उन्होंने आग्रह किया है कि प्रशासनिक सुधार आयोग से वेतन विसंगति दूर करने के संबंध में की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन मंगा कर वेतन विसंगतियों को दूर करने का आदेश आचार संहिता लागू होने से पहले जारी किया जाए । उन्होंने यह भी लिखा है कि भाजपा के 2013 के चुनाव घोषणा पत्र में प्रदेश के अधिकारियों -कर्मचारियों को सेवाकाल के दौरान कम से कम चार स्तरीय पदोन्नति वेतनमान देने का वादा किया गया था ।  सरकार के 5 साल का कार्यकाल पूरा होने के 3 माह पहले मुख्यमंत्री ने बिलासपुर में चार स्तरीय पदोन्नति वेतनमान देने की सार्वजनिक घोषणा की ।  इस घोषणा को तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ सहित अन्य संगठनों ने देर आए दुरुस्त आए मानकर मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापन किया ।  किंतु कुछ दिनों बाद मुख्यमंत्री की घोषणा  का क्रियान्वयन करते हुए शासन  ने चार स्तरीय पदोन्नति वेतनमान के स्थान पर स्तरीय पदोन्नति वेतनमान का आदेश जारी किया है   । यह मुख्यमंत्री की घोषणा और गरिमा के विपरीत है ।  इससे प्रदेश के ढाई लाख अधिकारी कर्मचारी और उनका परिवार अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और उनमें व्यापक आक्रोश है   । इसे देखते हुए संघ ने तीन स्तरीय पदोन्नति वेतनमान में संशोधन कर मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार चार स्तरीय पदोन्नति समय मान वेतनमान का आदेश जारी करने की मांग की है । जिससे घोषणा पत्र की विश्वसनीयता और मुख्यमंत्री की घोषणा की गरिमा बरकरार रहे ।

पीआर यादों में अपने पत्र में बकाया वेतन (एरियर) के भुगतान और अति संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कर्मचारियों कार्यरत कर्मचारियों को जोखिम भत्ता दिए जाने का मुद्दा भी शामिल किया है  । साथ ही पेंशन का भी जिक्र किया है  । उन्होंने लिखा है कि 2013 के घोषणा पत्र को लागू करने के लिए तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ और कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मंत्रियों से मिलकर मांग रखी है  । लेकिन अब तक घोषणा पत्र का क्रियान्वयन नहीं हुआ है  । उन्होंने आचार संहिता लागू होने से पहले घोषणा पत्र का क्रियान्वयन कर आदेश जारी करने का अनुरोध अपने पत्र में किया है।

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