IMA का दवा व्यापारियों के खिलाफ मोर्चा..डॉक्टरों ने कहा..मारपीट करने वालों पर हो कार्रवाई..अंत तक लड़ेंगे लड़ाई

बिलासपुर— इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी और शहर के नामचीन चिकित्सकों ने प्रेसवार्ता में अखिल भारतीय मेडिकल एशोसिएन के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया। आईएमए के पदाधिकारियों ने पत्रवार्ता में बताया कि हम लोग दवा व्यापारी संघ के हड़ताल का आंशिक समर्थन भी किया। बावजूद इसके हमारे साथ व्यापारियों ने ना केवल अभद्र व्यवहार किया बल्कि वरिष्ठ चिकित्सकों से मारपीट की है। इतना ही नहीं डॉ.जगबीर सिंह को इतना पीटा कि उनके कान का पर्दा भी फट गया। सभ्य समाज में मारपीट के लिए कोई जगह नहीं है। हमने थाने में शिकायत की है। पुलिस कप्तान को भी मामले से अवगत कराया है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा हम लोग अन्याय और आरोपियों के खिलाफ लड़ेंगे। जरूरत पड़ी तो हम भी हड़ताल और धरना प्रदर्शन करेंगे।

                 मालूम हो कि दो दिन पहले आनलाइन दवा खरीदी के खिलाफ अखिल भारतीय दवा व्यापारी संघ ने बंद का आह्वान किया। 28 सितम्बर को दवा व्यापारियों ने पत्रवार्ता में बताया कि शांति पूर्वक बंद रहेगा। डॉक्टरों का भी समर्थन हासिल है। व्यापारियों ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में बताया था कि अस्पताल और निजी संस्थानों के कैम्पस को छोड़कर प्रदेश समेत जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहेगी। मामले में कलेक्टर और पुलिस प्रशासन को भी अवगत कराया गया है।

                      28 सितम्बर को बंद के दौरान दवा व्यापारी संघ और चिकित्सकों के बीच मारपीट हुई। व्यापारियों ने डाक्टरों से अभद्र व्यवहार किया। मामले को पुलिस को कूदना पड़ा। दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई।

                                                           आज इंडियन मेडिकल एसोसिएाशन के पदाधिकारी और चिकित्सक डॉ.आर.डी.गुप्ता,डॉ.आशिष मुंदड़ा,डॉ.प्रशांत द्विवेदी,डॉ.आशुतोष तिवारी और डॉ.श्रीकांत गिरी ने बंद के दौरान मारपीट की घटना की जानकारी दी। डॉक्टरों ने बताया कि बंद से पहले हमारी बातचीत दवा व्यापारी संघ से हुई थी। हम लोगों ने आंशिक समर्थन का आश्वासन भी दिया था। उन्होने हमारी बातों का समर्थन भी किया था। हम लोग 95 प्रतिशत दवा विक्रेता संघ के बंद का समर्थन किया। बावजूद इसके दवा व्यापारी संघ ने हमारे साथियों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया।

          आईएमए की टीम ने बताया कि दवा व्यापारी बंद के दौरान मेडिकल क्लिनिक के अन्दर के दुकानों को बंद कराने की कोशिश की। अन्दर की दुकानों का बंद किया जाना संभव नहीं था। क्योंकि हमारे मरीजों को दवा की जरूरत पड़ती है। हो सकता है कि बिना मेडिसिन की मरीज की जान भी जा सकती है। लेकिन व्यापारियों का कहना था कि अन्दर बाहर की सभी दुकानें बंद किए जाएं। जबकि हमारी उनसे पहले ही बातचीत हो चुकी थी। बावजूद इसके डॉ.जगबीर सिंह जैसे वरिष्ठ चिकित्सकों से मारपी की गयी। कई डाक्टरों से क्लिनिक के अन्दर घुसकर अभद्र व्यवहार किया गया। झूमा झटकी की गयी।

                        दवा व्यापारियों का आरोप है कि डॉक्टर मेडिकल दुकान का संचालन करते हैं। उनके दुकान खुलने से बंद पर असर पड़ेगा। सवाल के जवाब में डॉ.आशीष मुंदड़ा,डॉ.प्रशांत.डॉ.आशुतोष ने बताया कि ऐसा नहीं है। क्लिनिक के अन्दर की दुकानों का भर्ती हुए मरीजों के लिए खुलना जरूरी है। रही बात दुकान संचालन की तो यह मौलिक अधिकार है कि हम जीविकोपार्जन के लिए क्या कुछ करें। दवा व्यापारी हमारे जीविकोपार्जन के लिए जिम्मेदार नहीं हो सकते है। सवाल यह भी है कि मरीज हमारे और परिजनों के लिए गंभीर है। लेकिन दवा व्यापारियों के लिए कोई मायने नहीं रखता है। ऐसी सूरत में मानवता कहां जाती है। मरीजों का डॉक्टरों पर विश्वास होता है। यदि दवा के अभाव में विश्वास टूटता है तो इसका नुकसान डॉक्टरों को होना निश्चित है। दवा व्यापारी संघ के लोग रेडक्रास और अपोलों की दुकानें बंंद करवाने क्यों नहीं गए।

               सवाल के जवाब में डॉक्टरों ने बताया कि हम लोग थाने में नामजद शिकायत की है। पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस कप्तान से भी लिखित शिकायत की है। उन्होने भी जांच पड़ताल के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है। उम्मीद है कि आरोपियों के खिलाफ जरूर कार्रवाई होगी। जानकारी मिल रही है कि एफआईआर में कुछ दवा व्यापिरयों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन हम लोग दोषियों और अन्याय के खिलाफ अंत तक लड़ेंगे। जरूरत हुई तो धरना भी करेंगे और हड़ताल पर भी जाएंगे।

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