हर एक युवा को रोजगार  देने की कुंजी है उच्च शिक्षा के पास-शैलेष

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              छत्तीसगढ़ तेजी से तरक्की की ओर बढ़ता हुआ राज्य है। जहां चारों तरफ तरक्की की संभावनाए हैं। लेकिन इस तरक्की में स्थानीय लोगों की भी हिस्सेदारी हो इसके लिए जरूरी है कि हम नई पीढ़ी को कुछ इस तरह से कुशल बनाएं कि हर एक क्षेत्र में स्किल्ड मेनपॉवर की जरूरत पूरी हो सके और यहां के हर एक युवा को रोजगार मिल सके । उच्च शिक्षा संस्थान ही यह काम बेहतर ढंग से कर सकते हैं। यह मानना है कि डा. सी वी रामन् विश्वविद्यालय के कुलसचिव शैलेष पाण्डेय का…। उन्होने सीजीवाल के साथ एक मुलाकात में अपने विचार साझा किए…।

 

सवाल- उच्च शिक्षा की दृष्टि से बिलासपुर में स्थिति क्या है, और आप क्या संभावनाएं देखते हैं?

जवाब- सही मायने में उच्च शिक्षा की जैसी स्थिति बिलासपुर में होनी चाहिए वैसी तो नहीं है। उसके कई बडे़ कारण हैं, पिछले कई दशकों में यहां की जो उच्च शिक्षा की स्थिति रही है, वो बहुत अच्छी नहीं है। न तो यहां अच्छे शिक्षा संस्थान थे, न ही यहां योग्य और अनुभवी शिक्षक थे, और न ही यहां के संस्थानों में अधोसंरचना। युवाओं में पलायनवादी दृष्टिकोण  हावी रहा है। प्रतिभावान विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए पलायन कर चले जाते थे। पिछले एक दशक से मुझे कुछ अच्छी संभावनाएं नजर आ रही है। जिसमें माता-पिता के साथ विद्यार्थी भी शिक्षा के प्रति जागरूक हुए है और संस्थानों का प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है। लेकिन जिस स्तर और गुणवत्ता की अपेक्षा संस्थानों व विद्यार्थियों से होनी चाहिए,उसके लिए बहुत मेहनत करनी होगी। संस्थानों को अधोसंरचना और तकनीकी रूप से मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थियों के पलायन को रोका जा सके और राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा हम यहां दे सकें।

सवाल-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा में विश्वविद्यालयों का अलग स्थान है, इसमें छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालय कैसे अलग है?

जवाब- उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप में जहां ऑनलाइन और ई-लर्निंग का समावेश समाजिक रूप में होता जा रहा है। ऐसे में सिर्फ शिक्षा ही नहीं आज हर क्षेत्र के निजी सेक्टर ही सबसे बेहतर है। स्वास्थ्य,परिवहन,सुरक्षा,निर्माण,तकनीक,मनोरंजन,प्लानिंग सहित सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता और सुविधा निजी क्षेत्र में ही सबसे बेहतर है। जहां तक अंतर्राष्ट्रीय विख्यात विष्वविद्यालयों की बात है उसका एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे आम विद्यार्थियों की पहुंच से दूर है वहां पढ़ाई करने के लिए संघर्ष ज्यादा है,इसके विपरित राज्यों के विश्वविद्यालय गुणवत्ता में तो उनके तुलना में थोड़ा पीछे हैं। पर आम छात्रों की पढ़ाई के लिए बेहतर हैं। यहां हर स्तर के विद्यार्थी पढ़ाई कर सकते हैं जो आज हमारे देश और समाज के लिए ज्यादा जरूरी है, क्योंकि हमें उच्च शिक्षा का प्रतिशत बढ़ाना है। यह तभी संभव है, जब देश में शिक्षा की गुणवत्ता वाले शिक्षण संस्थान हों।

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सवाल-उच्च शिक्षा के लिए विश्वशनीयता की कसौटी क्या है? शिक्षा में विश्वशनीयता कैसी हो?

जवाब-उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पाठ्यक्रमों की अधिकता उनकी मान्यताएं एवं नियंत्रित करने वाले नियामक संस्थाएं अलग-अलग एवं विस्तृत होते है,जिसका ज्ञान एक आम छात्रों को नहीं होता। इसके लिए आज की सूचना प्रोद्योगिकी तकनीक का उपयोग ज्यादा कारगर है, इसमें उच्च शिक्षा को नियंत्रित करने वाले नियामक संस्थानाओं को मान्यता एवं शर्तें संबधित जानकारी नेट पर रखना चाहिए। एवं संचालित संस्थाओं,विश्वविद्यालय,महाविद्यालय को अपनी सभी मान्यता,पाठ्यक्रम, सीट,सुविधा की सभी जानकारी नेट के माध्यम से प्रसारित की जानी चाहिए। प्रसारित जानकारी की वैधता पर भी नियामक संस्थानों को नियंत्रण रखना चाहिए। इसमें आम ग्रामीण विद्यार्थियों को जागरूक करने की दिशा में शिक्षण संस्थानों व नियामक संस्थानों को कार्य करना चाहिए। सभी शिक्षण संस्थानों की जानकारी व मान्यताएं कामन रूप में इंटरनेट में उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे यह जन सामान्य को उपलब्ध हो सके।

दूरवर्ती शिक्षा में भविष्य कैसा है?

जवाब-  दूरवर्ती शिक्षा आज के समाज की महती आवश्यकता है। दूरस्थ ग्रामीण अंचलों एवं खास कर महिलाओं तक जब हम अपने उपलब्ध अधोसंरचना के माध्यम से उच्च शिक्षा की पहुंच नहीं बना सकते तक केवल ओर केवल मुक्त एवं दूरवर्ती शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा इस दिशा में संभावनाओं के द्वार को खोला जा सकता है। यदि मुक्त व दूरवर्ती शिक्षा में आधुनिक तकनीक का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाता है तो वह और भी सुलभ और समय बंधन से रहित कही भी कभी भी के तर्ज पर उपलब्ध कराई जा सकती है। इसका दूसरा पहलू ये भी है कि आज के इस गतिशील समाज में युवा जल्द ही रोजगार या स्वरोजगार की दिशा में चले जाते है। ऐसे में उनकी औपचारिक शिक्षा औपचारिक विधि  से पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में मुक्त एवं दूरवर्ती शिक्षा उनके लिए एक कारगर होगी।

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सवाल-आज के समय में कैसे विश्वविद्यालय की कल्पना करते हैं? कैसे पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की जरूरत है?

जवाब-आधुनिक युग में डिलीटल और स्कील विश्वविद्यालय  शुरू करने की जरूरत है। जिससे मैन्युअली पढ़ाई के स्थान पर सभी कार्य ऑनलाइन होने चाहिए। इसके लिए शिक्षण संस्थानों को अपडेट करने की जरूरत है। युवा स्वतः ही उस प्रक्रिया में ढलते जाएंगे। सही मायने में डिजीटल विश्वविद्यालय आज की जरूरत हैं।जहां तक  नए पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रश्न है,तो कृषि  प्रदेश की मूल धरोहर है। इसके साथ प्रदेश का तेजी से औद्योगिक विकास के होने के पर्यावरण प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता जा रहा है, ऐसे में हमें इस दिशा में उन्नत तकनीक पाठ्यक्रम शुरू करने की जरूरत है। इससे एक परंपरिक क्षेत्र में रोजगार की संभवना बढ़ेगी साथ पर्यावरण प्रदूषण के नियंत्रण के दिशा सार्थक प्रयास होने लगेंगे।

सवाल- छत्तीसगढ़ प्रदेश को हर क्षेत्र में पिछड़ा माना जाता है,ऐसे में यहां के युवा इस पिछडी सोच के कारण ही शिक्षा में पीछे है, आप क्या मानते हैं?

जवाब- मेरे पिछड़ा मानने या नहीं मानने से ज्यादा जरूरी है कि यह इस विषय पर विचार करें कि हमने कितना विकास किया है। छ.ग.राज्य पृथक होने के बाद प्रदेश ने कई क्षेत्रों में विकसित होने का प्रयास किया है। चाहे वह स्कूली शिक्षा का क्षेत्र हो, चाहे वह उच्च शिक्षा का क्षेत्र हो, चाहे वो पावर का क्षेत्र हो, चाहे वह रिटेल का क्षेत्र हो, चाहे वे कोल माइंस का क्षेत्र हो, चाहे वो सीमेंट का क्षेत्र हो या लोहे का। सभी क्षेत्रों में प्रदेश विकास की राह में आगे बढ़ा है, लेकिन हमारे पास स्कील्ड मेनपावर नहीं है, जिसके कारण अगर हम राज्य को उस स्तर विकसित नहीं कर सकते जिस स्तर तक करना चाहते हैं। राज्य पृथक होने के बाद प्रदेश का तेजी से विकास हुआ है और प्रदेश ने राष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी जगह बनाई है। इस उपलब्धि में प्रदेश के युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। साथ ही प्रदेश की लोक कला और संस्कृति ने भी अंतराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की है।

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