चुनाव नहींं लड़ने का फैसला..विपक्ष बना दबाव…डॉ.सरोज ने कहा…जोगी की नजर संभाग की 24 सीटों पर

बिलासपुर— शिक्षाविद् और राजनीति में अच्छी दखल रखने वाले डॉ.सरोज मिश्रा का मानना है कि जोगी का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। उन्होने राजनांदगांव या मरवाही से चुनाव नहींं लड़ने की मंशा जाहिर कर बड़े लक्ष्य पर निशाना साधने का प्रयास किया है। डॉ.सरोज मिश्रा का मानना है कि जोगी ने राजनांदगांव से चुनाव ना लड़ने का एलान कर अनावश्यक दबाव से बचते हुए प्रचार कार्य का फैसला लिया है। फैसले से भाजपा और कांग्रेस पर दबाव डालने का प्रयास भी किया गया है।
         बिलासपुर अजीत जोगी का गृह जिला है।जाहिर सी बात है कि बिलासपुर संभाग की सीटो पर उनका ध्यान ज्यादा केन्द्रित रहेगा। संभाग में उनकी परंपरागत सीट मरवाही और पहली बार चुनाव लड़ रही बहु ऋचा जोगी की अकलतरा सीट भी है। इसलिए शायद उन्होने चुनाव लड़ने के दबाव को ना लेकर प्रत्याशियों को जीताने का फैसला लिया है।
                 शिक्षाविद् और राजनीति के अच्छे खासे जानकार डॉ.सरोज मिश्रा ने अजीत जोगी के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति बताया है। डॉ.सरोज मिश्रा के अनुसार जोगी किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़कर चुनावी प्रचार में ताक़त लगाएंगे। किसी एक खूटे से नहीं बंधकर विपक्ष के स्टार नेताओं को खूंटा नहींं छोड़ने के लिए मजबूर करेंगे।
                सरोज की मानें तो अजीत जोगी ने निर्णय सोच समझ कर लिया है। निर्णय के पीछे जोगी की नज़र खासकर बिलासपुर संभाग की 24 सीटों पर है। शायद उनका प्रयास है कि संभाग की ज्यादा से ज्यादा सीट जीतकर विपक्षी पार्टियों को बैकफुट पर भेंजे। बिलासपुर संभाग के कुल 24 विधानसभा क्षेत्रों में अभी तक भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होता था। संभाग में दोनों पार्टियों की हैसियत लगभग बराबर है। जांजगीर जिले के एक सीट पर फिलहाल बसपा काबिज है ।
             इस बार जनता कांग्रेस-बसपा-सीपीआई के गठबन्धन से संभाग में विपक्ष की दोनों पार्टियों की सेहत पर असर पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है। चुनाव प्रचार के दौरान जोगी बिलासपुर सम्भाग में ज्यादा केन्द्रित रहेंगे। बिलासपुर अजीत जोगी का गृहजिला है। प्रदेश में बसपा का सबसे ज्यादा जनाधार बिलासपुर संभाग में ही है।  सम्भाग के जांजगीर जिला में बसपा वोटरों का दबदबा है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में कम्युनिष्ट का भी असर है।
                    डॉ.सरोज की मानें तो अजीत जोगी राजनांदगांव से चुनाव लड़ते तो सीएम से मुकबाला करने का मनोवैज्ञानिक दवाब रहता।  जिसका राजनीतिक नुकसान गठबंधन और खासकर बिलासपुर संभाग की सीटों पर पडता। जोगी बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि उनका पुराना किला मरवाही विधानसभा कोई और साध ले जाए। चुंकि इस बार उनकी बहु बसपा की सीट से अकलतरा के मैदान में है। इसका भी दबाव जोगी पर है। लिहाजा मरवाही और अकलतरा समेत अन्य महत्वपूर्ण सीट उनके हाथ से निकल जाए…जोगी ऐसा बिलकुल नहीं चाहेंगे।
                        इसके अलावा हाइप्रोफाइल सीट कोटा में अगर उनकी पत्नी और वर्तमान विधायक रेणु जोगी को कांग्रेस मौका नहीं देती है तो जोगी कोटा में इस सिम्पेथी को हासिल करने का प्रयास करेंगे। यदि राजनांदगांव या मरवाही से चुनाव लड़ते तो जोगी उसी क्षेत्र तक सिमट कर रह जाते। चूंकि बसपा और जनता कांग्रेस में सबसे बडे कद के एक मात्र नेता अजीत जोगी ही है। इसलिए अजीत जोगी ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर एक अच्छी रणनीति को अख्तियार किया है। जाहिर सी बात है इसका प्रभाव विरोधी दलो के प्रत्याशियों पर पड़ने से इंंकार नहीं किया जा सकता है। जोगी के इस फैसले से स्प्ष्ट हो गया है कि उनके लिए बिलासपुर संभाग की 24 सीट महत्वपूर्ण है।

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