VIDEO:चुनावी सफर-देखिए CM के गाँव-घर कवर्धा में अभी सबसे बड़ा सवाल… ? आखिर किसके बीच होगा मुकाबला…

(गिरिजेय) छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव में पहला सफर……। बिलासपुर से तखतपुर,मुंगेली,पंडरिया- पांडातराई होकर कवर्धा तक करीब सवा सौ किलोमीटर की दूरी नापने के बाद लगता है कि इस बार का चुनाव कई मायने में पहले से अलग है….। सड़क पर चलते हुए दोनों किनारों पर घरों या दुकानों में कहीं भी नो कोई पोस्टर…. न कोई बैनर….. न किसी पार्टी का झंडा ….न चुनाव चिन्ह और न ही वॉल पेंटिंग…। ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं देगा जिससे यह लगे कि महज अठारह दिन के बाद वोट पड़ने वाले हैं। हां.. सभी से शत-प्रतिशत मतदान करने की अपील के साथ  दीवारों पर स्लोगन जरूर दिखाई देते हैं….। जिससे लगता है कि इस बार पहले के मुकाबले अधिक मतदान की उम्मीद की जा सकती है। इसी तरह रास्ते भर जगह-जगह पर पुलिस के चेकपोस्ट पर चल रही चेकिंग देखकर भी लगता है कि तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चुनाव हो रहे हैं।

माहौल अभी कुछ ऐसा है कि जिस कवर्धा शहर में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह का घर है, वहां भी चुनावी सरगरमी की कोई झलक नहीं मिलती। जिंदगी हमेशा की तरह रोजमर्रा से जुड़ी हुई है। खेतों में  धान की फसल पक गई है या पकने के करीब है। किसान फसल काटकर लाने के लिए कोठार तैयार कर रहे हैं। सड़क, दुकान-बाजार में चहल-पहल बनी हुई है। लेकिन चुनाव की बात अभी तक आम नहीं हुई है। यह माहौल देखकर  यकीनन उन लोगों को निराशा होगी , जो इस सवाल के साथ लगों की तरफ देख रहे हैं कि इस बार कौन जीतेगा…? अभी के माहौल में इस सवाल का जवाब काफी दूर नजर आता है। लेकिन चुनाव तो चुनाव है।चुनाव की सरगरमी भी आएगी और माहौल भी बनेगा। तब शायद कोई इस सवाल का जवाब ढूंढ़ ले कि इस बार चुनाव कौन जीतेगा।

बहरहाल कवर्धा में लोहारा की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे बने भारतीय जनता पार्टी के दफ्तर में पहुंचने पर  हल्का सा चुनावी हलचल का अहसास जरूर हुआ। जहां पर प्रचार सामग्री बाहर भेजने की तैयारी चल रही थी। लोग कार्यालय में बैठकर चुनाव की तैयारियों पर चर्चा कर रहे थे। इस व्यवस्था का संचालन देख रहे नितेश अग्रवाल से  बात हुई तो उन्होने कहा कि पार्टी पहले से ही चुनाव के लिए तैयार है। सभी कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारियों के तहत काम पर जुट गए हैं। बीजेपी के कुछ अन्य लोगों से बात हुई तो उन्होने भी कहा कि कवर्धा मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है और हम यहां उनके व्यक्तित्व के  प्रभाव  से ही चुनाव जीतते रहे हैं। इस बार भी कोई कमी नहीं होगी।

कवर्धा के जयस्तंभ चौक के पास बने कांग्रेस के दफ्तर में भी हलचल दिखी । लोग नजर आए। लेकिन इसी  समय छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव के कवर्धा पहुंचने की खबर का असर कांग्रेस के दफ्तर में दिखाई दे रहा था। और इसे लेकर आपस की चर्चाएँ भी थीं। दरअसल सिंहदेव  कवर्धा सीट से पूर्व विधायक योगीराज सिंह के निर्दलीय पर्चे को लेकर बात करने…. अचानक पहुंचे थे। वे पैलेस में थे और वहां उनकी लम्बी बात चल रही थी। बातचीत पूरी होने के बाद जब वापसी के लिए हेलीपेड पहुंचे तो एक सवाल के जवाब में उन्होने बेहतर स्थिति की उम्मीद जताई । इस दौरान कवर्धा के कांग्रेस उम्मीदवार – मोहम्मद अकबर सहित कांग्रेस के और लोग भी उन्हे बिदाई देने पहुंचे थे।

कवर्धा सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा विधायक अशोक साहू को फिर से मैदान में उतारा है। उनके मुकाबले कांग्रेस के पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर मैदान में है। जबकि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ( जे.) की ओर से अगमदास उम्मीदवार हैं। लोगों ने बताया कि कवर्धा की गिनती प्रदेश के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्रों में होती है। यहां दो लाख नब्बे हजार से अधिक मतदाता हैं। करीब सवा सौ-डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में फैले इस विधानसभा क्षेत्र में पोलिंग बूथ की संख्या 4  सौ से अधिक है। क्षेत्रफल में भी बड़ा है….. और यहां से जुड़े नेताओँ का नाम भी बड़ा है…। लेकिन अभी कवर्धा की सियासी फिंजां में यही सवाल बड़ा है कि क्या कांग्रेस अपने रूठे हुए लोगों को मना पाएगी ….।और नामांकन वापसी के बाद  चुनावी मुकाबले की तसवीर क्या होगी ….?

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