चुनावी गणितःपढिए तीसरी ताकत आखिर कितनी ताकतवर…? ”जोगी फैक्टर” पर टिकी चुनावी विसात..

(गिरिजेय)छत्तीसगढ़ में मौजूदा विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है। दूसरे और अँतिम चरण की वोटिंग के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं। सरकारी तंत्र व्यवस्थित ढ़ंग से मतदान कराने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। वहीं तमाम राजनैतिक दलों के लोग भी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस दौर में यह सवाल फिंजां में तैर रहा है कि चुनाव में किसे जीत हासिल होगी और कौन सरकार बनाएगा…? इस सवाल का जवाब तलाश रहे लोगों की गाड़ी इस मुद्दे पर ही अटक रही है कि इस चुनाव में तीसरी ताकत के रूप में उभरी अजीत जोगी की पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ( जे.) को मिलने वाले समर्थन पर ही  बीजेपी – कांग्रेस और खुद अजीत जोगी का भविष्य तय होगा । और इससे ही तय होगा कि छत्तीसगढ़ में इस बार किसकी सरकार बनेगी । इस नजरिए से अजीत जोगी ही इस चुनाव में केन्द्रबिंदु के रूप में नजर आते हैं और जोगी फैक्टर पर ही चुनाव की विसात टिकी हुई नजर आती है।

दूसरे चरण में जिन  72 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होना है, उनमे कवर्धा से लेकर दुर्ग,रायपुर , बलौदाबाजार, मुंगेली,बिलासपुर ,जाँजगीर-चाँपा  इलाके की करीब बीस से पचीस सीटों पर कोई भी घूमकर देखे तो  यहां तीसरी ताकत की  ” ताकत ”  पर ही चुनाव का दारोमदार टिका हुआ नजर आता है। चूंकि करीब इसी  इलाके पर ही अजीत जोगी का असर अधिक है। छत्तीसगढ़ के इस मैदानी इलाके और सरगुजा के कुछ हिस्से में महसूस किया जा सकता है कि इस बार का चुनाव पिछले चुनावों के मुकाबले कुछ अलग है। एक तो इसी मायने में अलग है कि 2008 और 2013 में जहाँ बीजेपी औऱ कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले की स्थिति थी ।

वहां पर इस बार मुकाबला तीन कोने वाला नजर आता है। पहली बार चुनाव मैदान में उतरी अजीत जोगी की पार्टी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। उसमें भी बहुजन समाज पार्टी से गठजोड़ की वजह से चुनावी जोड़-गुणा-भाग में और मशक्क्त करनी पड़ रही है। यह वहीं इलाका है जहां मरवाही से खुद अजीत जोगी, कोटा से डॉ.रेणु जोगी, अकलतरा से ऋचा जोगी चुनाव मैदान में हैं।

इसी तरह लोरमी से धरमजीत सिंह, मुंगेली से चंद्रभान बारामते,बिल्हा से सियाराम कौशिक, तखतपुर से संतोष कौशिक , बेलतरा से अनिल टाह जैसे बड़े नाम हैं । जो पहले भी चुनाव जीत चुके हैं या जिन्हे चुनाव का अनुभव है। जाँजगीर इलाके में जैजेपुर , पामगढ़. चाँपा और सरगुजा इलाके में रामानुजगंज – प्रतापपुर जैसी कई सीटों पर भी छजकां- बसपा गठबंधन के उम्मीदवार  मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं।

इस त्रिकोणीय मुकाबले में अहम् सवाल यही है कि तीसरी ताकत  मुकाबले में कितनी असरदार है….?    इसे लेकर भी चुनावी पंडितों की अपनी अलग-अलग राय है। सीधा सा गणित तो यही है कि  अजीत जोगी कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं….। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं….। वे दिल्ली में भी पार्टी के बड़े पदों पर रहे हैं…। उनकी पहचान छत्तीसगढ़ कांग्रेस  के मॉस लीडर के रूप में रही है। वे अब पार्टी से अलग होकर चुनाव मैदान में हैं। लिहाजा उन्हे जो भी समर्थन मिलता है, उससे कांग्रेस को ही नुकसान होगा।

खासकर बीजेपी के शिविरों में इसी बात की चर्चा है कि कांग्रेस के वोट बंटने से फायदा बीजेपी को ही होगा। लेकिन एक राय भी बन रही है कि छत्तीसगढ़ में अब तक  वोटर का ट्रेंड सिर्फ दो पार्टियों की तरफ ही रहा है और ध्रुवीकरण भाजपा-कांग्रेस की तरफ ही रहा है। ऐसे में इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वोटर तीसरी ताकत पर भरोसा जताएगा…..? नई पार्टी, नया चुनाव चिन्ह और जोगी कांग्रेस से जुड़े नेताओँ की  कांग्रेसी के रूप में पुरानी छवि के बीच  वोटर का भरोसा जीतना छजकाँ के सामने भी एक चुनौती नजर आती है। ऐसा मानने वालों की भी कमी नहीं है कि तीसरी ताकत सिर्फ कांग्रेस के लिए ही चुनौती नहीं है, बल्कि पिछले 15 बरसों  से प्रदेश में सरकार चला रही भाजपा को भी इससे नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ऐसा मानने वालों की दलील है कि छत्तीसगढ़ में तीसरी ताकत का चाहे जितना भी असर रहा हो, वह सत्ता दल के वोट पर भी सेंध लगाती रही है। उधर कांग्रेसी मानते हैं कि अजीत जोगी के बिना चुनाव मैदान में उतरी कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। इससे पार्टी को फायदा ही होगा। नुकसान नहीं होगा। उनकी दलील यह भी है कि छत्तीसगढ़ के वोटर बीजेपी सरकार से नाराज हैं और एंटीइंकबेंसी का लाभ कांग्रेस को ही मिलेगा। लब्बोलुआब यह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों का चुनावी गणित जोगी कांग्रेस के आँकड़ों के बिना पूरा नहीं हो रहा है। लोग यह जानने की कोशिश में लगे हैं कि तीसरी ताकत आखिर कितनी ताकतवर है  और यह ताकत चुनाव को किस दिशा में ले जा रही है….?

इस तरह की दलीलों और कयासों के बीच जोगी समर्थकों को अपनी अहमियत का अहसास है। उन्होने एक तो पूरी रणनीति के तहत अपने उम्मीदवारों का चयन किया और हर एक समीकरण पर नजर रखते हुए अपने दिग्गज मैदान में उतारे हैं। पार्टी ने चुनावी मैदान में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और कहीं भी कसर बाकी नहीं रख रहे हैं। उनकी तैयारियों में इस बात की भी झलक मिलती है कि उनकी नजर सत्ता की चाभी पर है। उन्हे लगता है कि जादुई आँकड़े के नजदीक तक  पहुंचे या न पहुंचे इस चाभी तक जरूर पहुंच सकते हैं।

और बीजेपी -कांग्रेस को इस चाभी तक पहुंचने से पहले ही रोक सकते हैं। जोगी कांग्रेस की इस रणनीति का छत्तीसगढ़ के वोटर पर कितना असर पड़ता है और पार्टी को कितनी जगह मिल पाती है ….. , यह तो चुनाव के नतीजों से ही साफ हो सकेगा। लेकिन फिलहाल चुनावी चर्चाओँ में जोगी फैक्टर ने अपनी जगह जरूर बना ली है। और लोग इस हिसाब के ही इर्द-गिर्द घूम रहे हैं कि चुनावी मैदान में जोगी कांग्रेस का कितना असर है….? इस दिलचस्प सवाल के जवाब में ही बीजेपी -कांग्रेस और खुद अजीत जोगी का भविष्य टिका हुआ है।

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