पुलिस को पिटते देखती रही पुलिस…कवर्धा पुलिस का कारनामा…आंखों के सामने गा़ड़ी में तोड़फोड़…फिर आरोपी के इशारे में FIR

बिलासपुर—अजब है लेकिन सच है….धोखाधड़ी और 40 लाख से अधिक की ठगी के आरोपी को बचाने कवर्धा पुलिस ने जान की बाजी लगा दी है। पहले तो कवर्धा पुलिस ने अपने सामने ही आरोपियों के हाथों वर्दी को पिटते देखा। इसके बाद अपराधी के समर्थन में बिलासपुर पुलिस के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज किया। यह जानते हुए भी कि अपराधियों ने उन्हीं के सामने बिलासपुर क्राइम ब्रांच टीम के जवानों को ना केवल पीटा बल्कि सरकारी गाड़ी में तोड़फोड़ भी की है। बावजूद इसके बिलासपुर पुलिस की शिकायत पर कवर्धा पुलिस ने ना तो मामला दर्ज किया है। ना ही किसी की गिरफ्तारी की है। फिलहाल मामले में कवर्धा पुलिस किसी भी पत्रकार का फोन नहीं उठा रही है। इधर बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस कप्तान ने कहा कि मामले में तह तक जाएंगे। आखिर ऐसा हुआ कैसे। बहरहाल मामले को लेकर प्रदेश में बमचक मचा  है।
                          कवर्धा पुलिस की जितनी जशगान की जाए कम है। पहले तो अपनी आंखों के सामने बिलासपुर पुलिस को पिटते देखा। जब एफआईआर दर्ज करने की बात आयी तो आरोपियों की शिकायत पर बिलासपुर क्राइम ब्रांच के जवानों को ही आरोपी बना दिया।
                    मालूम हो कि प्रार्थी संजय बंजारे की शिकायत और पुलिस जांच पड़ताल के बाद सरकंड़ा थाने में प्रदीप चन्द्राकर पिता सुरेन्द्र चन्द्राकर के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया । प्रदीप चन्द्राकर पेशे से पटवारी है। इसके अलावा वह सरकंडा क्षेत्र में करियर ड्रीम एजुकेशन अकादमी के नाम से चिटफ़ंड कम्पनी भी चलाता है।
                           पुलिस जानकारी के अनुसार पटवारी ने गांव गांव घूमकर सरकारी कामकाज के दौरान लोगों से प्रोजेक्ट में पैसा लगाने का दबाव बनाया। साथ ही लोगों को दो से चार या पांच गुना  मुनाफ़े गारंटी दी। प्रदीप चन्द्राकर के झांसे में आकर बिलासपुर के डॉक्टर संजय बंजारे ने एक साथ 40,00,000 रूपए इन्वेस्ट किया। इसके अलावा पटवारी ने सैकड़ों लोगों को झांसे में लेकर चिटफंड का ग्राहक बनाया। और करोड़ों रूपए लेकर फरार हो गया।
        लगातार मिल रही ठगी की शिकायत के बाद बिलासपुर पुलिस कप्तान आरिफ शेख ने जांच पड़ताल के बाद आरोपी ठग पटवारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 34 के तहत मामला दर्ज करने को कहा। साथ ही बिलासपुर क्राइम ब्रांच टीम को आरोपी को जल्द से जल्द पकडने का आदेश भी दिया।
               वरिष्ठ पुलिस कप्तान के आदेश के बाद क्राइम ब्रांच बिलासपुर की टीम ने करोड़ों की ठगी करने वाले पटवारी की तलाश तेज कर दी। इस बीच क्राइम सायबर सेल के सहयोग से जानकारी मिली कि आरोपी प्रदीप चन्द्राकर इस समय कवर्धा में है। पता लगते ही टीम कवर्धा रवाना हो गयी।
               बिलासपुर क्राईम ब्रांच टीम ने आरोपी का लोकेशन ट्रेस कर आरोपी प्रदीप कुमार चंद्राकर ग्राम पेंड्री,थाना-पांडातराई को गाड़ी को घेर लिया। इस दौरान आरोपी की गाड़ी में उसके दोस्त और रिश्तेदार खदानंद चंद्राकर सवार था। जब बिलासपुर पुलिस ने पूछा कि प्रदीप कौन है..इस समय कहां है। इतना सुनते ही गाड़ी में सवार लोगो ने आरोपी को बचाने हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते गाड़ी के आस पास लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
                 इसके बाद स्थानीय लोगों ने आरोपी और उसके परिजनों के साथ क्राइम ब्रांच की टीम को बंधक बना लिया। सरकारी गाड़ी में जमकर तोड़फोड़ की। मामले की जानकारी मिलते ही कवर्धा पुलिस भी मौके पर पहुंची। लेकिन वह ना केवल वर्दी को पिटते देखते रही..बल्कि गाड़ी में तो़ड़फोड़ होने का नजारा भी देखा। बावजूद इसके किसी को रोकने का प्रयास नहीं किया गया।
                      मामला जब किसी तरह से शांत हुआ तो कवर्धा पुलिस ने आरोपी पटवारी और परिजनों की शिकायत पर बिलासपुर क्राईम ब्रांच टीम के जवानों के खिलाफ लूटपाट, मारपीट का गंभीर मामला दर्ज कर दिया।
वाह कवर्धा पुलिस…आरोपी को बचाने वर्दीधारियों को पिटवाया
                 हमेशा से सुर्खियों में रहने वाली कवर्धा पुलिस ने इस बार तो हद पार कर दी। यह जानते हुए भी आंख के सामने बिलासपुर की पुलिस पिटती रही। आरोपी ने भीड़ के साथ गाड़ी में तोड़फोड़ भी की। लेकिन एफआईआर बिलासपुर क्राइम ब्रांच टीम के खिलाफ लिखा गया। जबकि बिलासपुर क्राइम ब्रांच पुलिस टीम ने बताया कि आरोपी पटवारी बहुत बड़ा नटवर लाल है। बिलासपुर में उसने अकेले एक डॉक्टर को चालिस लाख का चूना लगाया है। इतना ही नहीं पटवारी ने गरीबों से दुगुना मुनाफा का झांझा देकर करोड़ों रूपए लूटा है। बावजूद इसके कवर्धा पुलिस ने बिलासपुर पुलिस की एक नहीं सुनी। उल्टा दोषी ठहराकर एफआईआर दर्ज किया। गाड़ी को भी जब्ती बना दी है।
मामला गंभीर…उच्च अधिकारी से करेंगे बातचीत
                  बिलासपुर पुलिस कप्तान ने कहा मारपीट का मामला गंभीर है। पटवारी ने करोड़ों रूपए का चिटफंड़ घोटाला किया है। उसकी लम्बे समय से तलाश थी। जब टीम ने पकड़ने का प्रयास किया तो जवानों के साथ ना केवल मारपीट हुई। जानलेवा हमला भी किया गया। गाड़ी में तोड़फोड़ हुई। ऐसा करना गंभीर अपराध है। शासकीय कार्य में बाधा भी है। पता लगाएंगे कि आखिर बिलासपुर पुलिस टीम के साथ ऐसा क्यों किया गया। उच्च अधिकारियों से बातचीत कर कवर्धा पुलिस की हरकतों की जानकारी देंगे। दोषियों को नहीं छोड़ा जाएगा।
बाहर से हमेशा मिला समर्थन…अपनों ने दिया धोखा
               मालूम हो कि बिलासपुर पुलिस ने राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय अपराधोे का कई बार खुलासा किया है। उतर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक के राज्यों की पुलिस ने फरार अपराधियों को पकड़ने में सहयोग दिया। इतना ही नहीं आतंकवादियों के स्थानीय नेटवर्क का खुलासा भी बिलासपुर टीम ने किया। मामले में जम्मू,दिल्ली और पंजाब पुलिस ने ना केवल समर्थन किया। बल्कि  बिलासपुर पुलिस ने अपराधियों के भांड़ाफोड़ने में मदद भी की। लेकिन वाह रे कवर्धा पुलिस … चिटफंड़ के माध्यम से करोड़ों की ठगी करने वाले पटवारी को बचाने वर्दी को ही पिटवा दिया। ताज्जुब की बात है कि वर्दी किसी दूसरे राज्य की नहीं बल्कि अपने ही राज्य  की अपनों की है।

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  1. By NS

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  2. By NS

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