मुफ्त में बदले जाएंगे हार्ट वाल्व….रोटरी क्लब का विशेष अभियान…डॉ.देवेन्दर ने बताया…गरीबों के साथ रोटरी क्लब

बिलासपुर—गरीबी और आर्थिक अभाव के चलते अब किसी भी हार्ट के मरीज की सांस नहीं रूकेगी। रोटरी इन्टरनेशनल फाउण्डेशन ने पिछली बार की तरह इस बार भी हार्ट रोगियों का इलाज मुफ्त में करने का फैसला किया है। यदि कोई हार्ट का रोगी है या फिर उसका वाल्व खराब हो चुका हो…और जिन्दगी की अंतिम सांस का इंतजार करता हो…तो ऐसे लोगों को एक बार गनियारी स्थिति जन स्वास्थ्य केन्द्र में जाएं…और जिन्दगी की अंतिम सांस को लम्बी सांस में बदल दें। यह बातें अपोलो में पदस्थ और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय डाक्टर देवेन्द्र सिंह ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही। डॉ.देवेन्द्र ने बताया कि इस बार रोटरी मिड टाउन बिल्सापुर की पहल पर फाउण्डेशन ने करीब 45 से 50 हार्ट मरीज का मुफ्त इलाज करने का फैसला किया है।

                             देखने में आया है कि हार्ट का वाल्व खराब होने के बाद मरीज अंतिम घड़ी का इंतजार करने लगता है। खासकर गरीबों में तो ऐसा ही होता है। जिन्हें दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़े…ऐसे परिवार में हार्ट का आरपेशन या वाल्व बदलने का सवाल ही नहीं उठता है। लेकिन गरीबी के कारण हार्ट का इलाज कराने में असमर्थ लोगों के लिए रोटरी इंटरनेशनल फाउन्डेशन ने एक बार फिर मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। अपोलो में पदस्थ और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय डॉ.देवेन्द्र सिंह ने बताया कि रोटरी मिड टाउन बिलासपुर की पहल पर रोटरी इन्टरनेशनल फाउन्डेशन ने पहले चरण में 72 हजार डॉलर यानि लगभग 54 लाख रुपए  की मदद से 45 से 50 मरीजों का पूरी तरह से मुफ्त इलाज कराने का फैसला किया है।

                         प्रेस वार्ता में रोटरी मिडटाउन के पदाधिकारी और सदस्य डॉ.देवेन्द्र के अलावा रोटरी क्लब गवर्नर डॉ. निखिलेश त्रिवेदी, जन स्वास्थ्य सहयोग केन्द्र गनियारी के निदेशक डॉ. रमन कटारिया, डॉ. अरुण बालानी और सुरेन्द्र अग्रवाल ने पत्रकारों को रोटरी इन्टरनेशनल की गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ.देवेन्द्र सिंह और डॉ. रम कटारिया ने बताया कि वाल्व दो प्रकार के होते हैं। एक वाल्व मेटेलिक होता है तो दूसरा बायों प्रोस्थेटिक होता है। मेटलिक वाल्व 25 से 30 का होता है। जबकि टिशू का बना बायों प्रोस्थेटिक वाल्व की कीमत 60 से 75 के बीच होता है। एक वाल्व बदलने में करीब एक लाख 20 हजार का खर्च आता है। यह जानते हुए भी गरीब इतने पैसे का इंतजाम नहीं कर सकते हैं। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बेहतर वाल्व के साथ मुफ्त में इलाज करने का रोटरी इन्टरनेशनल फाउण्डेशन ने हमेशा की तरह कदम उठाया है। 

                   डॉ.देवेन्द्र और डॉ. रमन कटारिया ने बताया कि कभी कभी मरीजों के दोनों वाल्व बदलने पड़ जाते हैं। जाहिर सी बात है कि खर्च भी बढ़ेगा। लेकिन इन्टरनेशनल फाउण्डेशन के प्रयास से पेशे से डॉक्टर लोग मुफ्त में आपरेशन से लेकर सभी दवाइयां मुफ्त में देते हैं। डॉ. रमन कटारिया ने बताया कि ज्यादातर महिलाओं में वाल्व इन्फेक्शन की शिकायत मिलती है। लेकिन यह शिकायत पिछड़े क्षेत्रों में ज्यादा है। उनके सामने कई बार जांच के दौरान पता चला कि गरीब तबके के मरीजों के ह्रदय के वाल्व बदलने की जरूरत है। ऐसे लोगों के लिए फाउण्डेशन का प्रयास बहुत ही सराहनीय है।

                       डॉ.देवेन्द्र और डॉ. निखिलेन्द्र त्रिवेदी ने बताया कि रोटरी क्लब मिडटाउन बिलासपुर ने इसके पहले फाउण्डेशन के सहयोग से 17 मरीजों का वाल्व बदला है। सभी लोग आज स्वस्थ्य हैं। इनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वाल्व और इलाज का खर्चा उठा सकें। बावजूद इसके आज सभी लोग स्वस्थ्य और दैनिक कार्य में लगे हैं। इस दौरान देवेन्द्र और रमन कटारिया ने मेटेलिक और बायो वाल्व में अन्तर के साथ ब्लड सर्कुलेशन को लेकर जानकारी भी दी।

        प्रेसवार्ता में यह भी बताया गया कि फाउन्डेशन की तरफ इस बार 54 लाख रूपए मिले हैं। इससे 45 से 50 मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाएगा। स्क्रिनिंग का काम जनस्वास्थ्य केन्द्र गनियारी में हार्ट विशेषज्ञ करेंगे। मरीजों का उपचार जन स्वास्थ्य सहयोग गनियारी और संकल्प चिकित्सालय रायपुर में किया जाएगा।

डॉ. रजनीश जुनेजा की स्मृति में अभियान

       

     डॉ. देवेन्दर ने बताया कि स्वर्गीय डॉ.रजनीश जुनेजा की स्मृति में इस बार अभियान चलाया जाएगा। डॉ. जुेजा 18 साल तक एम्स, नई दिल्ली में बतौर कार्डियोलॉजिस्ट की सेवाए दी। डॉ. रजनीश जुनेजा बिलासपुर हमेशा तीन चार महीने बाद आते थे। और अपनी सेवाएं मुफ्त में देते थे। गरीबों हार्ट के मरीजों को सेवाएं देते थे। कुछ समय पहले उनका निधन हो गया। इस बार उनकी स्मृति में प्रोजेक्ट का नाम रखा गया है। प्रोजेक्ट के तहत  अभी तक 6 मरीजों का इलाज किया जा चुका है।

गनियार जनस्वास्थ्य केन्द्र क्यों

                सिर्फ गनियारी जन स्वास्थ्य केन्द्र के ही मरीजों का वाल्व बदला जाएगा…आखिर क्यों…। सवाल के जवाब में देवेन्दर सिंह ने कहा कि सिम्स से लेकर जिला अस्पताल और अन्य क्लिनिक में हार्ट के मरीज आते हैं। यह सही है कि कई लोग बहुत ही गरीब होते हैं। लेकिन एक जगह नाम पहुंचने से उन्हें देखने और इलाज करने में आसानी होती है। हम चाहेंगे कि यदि कोई हार्ट का मरीज मिलता है तो उसे गनियारी जरूर भेजें यदि लगता है कि उसे इलाज की जरूरत है…तो जरूर इलाज किया जाएगा।

आयुष्मान योजना स्पष्ट नहीं

 क्या आयुष्मान योजना के तहत हार्ट का इलाज संभव नहीं है। सवाल के जवाब में डॉ.देवेन्दर ने बताया कि योजना में कई बातें स्पष्ट नहीं है। अभी योजना में बहुत कुछ सुधार की जरूरत है। इससे रोटरी मिडटाउन का कुछ लेना देना नहीं है। ह्रदय का वाल्व बदलने के लिए प्रोजेक्ट चला रहा है। जिस दिन सरकारी योजना बन जाएगी, हम कोई दूसरा प्रोजेक्ट हाथ लेंगे।

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