जिला सहकारी बैंक बोर्ड को झटका…डबल बैंच का फरमान…प्रशासक ही संभालेंंगे कामकाज…बैंकरों ने किया निर्णय का स्वागत

बिलासपुर—हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एकल बेंच के निर्णय के खिलाफ दायर रामकमल सिंह की याचिका को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाटी और न्यायधीश पार्थ प्रीतम साहू की कोर्ट ने जिला सहकारी बैंक पर दिए गए एकल कोर्ट के फैसले को यथावत रखा है। कोर्ट ने माना कि जिला सहकारी बैंक की जिम्मेदारी संचालक मंडल की वजाय प्रशासक के अधीन रहना उचित होगा।

                                             मालूम हो कि जिला सहकारी बैंक संचालक मंडल को नियम विरूद्ध चुनाव में गड़बड़ी और अन्य आरोपों की शिकायत के बाद पंजीयक रायपुर ने भंग कर दिया था। बोर्ड के सदस्य पंजीयक के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में पेश हुए। हाईकोर्ट ने मामले को लेकर ट्रिब्यूनल में जाने को कहा। करीब एक साल बाद ट्रिब्यूनल ने जिला सहकारी बैंंक संंचालक मंडल को बहाल कर बोर्ड अध्यक्ष मुन्नालाल राजवाड़े के पक्ष में फैसला सुनाया।

                   अध्यक्ष के समर्थन मे दिए ट्रिब्यूलन के फैसले को शासन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। करीब एक साल तक सुनवाई के बाद जस्टिस संजय के.अग्रवाल की एकल बेंच ने ट्रिब्यूनल के उलट संचालक मंडल के खिलाफ निर्णय दिया। बोर्ड को भंग कर जिला सहकारी बैंक को प्रशासक और सीईओ को बनाए रखने का आदेश दिया।

                             एकल बेंच के खिलाफ बोर्ड के सदस्य रामकमल सिंंह ने डबल बेंच में न्याय की गुहार लगाई। एक दिन पहले मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू ने मामले को लम्बी सुनवाई के बाद अपीलार्थी के खिलाफ फैसला सुनाया है। डबल बैंच ने स्पष्ट किया कि एकल बैंच का फैसला उचित है। जिला सहकारी बैंक बोर्ड को बहाल नहीं करते हुए प्राधिकरी और सीईओ ही कामकाज संभालेंगे।

हाईकोर्ट का बैंक हित में फैसला

                      जिला सहकारी बैंक के वकील जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि हाईकोर्ट ने किसानों और बैंंक के हित में फैसला दिया है। फैसले में बताया गया कि एकल बेंंच का निर्णय उचित है। जिला सहकारी बैंंक प्राधिकारी के अधीन काम करेगा। बोर्ड को बहाल नहीं किया जाएगा। जितेन्द्र ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले से बैंक के काम काज को बल मिला है। निर्णय का सबसे अच्छा प्रभाव किसानों पर पड़ेगा। बैंक परिवार फैसले का स्वागत करता है।

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