समस्याएं नहीं रोक सकती विकास का रथ–रानू

बिलासपुर– ( IMG_20150904_141424भास्कर मिश्र )   -कमिश्नर रानू साहू कहती हैं कि प्रसिद्ध पश्चिमी चिंतक हीकल का मानना है कि कमी की चेतना सभी इंसान में होती है। जिस इंसान में कमी की चेतना नहीं होती उसके विकास में ठहराव आ जाता है। कमी की चेतना विकास का मार्ग देता है। बेहतर करने का रास्ता बनाता है। मै रोज इसी सिद्धान्त को लेकर चलती हूं। शाम को अपने काम का विश्लेषण करती हूं। निराश भी होती हूं कि.. मै इस काम को और बेहतर कर सकती थी। इसके बाद मैं बेहतर करने की दिशा में बढ़ जाती हूं।

               बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों में से एक है। यहां के लोगों में अन्य शहरों की तुलना में ऊर्जा और विश्वास कूट-कूट कर भरा है। यह संभावनाओं से भरा शहर है। मुझे खुशी है कि प्रशासनिक सेवा में आने के बाद मेरी कर्मस्थली बिलासपुर शहर बना । जो एक महिला के नाम पर बसा है। यहां स्त्रियों को लोग बड़े सम्मान की नज़र से देखते हैं। मुझे यहां के लोगों से बहुत स्नेह मिला है। इससे मुझे काम करने की शक्ति मिली है।

           सीजी वाल से बातचीत के दौरान निगम कमिश्नर रानू साहू ने कहा कि 2006 राज्य प्रशासनिक सेवा का पेपर देने गरियाबंद से बिलासपुर आई थी। उस समय ऐसा लगा कि जैसे गरियाबंद के बड़े स्वरूप वाले शहर में आ गयी हूं। हरियाली यहां की विशेषता थी। सरलता लोगों की पहचान। मेरा चयन डीएसपी के लिए हुआ। इस शहर ने मुझे भारतीय प्रशासनिक सेवा की ओर जाने के लिए प्रेरित किया। यूपीएससी की तैयारी की। चयन भी हुआ। सौभाग्य कहिए कि बतौर कमिश्नर मुझे मेरे सपनों के शहर में ही काम करने के लिए भेजा गया।

RanuSahu-12-Aug-2014                     रानू ने बताया कि जब विकास की प्रक्रिया चलती है तो दैनिक जीवन में कुछ परेशानियां आती है। बिलासपुर वासियों के साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। मैं भी उसका हिस्सा हूं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम विकास का दामन ही छोड़ दें। यदि ऐसा करेंगे तो हम विकास की दौड़ में बहुत पीछे छूट जाएंगे। परेशानियों को लेकर लोगों मैं नाराजगी हो सकती है लेकिन मेरा दावा है कि आने वाले समय में सभी की नाराजगी खुशियों में बदल जाएगी।

           मानती हूं कि सिवरेज योजना में कुछ देरी हुई है। लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। बेहतर परिणाम के लिए ऐसा होता भी है। यद्यपि परेशानियां नहीं आनी चाहिए थी लेकिन आई। कभी-कभी कुछ परिस्थियां ना चाहकर भी विपरीत हो जाती है। लेकिन अब सब कुछ नियंत्रण में है।

RANU SAHU1        रानू साहू ने बताया कि जीवन सतत प्रवाह का नाम है। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अधिक से अधिक लोगों तक अपनी सेवाएं दे सकूं इसलिए भारतीय प्रशासनिक सेवा में आयी।

             अकेले खुद के योगदान को ना मानते हुए हुए रानू साहू ने कहा कि बिलासपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलना चाहिए था इसलिए मिला। इसमें सर्वाधिक योगदान टीम को जाता है। जिन्होंने दिन रात एक कर इस मुहिम को अंजाम तक पहुंचाया। शहर की आयरन लेडी ने बताया कि हो सकता है कि अभी लोग स्मार्ट सिटी योजना को लेकर असमंजस में हो। उनके मन में तमाम प्रश्नों का उठना लाजिम है। स्मार्ट सिटी का स्वरूप कैसा होगा और कब तक तक पूरा होगा। बताना चाहुंगी कि इस दिशा में काम की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एक दिन यहां के लोग अपने शहर पर पहले से ज्यादा नाज करेंगे।

               रानू ने बताया कि सुडा स्तर पर कन्सल्टेंट का चयन कर लिया गया है। जल्द ही पैन सिटी प्लान तैयार किया जाएगा। शहर की समस्याओं को चिन्हांकित कर उसे पहले दूर किया जाएगा। स्मार्ट सिटी को अमली जामा पहनाने के लिए रिट्रोसिटी और ग्रीन सिटी की योजना तैयार की जाएगी। इस दिशा में जल्द ही काम शुरू होने वाला है।

             रानू ने बताया कि अरपा विकास प्राधिकरण का काम जब पूरा होगा तो बिलासपुर को देश दुनियां में नई पहचान मिलेगी। इस योजना के अन्तर्गत अरपा के दोनो तट पर 12 किलो मीटर रिवर व्यू सड़क का निर्माण और प्लांटेशन किया जाएगा। जहां लोग सुबह शाम शांति के दो पल का आनंद उठाएंगे। इसके बाद शेष जमीन पर सुनियोजित ढंग से खूबसूरत नया शहर बनाया जाएगा।

RANU SAHU                         कमिश्नर साहू ने टाउन एंड कन्ट्री प्लानिंग की फ्लाफ योजना पर बताया कि जरूरी नहीं कि आगे भी यह योजना फ्लाफ हो। मेरा मानना है कि कितनी भी सफल योजना क्यों ना हो उसमें भी सुधार की गुंजाइश हमेशा होती है। हमे पहले चरण में ही अपनी कमियां दूर करने का मौका मिला है।

             रानू साहू ने बताया कि बिलासपुर की यातायात समस्या का मुझे पहले से ही अहसास है। पिंक आटो में घूमने के बाद समस्या को बहुत नजदीक से देखने को मिला। जब हम विकास की दिशा में चल पड़े हैं तो उसे भी जल्द ही दुरूस्त कर लिया जाएगा।

               रानू साहू ने बताया कि बिलासपुर को एक हाइटेक पुस्तकालय की जरूरत है। एक साथ तीन सौ से अधिक लोग पुस्तकालय का आनंद उठा सकें। उसे पूरा करना मेरी प्राथमिकता है।

Comments

  1. By निर्मल अग्रवाल

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