क्या बिलासपुर को मिलेगा कोई मंंत्री…सीएम घोषणा के बाद..रहेगी रश्मि सिंह और शैलेश पाण्डेय के नाम पर नजर

बिलासपुर—देर शाम या रात्रि को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री कौन…का जवाब मिल जाएगा। बहरहाल दौड़ में चार नेता हैं। मुख्य मुकाबला भूपेश और टीएस सिंह देव में है। कयास लगाया जा रहा है कि दोनों में से एक नाम फायनल है। बाकी रेस में शामिल दो नेता लोकसभा की तैयारी करेंगेे। बिलासपुर में चर्चा का विषय है कि जिले को कितने मंत्री मिलेंगे। जितनी मुंह है..उतनी बातें हो रही है। कोई जातिगत का आंकड़ा पेश कर रहा है..तो कोई संभागवार मंत्री बनाए जाने का अनुमान लगा रहा है। सभी लोग अपने दावों के समर्थन में पुख्ता तर्क पेश कर रहे हैं।

                              लम्बे समय से सत्ता से दूर होने के बाद कांग्रेस में दिग्गज नेताओं की कतार है। इनमें ज्यादातर ऐसे नेता हैं..जो अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद बनी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। डॉ.चरणदास महंत एक समय मध्यप्रदेश के गृहमंत्री से लेकर केन्द्र में मनमोहन सरकार के खाद्य प्रसंस्करण मंत्री रह चुके हैं। भूपेश बघेल, रविन्द्र चौबे.सत्यनारायण शर्मा,धनेन्द्र साहू,मोहम्मद अकबर समेत कई चेहरे हैं जो कभी ना कभी कांग्रेस सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वरिष्ठता में कवासी लखमा,अरूण वोरा,जय सिंंह अग्रवाल जैसे अनेक नाम हैं जो मंत्री बनने के लिए तैयार है।

                  पिछले पन्द्रह साल से सत्ता से दूर रहने के बाद इस बार कुछ ऐसे चेहरे जीतकर आए हैं…जो हैं तो नए…लेकिन दिग्गजों को धूल चटाकर विधानसभा पहुंचे हैं। रायपुर में विकास उपाध्याय ने राजेश मुणत को तो बिलासपुर में शैलेश पाण्डेय ने कद्दावर मंत्री अमर अग्रवाल को हराया है। कसडोल से दिग्गज भाजपा नेता गौरीशंकर अग्रवाल को हराकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस का प्रत्याशी का चेहरा भी अब बड़ा हो चुका है।

                                                छत्तीसगढ़ गठन के बाद मंत्रीमंडल में हमेशा बिलासपुर का दबदबा रहा है। इन 18 सालों में सरकार किसी भी पार्टी की हो लेकिन मंत्रीमंडल में बिलासपुर जिला से कोई ना कोई चेहरा रहा है। 2000 से 2003 तक बिलासपुर से सबसे बड़ा चेहरा प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी का था। बाद में पिछले 15 साल से अमर अग्रवाल का नाम मंंत्रीमंडल में कायम रहा। इसके अलावा डॉ.कृष्णमूर्ती बांधी,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, बद्रीधर दीवान निवर्तमान, राजू सिंह क्षत्री,महिला आयोग अध्यक्ष हर्षिता पाण्डेय को लालबत्ती की सवारी करने का अवसर मिला। लालबत्ती की सवारी करने वालों में बिलासपुर संभाग के मुंगेली जिला से पुन्नुलाल मोहिले,धरमजीत सिंह, कोरबा से लखनलाल साहू समेत कई नाम है।

                                             बहरहाल शैलेश पाण्डेय और रश्मि सिंह को लेकर चर्चा तेज हो गयी है। लोगों का मानना है कि मंत्रीमंडल गठन के समय जाति और क्षेत्रियता को ध्यान रखा जाता है। जाहिर सी बात महिलाओं की भी मंत्रीमंडल में भूमिका होगी। यद्यपि इस बार कांग्रेस में आधा दर्जन से अधिक महिलाएं चुनाव जीती हैं। एक नाम बिलासपुर से रश्मि सिंह का भी है। विश्लेषकों का मानना है कि रायपुर,दुर्ग और जगदलपुर संभाग से वरिष्ठ नेताओं की बड़ी खेफ है..ऐसे में इन संभागों से किसी महिला को मंत्रीमंडल में स्थान मिलना मुश्किल है। जाहिर सी बात है रश्मि सिंह को मंत्रीमंडल में स्थान मिल सकता है। क्योंकि रश्मि सिंह ने हर्षिता पाण्डेय को हराया है।

                               कुछ लोगों का तर्क है कि पिछले 18 साल से अमर अग्रवाल की गिनती मंत्रीमंडल में बड़े चेहरे के रूम में होती रही है। एक समय तो उनका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए भी चल रहा था। जीएसटी प्रारूप निर्माण से लागू होने तक…केन्द्रीय मंत्रियों ने अमर की जमकर तारीफ की थी। ऐसे में यदि शैलेश पाण्डेय को मंत्रीमंडल में स्थान मिले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। बिलासपुर संभाग से तीन मंत्री जरूर रहेंगे। क्या रश्मि सिंह और शैलेश पाण्डेय इन चेहरों में शामिल होंगे..जवाब के लिए इंतजार…दो एक दिन की बात है।

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