शिक्षक ही संदेह के दायरे में क्यों..? उठी मांग-बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी या सभी विभागों में अनिवार्य हो या स्कूलों में बंद करें

बिलासपुर।बायोमेट्रिक मशीन से हाजरी या तो सभी विभागों में अनिवार्य किया जाए या स्कूलों में बंद किया जाए ।शिक्षाकर्मी नेता प्रदीप पाण्डेय ने प्रदेश के एलबी संवर्ग,टी संवर्ग, पंचायत संवर्ग, के समस्त शिक्षकों का सबसे बड़े तनाव कॉसमॉस योजना के तहत स्कूलों में चल रहे बायोमेट्रिक मशीन से शिक्षकों की उपस्थिति के नियम पर शिक्षकों के जीवन में रोजाना हो रहे तनाव पर अपनी बेबाक राय रखी।(cgwall.com के व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करे)

प्रदीप ने कहा कि शिक्षकों के इस तनावपूर्ण स्थिति पर प्रदेश की नई सरकार ध्यान दे और इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाए ताकि शिक्षक तनाव रहित वातावरण में शिक्षण कार्य कर सके।

शिक्षाकर्मी नेता प्रदीप पाण्डेय ने बताया कि शिक्षकों का तनाव तब और बढ़ जाता है जब बायोमेट्रिक मशीन काम नही करती है। या फिर आधे शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज हो जाती है और आधे या किसी शिक्षक विशेष की दैनिक उपस्थिति दर्ज नही हो पाती है।

कभी किसी कारणवश कभी वाहन ख़राब हो जाय या ट्रेन,बस टैक्सी विलम्ब से पहुंचे और स्कूल पहुँचने में थोड़ा विलंब हो जाय  तो शिक्षकों को तनाव हो जाता है। क्योंकि ज्यादातर स्कूल ग्रमीण क्षेत्रों में है और शिक्षक यातायात के साधनों के भरोसे है।

प्रदीप ने बताया कि बायोमेट्रिक को लेकर विभाग से इसकी कड़ाई के लिए कोई आदेश निकलता है। तो डर लगता है कि बायोमेट्रिक की तकनीकी खराबी  की वजह से उपस्थिति की अनियमितता का ठीकरा शिक्षकों के ऊपर न फुट जाय । शिक्षक नेता प्रदीप पांडेय ने बताया कि हमें बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति से कोई परहेज नहीं है। किन्तु यह व्यवस्था समस्त शासकीय कार्यालयों में होनी चाहिए।केवल शिक्षक समुदाय को ही संदेह के नजर से क्यों देखा जा रहा है। देखा जाए तो समस्त शासकीय विभागों में विद्यालय ही एक ऐसी संस्था है जिसमें शिक्षक घंटी बजाकर विद्यालय में अपनी उपस्थिति की जानकारी समुदाय तक दर्ज कराते हैं।

कहा जाता है कि टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता और संकीर्ण विचारों से कोई बड़ा नहीं होता।यदि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना है तो शिक्षकों के मनोबल को ऊंचा उठाना होगा। और शासन को नीति बनाकर तनाव रहित वातावरण बनानी होगी।

शिक्षकों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना होगा।विद्यालयों में भेाैतिक एवम् शैक्षिक संसाधनों को मजबूत करना होगा।जब तक यह सब नहीं किया जाता तब तक केवल उपस्थिति के सहारे शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार केवल और केवल बेईमानी है।

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