भूपेश और टीएस में 50-50 का खेल…क्या एक कार्यकाल में होंगे दो CM…क्योंकि दोनों मानने को तैयार नहीं…।

बिलासपुर— दिल्ली में राहुल के बंगले में दिनभर की कवायद के बाद देर शाम तक छत्तीसगढ़ सीएम कौन पिक्चर साफ नहीं हुआ। बैठक खत्म होेने के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी पीएल.पुनिया ने बताया कि फैसला अब रायपुर में रविवार को होगा। 17 दिसम्बर को नए सीएम की ताजपोशी होगी,सूत्रों की मानें तो दिनभर चले विचार मंथन के दौरान कई बार सीएं दावेदारों के चेहरे बदलते रहे। कभी भूपेश तो कभी टीएस का नाम सामने आया। इस दौरान पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.चरणदास मंहत भी सीएम की रेस में कुछ देर तक आगे रहे। इस बीच जानकारी मिली कि दुर्ग सांसद ताम्रध्वज साहू प्रदेश के नए मुख्यमंंत्री होंगे। लेकिन देर शाम तक किसी के नाम का एलान नहीं किया गया। इस बीच दिल्ली से जब भी सीएम बनने की खबर छत्तीसगढ़ पहुंची..समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी की। लेकिन बैठक खत्म होने के बाद पीएल पुनिया के बयान ने…समर्थकों को बेचैन कर दिया। अब जानकारी मिल रही है कि रविवार को रायपुर में सीएम के नाम का एलान किया जाएगा।(cgwall.com के व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करे)

                           सूत्रों की मानें तो दिनभर की कवायद में बैठक के दौरान कई बार नरम गरम का दौर चला। माना जा रहा था कि भूपेश और टीएस के बीच सीएम का फैसला हो जाएगा। जब दोनों के बीच बात नहीं बनी तो राहुल गांधी और विचार करने वालों ने चरणदास का नाम आगे किया लेकिन दोनों नेता बोले तो कुछ नहीं…लेकिन असंतोष जाहिर करने में देरी नहीं की। अंत में जब ताम्रध्वज साहू का नाम सामने आया तो भूपेश,टीएस और चरणदास महंत एक नजर आए। जमकर नाराजगी जाहिर की।

              बैठक में तीनों नेताओं कहा कि सांसद भी दुर्ग का विधायक भी दुर्ग का और संघर्ष प्रदेश के नेता करें। सीएम ताजपोशी के समय सिर किसी दूसरे का हो इसे हम हजम नहीं करेंगे। जानकारी के अनुसार एक बार तो टीएस और भूपेश ने पार्टी से इस्तीफा या दूर रहने का भी संकेत दे दिया। भूपेश और टीएस ने इस दौरान अपने अपने संघर्ष और पार्टी जीत में योगदान को राहुल गांंधी के सामने रखा। अंत में सीएम कौन का मामला रविवार तक के लिए टाल दिया गया।

                                 एक जानकारी और मिल रही है कि कांग्रेस आलाकमान नतीजे पर पहुंचा है कि टीएस और भूपेश दोनों को ही नेतृत्व का मौका दिया जाए। सूत्रों की मानें तो पांच साल के कार्यकाल को दो भागों में बांटकर दोनों नेताओं को सीएम बनने का अवसर दिया जाए। बावजूद इसके आलाकमान रविवार का समय लेकर दोनों नेताओं को मनाने का प्रयास कर रहा है। यदि बात नहीं बनी तो पहले ढाई साल भूपेश का तो अंतिम ढाई साल टीएस का सीएम हो जाए तो आश्चर्य की कोई बात नहीं होगी। क्योंकि इस प्रकार का फार्मुला पहले भी कई बार देखने को मिल चुका है।

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