जब भोला के हुए दो टुकड़े…फिर भी बच गया…सिम्स डॉक्टरों का चमत्कार…कहा..अब रायपुर में होगा इलाज

बिलासपुर—अजब है लेकिन सच है। कुदरत का करिश्मा कहें..या जीने की जीजीविषा…या कहें..जाको राखे साइयां..मार सके ना कोय…। और यदि इसे हम सिम्स डाक्टरों की उपलब्धी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। जी हां कुछ ऐसा ही करिश्मा बिलासपुर स्टेशन और बाद में सिम्स में इलाज के दौरान हुआ है। रेल के नीचे आने से दो टुकड़ों में बट चुका व्यक्ति अब आधे शरीर के साथ बोल रहा है..कि उसे कोई बचा ले..वह मरना नहीं चाहता है। और उसे बाद में बचा भी लिया जाता है।

                     सिम्स के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर लखन सिंह भी स्वीकार कर रहे है कि भोला का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है। बहरहाल दो टुकड़े में बंटे भोला अब खतरे के बाहर है। अब उसका इलाज रायपुर में होगा। बहरहाल कोई कुछ भी कहे..लेकिन बिलासपुर शहर के लोग भोला के बचने को कुदरत का सबसे बड़ा चमत्कार मान रहे हैं। क्योंकि लोगों का ऐसा मानना है कि ऐसे कहानी हमने या तो फिल्मों में देखी है या फिर किताबों में ही पढ़ा है। हकीकत में ऐसा पहली बार ही देखने को मिल रहा है।

                          मालूम हो कि एक दिन पहले बिलासपुर जीआरपी पुलिस ने सिम्स में एक ऐसे व्यक्ति को भर्ती किया जिसका शरीर ट्रेन की चपेट में आने से दो टुकड़ा में बंट गया। शरीर को दो टुकड़ा करने के बाद जब ट्रेन गुजर गयी तो व्यक्ति का उपर वाला हिस्सा हरकत में आया। हाथ उठाकर बोला मैं जिन्दा रहना चाहता हूं..। मुझे बचाओ। इतना सुनते ही लोगों की भीड़ मरा मान चुके शरीर के पास पहुंच गयी। जीआरपी को दो टुकड़ों में बंटे व्यक्ति ने बताया कि उसका नाम भोला लोधी है।  मरना नहीं चाहता। कोई दया करे…उसे बचा ले।

                   इतना सुनते ही जीआरपी टीम ने तत्काल भोला के शरीर के दोनों टुकड़ों को उठाकर सिम्स में इलाज के लिए भर्ती किया। इसके पहले शरीर से ट्रेन गुजरने के बाद लोगों ने देखा कि व्यक्ति का नीचे का हिस्सा पटरी के बीच और मुख्य शरीर पटरी के बाहर है। इतने में लोग कुछ कहते…शरीर का ऊपर वाला हिस्सा बोलने लगा। हाथ उठाकर बताया कि उसका नाम भोला लोधी है। वह बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लाक का रहने वाला है। उसने लरजते और टूटते सांस के साथ बताया कि परसाकापा-बराही गांव का रहने वाला है। कोई उसकी मदद करे..मरना नहीं चाहता…इतना कहते हुए वह हाथों के सहारे उठने का प्रयास करने लगा। देखते ही देखते लोगों की भीड़़ इकठ्ठी हो गयी। और भोला लोदी बेहोशी के आगोश में जाने लगा।

                 आनन फानन में जीआरपी की टीम भोला साहू के शरीर के दोनों टुकड़ों को एम्बुलेन्स में भरककर सिम्स की ओर दौड़े। अपनी तरह का अजूबा मामला देखकर सिम्स के डॉक्टर भी हतप्रभ रह गए। डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद विशेष इलाज शुरू किया। बड़ा आपरेशन कर भोला लोधी को बचा भी लिया। लेकिन उसका नीचे का अंग हमेशा के लिए शरीर से अलग हो गया।

                                डॉक्टर लखन सिंह ने बताया कि फिलहाल भोला लोधी खतरे से बाहर है। लेकिन बेहतर इलाज के लिए उसे रायपुर रिफर करना ही होगा।  डॉ. लखन सिंह ने कहा दो टुक़ड़ों में होने के बाद बचने की संभावना नहीं के बराबर होती है। यदि मरीज बच भी गया तो उसके कई वैज्ञानिक कारण होते हैं। लोग इसे चमत्कार कहते हैं। बहरहाल भोला का नीचे का अंग बेकार हो चुका है। बाकी इलाज रायपुर में ही संभव है।

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