मरवाही हॉस्टल में छात्रा की मौत मामले की न्यायिक जाँच हो..जोगी ने लिखा प्रेमसाय सिंह को पत्र

रायपुर ।पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने मरवाही इलाके के सकोला छात्रावास में छात्रा की मौत के मामले का न्यायिक जाँच की मांग की है। आदिम जाति कल्याण मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम को पत्र लिखकर उन्होने छात्रावास की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था बेहतर बनाने की मांग की है।अपने पत्र में अजीत जोगी ने लिखा है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र मरवाही में स्थित छात्रावासों के संचालन सुरक्षा में लापरवाही की शिकायत सामने आई है। छात्रावास के प्रबंधन और संचालन में लापरवाही की वजह से 5 जनवरी को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय गौरेला में कक्षा छठवीं में अध्ययनरत छात्र वृंदा नायक की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक यह छात्रा गौरेला वि.खं. के बोकरामुडा की रहने वाली थी । बीते 4 जनवरी  की शाम उसकी तबीयत खराब होने की वजह से उसे हॉस्टल की रसोई या सेनेटोरियम लेकर गई तथा रात में वापस ले गई।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करे

रात में तबीयत बिगड़ने पर सुबह उसे फिर सेनेटोरियम इलाज हेतु लाया गया पर इलाज के दौरान लगभग सुबह 11:30 बजे उसकी मौत हो गई । छात्रा वृंदा नायक की मौत में हॉस्टल प्रबंधन की लापरवाही परिलक्षित हो रही है।

उन्होने आगे लिखा है कि इसी तरह प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास सकोला वि.ख. पेण्ड्रा में प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास रूमगा वि.ख. मरवाही के संचालन में अधीक्षक द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास सकोला पेंड्रा के संबंध में शिकायत है कि अधीक्षिका एवं सुरक्षा गार्ड शीतकालीन अवकाश के बाद 2 जनवरी तक छात्रावास में कर्तव्य पर उपस्थित नहीं रही। मीडिया द्वारा इस तथ्य को उजागर करने के बाद अधीक्षिका द्वारा मीडियाकर्मियों पर ही मनगढ़ंत आरोप लगाकर पुलिस चौकी में शिकायत कर उन्हें फंसाने की कोशिश भी की गई । प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास सकोला के संबंध में शिकायत है कि अधीक्षिका कर्तव्य से अक्सर गायब रहती है तथा रसोइए के भरोसे उन्हें छोड़ दिया जाता है, साथ ही छात्राओं की सुरक्षा भगवान भरोसे रहती है ।

श्री जोगदी के पत्र के मुताबिक ठीक इसी तरह की शिकायत प्रीमैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास रूमगा मरवाही की भी है। यहां की अधीक्षिका द्वारा छात्राओं को विगत 1 माह से रोज खाने में आलू की सब्जी और दाल चावल दिया जा रहा है जबकि नाश्ते का कोई प्रबंध नहीं किया जा रहा है, साथ ही अधीक्षिका रोज शाम को सिर्फ 1 घंटे के लिए ही आती है और छात्राओं को रसोइए के भरोसे छोड़ कर चली जाती है। यहां पर उल्लेखित है कि पूर्व में मरवाही के ग्राम करहनी स्थित प्रीमैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में अधीक्षिका द्वारा देर रात तक डी जे पार्टी आयोजित की गई थी  । जिसमें पुरुष अधीक्षक भी सम्मिलित थे। प्रशासन द्वारा सरपंच की शिकायत पर करहनी में छात्रावास में देर रात छापा मारकर आपत्तिजनक सामग्री डीजे सहित जबकि गई थी, बाद में आदिवासी विकास विभाग द्वारा मामले में लीपापोती कर दी गई। इस तरह मेरे क्षेत्र में स्थित आदिवासी छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों के संचालन में अनियमितता एवं लापरवाही बरती जा रही है जिसका खामियाजा गरीब आदिवासी छात्र छात्राओं को भोगना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि छात्रावासों के संचालन में लापरवाही के कारण ही कांकेर जिले के झालियामारी आदिवासी आश्रम में अबोध बच्चों के शोषण की घटना घटित हुई थी जिसे भूलना ठीक नहीं होगा। इस संबंध में आग्रह है कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराते हुए आदिवासी छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों में सुव्यवस्थित संचालन एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ।

 

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