एसईसीएल स्टाल में भीड़…ओपन माइन्स की तकनिकी बना आकर्षण का केन्द्र…बूढे और बच्चे मॉडल देख हुए रोमांचित

बिलासपुर— राष्ट्रीय उद्योग व्यापार मेला में छोटे ही नहीं बल्कि तकनिकी और औद्योगिक वाले स्टालों को जमकर पसंद किया जा रहा है। हमेशा की तरह लोग इस साल भी एसईसीएल के स्टाल तक पहुंचकर कोयला उत्पादन की जानकारियों से रूबरू हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ के बैनर तले आयोजित पाॅंच दिवसीय राष्ट्रीय उद्योग एवं व्यापार मेला के स्टाल क्र्रमांक आर 104 से 107 में एसईसीएल के स्टाल को जनसमुदाय जमकर ना केवल पसंद कर रहा  हैं..बल्कि खदान की गतिविधियों और तकनीकि ज्ञान से भी परिचित हो रहा है।

         एसईसीएल मुख्य महाप्रबंधक जनसंपर्क ने बताया कि राष्ट्रीय व्यापार मेला में 104 से 107 का एसईसीएल का स्टाल लगाया गया है। स्टाल में एसईसीएल भटगांव क्षेत्र की खुली खदान के माडल को देखकर लोग रोमांचित हो रहे हैं। लोगों में ललक देखने को मिल रही है कि किस तरह  खदान में कार्य किए जाते हैं।  इतना ही नहीं स्टाल पहुंचने वाले लोग कामगारों की कार्यशैली और तकनीक की पेचीदिगियों का समझने का प्रयास किया है।

                       स्टाल में भटगांव खुली खदान माडल के माध्यम से लोगों को बताने का प्रयास किया गया है कि ओपनकास्ट माईन में किस तरह से कोयले का उत्पादन किया जाता है। स्टाल में शावेल, डीजल बैकहो, इलेक्ट्रिकल बैकहो, ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, सड़क से परिवहन, कोलडस्ट सप्रेशन का चलित माडल पेश किया गया है। जनसंपर्क महाप्रबंधक ने बताया कि मा़डल के माध्यम से बताने का प्रयास किया है कि नई तकनीक के समावेश से एसईसीएल ने उत्पादन और प्रबंधन को कितनी विशिष्टता हासिल है।

                     स्टाल में एसईसीएल का कोयला उत्पादन में कीर्तिमान, छत्तीसगढ़ के विकास में एसईसीएल का प्रयास, स्वच्छ भारत, खेलकूद गतिविधयों, छत्तीसगढ़ी लोककला, संस्कृति को प्रोत्साहन, शैक्षणिक गतिविधियों को प्रोत्साहन, सिलाई, आटो मोबाईल, ब्यूटी पार्लर, हेण्डीक्राफ्ट, इलेक्ट्रानिक ट्रेनिंग, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत वाटर ट्रिटमेन्ट प्लान्ट, तालाब गहरीकरण, उद्यान, सड़क निर्माण, सामुदायिक भवन निर्माण, हेण्डपम्प खनन के बारे में विस्तार से बताया गया है।

  स्टाल में मौजूद एसईसीएल के कर्मचारी इस दौरान लोगों को एसईसीएल की समस्त गतिविधियों की विस्तार से जानकारी देकर रोमांचित कर रहे हैं। और सोचने समझने को मजबूर भी कर रहे हैं।

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