तखतपुर में निकली खुशियों की बारात, दूल्हा -दुल्हन दोनों थे साथ , एक परिवार ने शुरू की अनूठी परंपरा

तखतपुर(टेकचंद कारड़ा)।नगर में एक अनोखी परंपरा की शुरूआत गागवानी परिवार ने की जहां शादी के फेरे होने के बाद नगर में दुल्हा दुल्हन दोनों की बारात निकाली गई और इस बारात का नाम खुशियों की बारात दिया गया।सिंधी समाज में यह परंपरा रही है कि वर पक्ष के लोग अपने यहां कन्या पक्ष को आमंत्रित करता है और पूरे सम्मान के साथ उनका आवभगत कर वैवाहिक कार्यक्रम पूर्ण किए जाते है समाज की मान्यता है कि कन्या पक्ष अपने पुत्री को जब विवाह के लिए लेकर पहुंचते है तो उन्हें कुछ आत्मिक संबल मिल सके और बेटी को बिदा करने की पीड़ा कुछ कम हो सके इसलिए यह आयोजन किया जाता है।   सीजीवालडॉटकॉम के whatsapp ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक करे

और ऐसे ही आयोजन नगर के गागावानी परिवार में हुआ जहंा पर चकरभाठा के हिरवानी परिवार ने अपनी बेटी काजल का रिश्ता नगर के दौलतराम गागवानी के बेटे उमेश के साथ तय किया था इनकी शादी आज नगर में पूरे विधि विधान और सामाजिक रस्मों के साथ पूर्ण हुआ।

वैवाहिक रस्मों के पूर्व बारात भी निकाली गई और आयोजन स्थल सांस्कृतिक भवन दुल्हन के परिवार रूके हुए थे वहां गए और फेरे के साथ वैवाहिक रस्में पूरी हुई इसके बाद सामाजिक रस्मों के हिसाब से बेटी की विदाई कर दी गई परंतु गागवानी परिवार ने यहीं पर इस मांगलिग कार्यक्रम को पूर्ण नही माना बल्कि इसमें एक कदम और बढ़ाते हुए अनुठा आयोजन किया जिसमें दुल्हा और दुल्हन दोनों को एक साथ गुरूद्वारा ले जाया गया।

जहंा से दोनों की बारात धूमधाम और बाजे गाजे के साथ निकाली गई जो प्रमुख मार्गो से होते हुए कार्यक्रम स्थल मोहन वाटिका पहुंची जहां वर वधु को आमंत्रित लोगों ने आशीर्वाद दिया।

खुशियों की बारात- दुल्हा के बड़े भाई मुरली गागवानी ने पहले ही घर में यह सुझाव दिया था कि वैवाहिक रस्में पूर्ण होने के बाद दुल्हा दुल्हन की बारात नगर में बाजे गाजे के साथ निकाली जाएगी और इस आयोजन एक मात्र उद्देश्य यह है कि दुल्हन को यह एहसास दिलाना है कि अब वह एक नयी जगह पर आ गई जहंा पर उसे इतना सम्मान दिया जा रहा है।

और इस सम्मान के साक्षी पूरे नगर वाले भी है वहीं इस खुशियों के पल को सभी के साथ साझा करना भी है। साथ ही दुल्हन पक्ष को इस बात को आश्वस्त करना है कि उनकी बेटी का परिवार में बेटी का दर्जा दिया जा रहा है। वहीं इस अनोखी परंपरा की शुरूआत पर समाज के साथ साथ नगर में भी खुशियों की बारात को लेकर काफी चर्चा रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *