जब अटल ने कहा…दृष्टि और दृष्टिकोण की कमी..रूका बिलासपुर का विकास…स्थानीय बच्चों के साथ हुआ अन्याय

बिलासपुर—प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अटल श्रीवास्तव ने बताया कि भाजपा सरकार और नेताओं में दृष्टि के साथ दृष्टिकोण की भारी कमी है। यदि ऐसा नहीं होता तो आज प्रदेश के दूसरे बड़े शहर का स्वरूप ही अलग होता। तुष्टीकरण की राजनीति ने बिलासपुर का बहुत नुकसान पहुंचाया है। हम ना आगे बढ़ पाए और ना ही अपने मूल स्वरूप को कायम रख सके। पिछले पन्द्रह सालों में बिलासपुर ने खोया ज्यादा…पाया कुछ नहीं। जो कुछ भी हासिल हुआ…जनता के दम पर। निश्चित रूप से दुखद है। अन्यथा आज सिरगिट्टी प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र होता। एसईसीेएल होकर भी हमारे लिए कुछ नहीं है। एनटीपीसी का तो जैसे बिलासपुर से कोई नाता ही नहीं है। यदि नाता तो आज हमारे शहर की सीरत ही कुछ अलग होती।

                                बजट पेश होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अटल ने कहा कि नई सरकार का बिलासपुर के प्रति दृष्टि और दृष्टिकोण स्पष्ट है। राज्य बनने के बाद बिलासपुर में विकास की अपार संभानाएं थी। लेकिन हुआ ऐसा कुछ नहीं…। हमारे जिले में एनटीपीसी,रेलवे और एसईसीेल जैसे केन्द्रीय संस्थान हैं। इन संस्थानों को संघर्ष के बाद बिलासपुर ने हासिल किया है। लेकिन परिणाम कुछ हासिल नहीं हुआ। शहर के विकास में इन संस्थानों ने बेशक कार्य किया हो..लेकिन जैसा कार्य होना चाहिए था वैसा हुआ नहीं। इसकी मुख्य वजह राजनैतिक कसावट में ढीलापन है।

                                      यदि मजबूत नेतृत्व होता तो आज पन्द्रह साल में बिलासपुर की गिनती राष्ट्रीय स्तर जैसे शहरों में होती। जिला का नाम देश के कोने कोने में होता। स्थानीय बेरोजगारों को दर-दर भटकने की नौबत नहीं आती। मिट्टी, पानी, कोयला सब कुछ हमारा। लेकिन विकास अन्य शहरों का हो रहा है। बिलासपुर आज भी अनगढ़ भविष्य की तरफ जा रहा है। विकास के नाम पर पिछले पन्द्रह सालों में बिलासपुर को केवल छल गया है। शहर का विकास हुआ हो या नहीं…लेकिन दलालों ने चांदी जरूर काटी है। जहां विकास की इबारत लिखी गयी..वहां भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है। जबकि प्रदेश या प्रदेश के बाहर अन्य शहरों के साथ ऐसा नहीं है। केन्द्रीय संस्थानों के आने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। शहर या स्थान का सुनियोजित तरीके से विकास हुआ है। अटल ने कहा कि बिलासपुर स्वस्फूर्त शिक्षा का केन्द्र है। यहां से निकलने वाले बच्चे दूसरे राज्यों में धक्का खाने को मजबूर हैं। यदि उन्हें ध्यान दिया जाता तो आज बेरोजगारी की परेशानियों से काफी कुछ हद तक निपटा जा सकता था।

                     रेलवे जोन के लिए बिलासपुर ने संघर्ष किया। लेकिन नौकरी का आनन्द अन्य स्टेट के लोगों को लिया। जोन के लिए संघर्ष की एक वजह यह भी थी कि स्थानीय लोगों को नौकरियों में प्राथमिकता मिलेगी। लेकिन पिछले पन्द्रह सालों का रिकार्ड उठाकर देखा जाए तो भर्तियों तो हुई..लेकिन बिलासपुर जिले का एक भी शिक्षित बेरोजगार भाई को फायदा नहीं हुआ। फिर तकलीफ होती है कि क्या हमने इसी लिए लाठियोंं और पेशियों का सामना किया।

                                         कमोबेश एनटीपीसी की भी यही हालत है। आज तक अधिगृहित जमीन मालिकों और उनके परिजनों को शर्तों के अनुसार रोजगार के साथ मुआवाजा नहीं दिया गया। सोचकर दुख होता है कि जिन्हें रोजगार मिला भी तो स्वीपर और भृत्य या फिर सेक्यूरिटी गार्ड का। जबकि इनमें कई ऐसे भी चेहरे हैं जिनके पास बाबू,टाइमकीपर या इंंजीनियर बनने की योग्यता है। लेकिन ज्यादातर विस्थापित लोग आज भी मुआवजा और नौकरी के लिए चक्कर काट रहे हैं। कई लोगों की हालत तो इतनी दयनीय है कि जिन्हें देखकर बहुत दुख होता है। इन तमाम हालतों के लिए सीधे तौर पर भाजपा सरकार जिम्मेदार थी । पिछले पांच सालों में एनटीपीसी प्रभावितों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई बैठकें हुई। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात साबित हुए। जरूरी है कि केन्द्र में कांंग्रेस सरकार बने। स्थानीय सरकार इन विस्थापितों को न्याय दिला सके।

                                          अटल ने बताया कि सिरगिट्टी औद्योगिक विकास के समय कयास लगाया जा रहा था कि उद्योग का विकास होगा। लेकिन वाह रे बिलासपुर नेताओं की राजनीति…। विकास तो हुआ नहीं..उल्टे लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया। स्थानीय लोगों को रोजगार देना तो दूर…ठीक से ध्यान नहीं दिया कि आखिर सरकारी जमीन का इस्तेमाल किस मद में किया जा रहा है। मालूम हो कि उद्योग विकास का सीधा असर स्थानीय लोगों के रोजगार से जुड़ा है। लेकिन यहां के पढ़े लिखे टेक्निकल बच्चे रोजगार के लिए सिलतरा, उरला, जांजगीर,तिल्दा,भाटापारा की तरफ रूख कर रहे हैं। इतना ही नहीं प्रदेश के बाहर सभी बेरोजगार भाई चप्पल घिस रहे हैं। अपमानित हो रहे हैं। यदि पिछली सरकार ने प्रयास किया होता तो आज सिरगिट्टी का भी नाम उरला या तिल्दा की श्रेणी में गिना जाता। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो इसकी वजह पिछली भाजपा सरकार की नाकामियों को जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि बिलासपुर में औद्योगिक विकास तो किया जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी। रोजगार पर पहला हक स्थानीय लोगों को होगा। अटल ने साथ में यह भी कहा कि वक्त है बदलाव का…छत्तीसगढ़ में हुए बदलाव से जनता में उम्मीद की किरण जगी है। जल्द ही यह बदलाव केन्द्र में भी नजर आएगी। इसके बाद ही केन्द्रीय संस्थानों की तरफ से स्थानीय लोगों को प्राथमिकता से ध्यान दिया जाएगा।

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