कलेक्टर परिसर में अधिवक्ताओं की नारेबाजी…प्रशासन को दिया प्रधानमंत्री के नाम खत…कहां पूरी करो 10 सूत्रीय मांग

बिलासपुर— जिला अधिवक्ता संघ के वकीलों ने आज छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद के निर्देश पर आज कलेक्टर कार्यालय में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर कार्यालय पहुंचे अधिवक्ताओं के सामने पुलिस प्रशासन की भी नहीं चली। परिसर के बाद कलेक्टर क्षेत्र के मुख्य दरवाजे को खोलकर सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता जिलाधीश के चैम्बर के सामने पहुंच गए। इस दौरान वकीलों ने केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबजी। दस सूत्रीय मांग पुरी नहीं होेने पर अांदोलन की चेतावनी भी दी है।

                     आज जिला अधिवक्ता संघ के बैनर तले अधिवक्ताओं ने कलेक्टर परिसर में जमकर नारेबाजी की। प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखकर दस सूत्रीय मांग करने का दबाव बनाया। अधिवक्ताओं की उग्र भीड़ नेहरू चौक में प्रदर्शन के बाद पुलिस व्यवस्था के विरोध के बाद भी सीधे कलेक्टर चैम्बर के सामने पहुंच गए। करीब बीस से पच्चीस मिनट तक हाय हाय जिन्दाबाद मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। इस दौरान प्रदेश सरकार को भी नहीं छोड़ा। जिला प्रशासन अधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम दस सूत्रीय मांग पत्र भी दिया।

      जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुरेश सिंह गौतम ने बताया कि वकील पेशा जोखिम से भरा होता है। हमारी मांग है कि केन्द्र सरकार वकील और उसके परिवार का 20 लाख बीमा कवरेज दे। वकीलों के लिए भारत और जरूरत पड़े तो विदेशों में सर्वश्रेष्ठ और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा प्रदान करे। प्रारंभ में विधि व्यवसाय से जुड़े अधिवक्ताओं को 5 साल तक दस हजार रूपए प्रतिमाह वजीफा प्रदान करे। निर्धन और बृद्ध अधिवक्ताओं के असामयिक मौत पर परिवार को पचास हजार रूपए प्रतिमाह की दर से पेंशन दिया जाए। इसके अलावा संसद में अधिवक्ताओं के संरक्षण के लिए अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लाया जाए।

                                अपने मांग पत्र में अधिवक्ताओं ने बताया कि देश के सभी अधिवक्ता संघों को भवन,निवास स्थान,बैठक व्यवस्था के साथ लायब्रेरी की सुविधा दी जाए। महिला अधिवक्ताओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था की जाए। व्याज मुफ्त होमलोन, लाईब्रेरी लोन,वाहन लोन की व्यवस्था हो। सस्ते मूल्य पर अधिवक्ताओं के लिए गृह निर्माण की व्यवस्था की जाए।

               विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन किया जाए। सेवा निवृत न्यायाधीश,न्यायिक अधिकारियों को अभिकरण आयोग,फोरम, प्राधिकरण में नियुक्ति को संशोधित कर सक्षम अधिवक्ताओं को भी स्थान दिया जाए। यदि किसी कारण दुर्घटना,हत्या किसी बीमारी के दौरान 65 साल से कम आयु में अधिवक्ता की मौत हो जाती है तो उसके परिवार और आश्रितों को 50 लाख का अनुदान दिया जाए।

                      अधिवक्ताओं ने कलेक्टर की अनुपस्थित में जिला प्रशासन के अधिकारी को मांग पत्र दिया। इसके बाद सभी अधिवक्ता एक जुट होकर पुलिस कप्तान कार्यालय का भी घेराव किया। मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

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