अजीत जोगी ने विधानसभा मे उठाया मामला,प्रदेश के सरकारी अस्पतालो मे डायलिसिस मशीन चलाने नेफ्रोलॉजिस्ट और टेक्नोलॉजिस्ट नही

रायपुर-पूर्व मुख्यमंत्री एवं मरवाही के विधायक अजीत जोगी के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने विधानसभा में स्वीकार किया कि प्रदेश के अस्पतालों में डायलिसिस मशीनों को चलाने के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट और टेक्नोलॉजिस्ट एवं स्पेशलिस्ट डॉक्टर की कमी है। उपरोक्त सवाल पर पूरक प्रश्न करते हुए भाजपा विधायकों ने भी स्वास्थ्य मंत्री को घेरा और स्वास्थ्य मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर उन्होंने सदन से बहिर्गमन कर दिया।मरवाही विधायक अजीत जोगी ने मंगलवार को विधानसभा में अपने सवालों से स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को घेरा। अजीत जोगी ने पूछा था कि प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में डायलिसिस की कितनी मशीनें उपलब्ध है तथा अस्पतालों में डायलिसिस मशीनों की कमी को पूरा करने के लिए शासन की क्या योजना है ? जिसका जवाब देते हुए टीएस सिंहदेव ने बताया कि शासकीय अस्पतालों में कुल 89 डायलिसिस मशीन उपलब्ध है तथा 11 अस्पतालों में 32 डायलिसिस मशीनें स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से बात चल रही है एवं केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है।cgwall.com के whatsapp ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक करे

इस पर पूरक प्रश्न करते हुए जोगी ने पूछा कि इन मशीनों को चलाने के लिए क्या पर्याप्त संख्या में नेफ्रोलॉजिस्ट एवं टेक्नोलॉजिस्ट उपलब्ध है जिसका जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उन्हें यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि प्रदेश में डायलिसिस मशीन को चलाने के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट एवं टेक्नोलॉजिस्ट की कमी है। अजीत जोगी ने यह भी पूछा कि विधानसभा में 2017 में सर्वसम्मति से संकल्प पारित हुआ था कि महंगा इलाज होने के कारण सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस सस्ते में कराया जाएगा तो उस संकल्प का क्या हुआ तथा यह प्रस्ताव भी पारित हुआ था कि पीपीपी मॉडल से डायलिसिस की मशीनें बढ़ाई जाएंगी तो पीपीपी मॉडल का क्या हुआ एवं सूपेबेड़ा में किडनी रोग से लगातार हो रही मौतों का मामला भी जोगी ने उठाया ?

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जोगी ने कहा कि किडनी रोग से पीड़ित मरीज यदि जिंदा रहना चाहता है तो उसे अपने जीवन काल में डायलिसिस के लिए अनुमानित 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं इसलिए स्वास्थ्य मंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस किस अस्पताल में ऐसे रोग से पीड़ित मरीजों को रियायत दी जा रही है तथा यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पीपीपी मॉडल के संबंध में इस सरकार ने की क्या योजना है ?

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जोगी के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि उनके पास तकनीकी लोग और स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं इसलिए वे आउटसोर्सिंग और यूनिवर्सल हेल्थ केयर के माध्यम से इस समस्या से लोगों को निदान दिलाएंगे।जोगी के सवाल के बाद भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, शिवरतन शर्मा एवं प्रतिपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक ने भी इसी मामले पर पूरक प्रश्न पूछा जिस पर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के जवाब से असंतुष्ट होकर सभी भाजपा विधायकों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।

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