बेटियों ने लिखी…..सफलता की विजय गाथा

IMG_20150917_122148बिलासपुर— वह बहुत प्रतिभावान है…। उसमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा है…। वह देश के लिए खेलना चाहती है..। उसके पास अभिव्यक्ति के लिए जुबान भी नहीं है….। वह सुन भी नही सकती…। लेकिन उसकी सनसनाती गेंद के सामने अच्छे- अच्छे क्रिकेट के सुरमा पनाह मांगते हैं..। बिलासपुर पहचानता हो या ना पहचानता हो…लेकिन श्रद्धा वैष्णव के सामने आज पूरा हिन्दुस्तान नतमस्तक है। मजदूर पिता की लाड़ली दुर्गेश नंदनी भी किसी से कम नहीं है। गुदड़ी की लाड़ली ने अपनी तेज तर्रार गेंदबाजी के दम पर मुंगेली जिले के छोटे से आंगन से निकलकर प्रदेश की अन्डर 19 क्रिकेट में जगह बनाया है।

                   जाहिर सी बात है आसमान पर चमकने वाले इन तारों को माता-पिता और समाज से सहयोग तो मिला ही होगा। लेकिन जिला क्रिकेट संघ अध्यक्ष विजय केशरवानी के योगदान को कहीं कमतर नहीं आंका जा सकता है। उन्हीं की अगुवाई में जिला क्रिकेट संघ ने अनवरत पिछले पांच सालों से संभाग में क्रिकेट प्रतिभाओं को निखारने और तलाशने का भगीरथ प्रयास किया। मूक बधिर श्रद्धा वैष्णव और दुर्गेश नंदनी इसी भगीरथ प्रयास की उपज हैं। इस प्रयास को प्रदेश क्रिकेट संघ अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया ने अन्डर 19 छत्तीसगढ़ टीम में चुनकर अपनी क्रिकेट विशेषज्ञता का परिचय दिया है।

IMG_20150917_125820                    अंध मूक बधिर शाला तिफरा में कक्षा 9 वीं में पढ़ने वाली श्रद्धा वैष्णव बोल नहीं सकती..सुन भी नहीं सकती है। लेकिन उसका आत्मविश्वास सिर चढ़कर बोलता है। रायपुर में आयोजित टूर्नामेंट में उसके आत्मविश्वास ने चयनकर्ताओं को प्रदेश की अन्डर 19 टीम में स्थान देने को मजबूर कर दिया। इस सफलता को जाहिर करने के लिए श्रद्धा के पास भावनाएं तो हैं लेकिन शब्द नहीं हैं। एक दिन पहले अन्डर 19 में चुने जाने की खबर उसके पिता ने जब इशारों ही इशारों में अपनी बेटी को दिया। तो वह उछल पड़ी…खुशी के आंसू निकल आए…।

                         उस्लापुर निवासी श्रद्धा के पिता गतौरी में पटवारी हैं। वह अपने 9 साल के बेटे ओम को लेकर क्रिकेट अभ्यास कराने सेकरसा मैदान जाया करते थे। साथ में बेटी भी हुआ करती थी। उसी दौरान श्रद्धा ने इशारे ही इशारे में अपने पिता से क्रिकेट खेलने की इच्छा जाहिर की। पिता ने क्रिकेट कोच दीलिप सिंह से मिलवाया। दिलीप ने बताया कि तीन साल पहले श्रद्दा अपने पिता के साथ मेरे पास आयी और क्रिकेट खेलने की बात कही। काफी मुश्किल था उसे क्रिकेट की बारीकियों को समझाना। लेकिन रमेश वैष्णव के सहारे उसे क्रिकेट की बारीकियां सिखाया।

IMG_20150917_115632           दिलीप ने सीजी वाल को बताया कि श्रद्धा में प्रतिभा के नाम पर केवल आत्मविश्वास और गेंदवाजी में उसकी तेजी थी। धीरे-धीरे श्रद्धा ने अपने आपको बालिंग के लिए तैय़ार किया। श्रद्धा मीडिय पेसर है। रायपुर में इसके खेल को बहुत पसंद किया गया। प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया ने भी इसकी तारीफ की।

                                                     दिलिप ने बताया कि श्रद्धा ने इसके पहले प्रदेश की तरफ से खेलते हुए तमिलनाडू में एक रिकार्ड भी बनाया है। उसने तमिलनाडू के खिलाफ खेलते हुए तीन ओवर में दो रन देकर पांच विकेट हासिल किया है। उसकी गेंदवाजी में विविधता है..। करामात है…। उसका चुनाव प्रदेश की अन्डर 19 में होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। अब श्रद्धा और दुर्गेश 20 सितम्बर को देहरादून में आयोजित प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगी। दिलीप ने बताया कि मैदान में श्रध्दा इशारों के आधार पर खेलती है। हमने उसे कोचिंग के दौरान कप्तान,अम्पायर और विकेट कीपर पर हमेशा नजर रखने को कहा है ताकि पता चले कि टीम उससे चाहती क्या है।

             पिता रमेश वैष्णव का कहना है कि श्रद्धा बचपन से ही मूक बधिर है। बहुत उपचार कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उस पर मुझे नाज है। सीजी वाल को इशारे ही इशारे में श्रद्धा वैष्णव ने बताया कि वह राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना चाहती है। वह ऐसा कर दिखाएगी। उस दौरान श्रद्धा ने विजय केशरवानी की ओर देखते हुए ईशारों में अपनी भावनाओं का इजहार किया कि यदि जिला क्रिकेट संघ ने प्रयास नहीं किया होता तो हम अन्डर 19 क्या रायपुर तक नहीं पहुंचते।

IMG_20150917_121446              मुंगेली के एक छोटे से गांव में कक्षा 10 वीं की छात्रा दुर्गेश नंदनी का पिता मजदूरी कर घर का गुजर बसर करते हैं। दुर्गेश राष्ट्रीय स्तर की हाई जम्प खिलाड़ी है। उसने सीजी वाल को बताया कि क्रिकेट की तरफ मुझे मेरे स्कूल के सिनियरों ने लाया। इसके बाद जिला क्रिकेट संघ अध्यक्ष विजय केशरवानी को धन्यवाद कहूंगी जिसने मुझे क्रिकेट की मुख्यधारा में लाकर खड़ा किया। घर में दाल चावल खरीदना मुश्किल होता है लेकिन जिला क्रिकेट संघ के सहयोग से मै क्रिकेट खेलती रही। मैं लड़कों के टीम के साथ और खिलाफ भी खेली। जिसका फायदा मुझे अब जाकर मिला है।

                     दुर्गेश ने बताया कि जिला क्रिकेट संघ की अगुवाई में जहां भी क्रिकेट हुआ मै जरूर देखने जाती थी। उसने बताया कि यहां तक पहुंचने में मेरे कोच दिलीप लहरे और विजय केशरवानी ने बहुत सहायता की। मुझे अन्डर 19 में मीडियम पेसर के रूप में चुना गया है। एक दिन राष्ट्रीय टीम की सदस्य भी बनूंगी।

IMG_20150917_122254                 जिला क्रिकेट संघ अध्यक्ष विजय केशरवानी ने बताया कि संभाग में क्रिकेट प्रतिभावों की कमी नहीं है। हमारा हमेशा से प्रयास रहा है कि ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी सामने आएं। जिला क्रिकेट संघ की अगुवाई में लगातार क्रिकेट प्रतियोगिता के आयोजन का मुख्य उद्देश्य भी यही है। उन्होंने कहा कि हमारा काम केवल मंच देना है प्रतिभा दिखाने का काम उनका है।

                                                                 विजय ने बताया श्रद्धा और दुर्गेश दोनों ही प्रतिभावान हैं। इस प्रतिभाओं को हमने केवल मंच देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश क्रिकेट संघ अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया ने बीड़ा उठाया है कि क्रिकेट प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए हम वह हर संभव प्रयास करेंगे जो किया जा सकता है। उन्होने ने ही मूक बधिर क्रिकेट खिलाड़ी श्रद्धा वैष्णव और मजदूर पिता की लड़की की प्रतिभा पर मुहर लगाया है। जो यह साबित करता है कि प्रतिभा और हौंसलों का सभी लोग सम्मान करते हैं।

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