जब सीएम ने कहा..लड़ोगे तो जिला नहीं बनाउंगा…सोच विचारकर नाम बताओ…मेरे रहते बन जाएगा..मत दुहराओ गलती

बिलासपुर—भूपेश बघेल का मरवाही दौरा निश्चित रूप से इस बार मरवाही पेन्ड्रा और गौरेला वासियों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जाएगा। मंच से जिला पेन्ड्रा को जिला बनाने के एलान के साथ ही कार्यकर्ताओं में खुशियां और नाराजगी एक साथ नजर आयी। ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। जब भूपेश ने कहा कि पेन्ड्रा को मेरे कार्यकाल में जिला बना दिया जाएगा। इतना सुनते ही जिनके मुंंह खुले थे..खुले रह गए। जिनकी आंखे खुली थीं..फटी रह गयी। लोगों को अपने कान पर विश्वास नहीं हुआ कि आखिर हम देख और सुन क्या रहे हैं। लोगों ने अंदाजा लगाने के लिए एक दूसरे को चिकोटी काटा। जब सब कुछ सही पाया तो….उत्साह और उमंग इतना कि मंच पर ही नेता आपस में उलझ गए। उलझने की मुख्य वजह जिले का नाम पेन्ड्रा नहीं..बल्कि मरवाही रखा जाए। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि जिला का नाम पेन्ड्रा ही ठीक है। इस दौरान सीएम भी मुस्कुराते रहे। और उन्हें कहना पड़ा कि मैने एलान कर दिया है। चाहता हूं कि जिला बने। चाहो तो नाम कुछ दिन बाद सोच समझ और विचार के बाद बताना। यदि ऐसे ही लड़ोंगे जिला बनाने का ना केवल एलान वापस ले लूंगा। फिर आप लोगों के हाथ में पश्चाताप के बाद कुछ हासिल नहीं होगा।

                       सीएम का मरवाही दौरा क्षेत्र के कांग्रेस समेत आम जनता के लिए किसी बड़ी सौगात से कम साबित नहीं हुआ। सीएम ने चुनावी दौरा के दौरान जो वादा किया था। वादे को याद कर जब सीएम ने आज पेन्ड्रा को जिला बनाने का एलान किया तो किसी को अपने कान पर विश्वास नहीं हुआ। कांग्रेस नेता और आम जनता को फिर से अनुरोध करना पड़ा कि आखिर बोल्ड निर्णय लेेने वाले सीएम भूपेश ने कह क्या दिया ।

लोगों ने कहा..वाह क्या कह दिया

लोगों की स्थिति को देखते हुए सीएम को ना केवल दूसरी बार बल्कि तीसरी बार भी  कहना पड़ा कि पेन्ड्रा वासियों को अब लम्बी यात्रा कर काम काज के लिए बिलासपुर दौड़ने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि पेन्ड्रा को जिला बनााया जाएगा। इतना सुनते ही मंच से लेकर सामने बैठे हजारों दर्शकों ने तालियों से स्वागत किया। कुछ अतिउत्साहित लोगों ने तो यह भी बताया कि तालियों  की गूूंज बिलासपुर से रायपुर तक पहुंची। जिन्होने पेन्ड्रा को जिला नहीं बनने दिया। भूपेश ने पेन्ड्रा को जिला बनाने का एलान कर सभी का मुंह बंद कर दिया। 

नामकरण को लेकर मंच पर हुआ विवाद

                 जब भूपेश एलान कर रहे थे। उसी समय मंच से जिला नामकरण को लेकर जमकर वाद विवाद शुरू हो गया। नामकरण को लेकर नेताओं में वाद विवाद इतना बढ़ा कि खुद मुख्यमंत्री को मुस्कुराने के साथ नाराजगी का भी प्रदर्शन करना पड़ा। उन्होने कहा यदि लड़ोंगे तो अपना फैसला वापस ले लूंगा। नाम पेन्डार रखना है या मरवाही…सभी लोग सोचविचार कर फैसला कर लेना। अभी झगड़ने की जरूरत नहीं है। इतना सुनते ही मंच से लेकर दर्शकों को जैसे सांप सूंघ गया हो। सीएम ने कहा हमने जिला बनाने का एलान कर दिया है। जिला का काम काज मेरे कार्यकाल में शुरू हो जाएगा। जिले का क्या नाम होगा। सर्वसम्मित के साथ मेरे सामने प्रस्ताव रखा जाए। किसी को विवाद करने की जरूरत नहीं है।

पहले भी कालेज को लेकर हुआ था विवाद

                   बताते चलें कि जिला बनाने का एलान होना और मंच पर नेताओं के बीच नामकरण को लेकर विवाद होना..पेन्ड्रा और गौरेला के लिए निश्चित रूप से कुछ नया नहीं है। अपने समय में अविभाज्य मध्यप्रदेश के कद्दावर मंत्री भंवर सिंह पोर्ते को भी कालेज खोलने के एलान के बाद नाराजगी का सामना करना पड़ा था। भंवर सिंह पोर्ते का जन्म स्थल मरवाही बताया जाता है। लेकिन उन्होने कुछ ऐसा एलान कर दिया कि मरवाही और पेन्ड्रा के बीच महीनों तनाव का वातावरण देखने को मिला। मामला यहां तक पहुंंच गया कि गौरेला के लोग पेन्ड्रा वालों से और पेन्ड्रा के लोग गौरेला वालों को दुश्मन समझने लगे। दरअसल भंवर सिंह ने कालेज खोलने का एलान पेन्ड्रा के लिए किया था। जिसके चलते उन्हें तात्कालीन समय भारी विरोध का सामना करना पड़ा। मजेदार बात है कि विरोध के चलते भंवर सिंह पोर्ते महीनों महीना पेन्ड्रा नहीं आए। बाद में धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो गया।

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