पर्यावरण मण्डल से निगम को ग्रीन सिग्नल…कमिश्नर ने पत्रकारों को बताया…स्वयं के खर्च पर कम्पनी ने बनाया प्लान्ट

बिलासपुर— पर्यावरण संरक्षण मंडल से अनुमति मिलने के बाद अब एक दो दिनों के अंदर ही कछार स्थित प्लांट से खाद और आरडीएफ बनाने का काम शुरू होगा। प्लांट के क्षमता अनुसार कार्य करने के लिए आसपास के यूएलबी को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। यह बातें प्रेस कान्फ्रेंस में कमिश्नर प्रभाकर पाण्डेय ने कही। पाण्डेय ने कहा कि जून 2012 में नगर निगम बिलासपुर क्षेत्रांतर्गत कचरे की बढ़ती हुई मात्रा, नुक्कड़ों की संख्या, कचरा उठाने हेतु संसाधनों की कमी एवं डंपिंग स्थल की कमी को दृष्टिगत रखते हुये ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना के लिए डीपीआर विस्तृत सर्वेक्षण के बाद तैयार किया गया।
                  पत्रकारों को प्रभाकर पाण्डेय ने बताया कि इस बीच डीपीआर में कई संशोधन हुए। पुनरीक्षित डी.पी.आर. तैयार कर शासन के हवाले किया गया। डीपीआर और आरएफपी अनुमोदन के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 26 दिसंबर 2015 को निविदा आमंत्रित कर उचस्तरीय समिति के हवाले किया। समिति के परामर्श से 29 अगस्त 2016 को 2115 रुपए प्रति टन की स्वीकृति प्रदान की गई। शासन ने मेसर्स देल्ही एमएसडब्ल्यू सल्यूशन हैदराबाद से 19 जनवरी 2017 को अनुबंध किया। डोर टू डोर कलेक्शन ट्रांसर्पोटेशन का काम 2 अप्रैल 2017 से प्रारंभ हुआ। कम्पनी ने स्वयं की राशि से डोर टू डोर कलेक्शन ट्रांसपोर्टेंशन वाहन और प्लांट निर्माण का काम शुरू की।
पर्यावरण से ग्रीन सिग्नल
                      निगमायुक्त ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 22 जुलाई 2017 को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान किया। प्लांट प्रारंभ करने के लिए पर्यावरण विभाग में आवेदन प्रस्तुत् किया गया। पर्यावरण मंडल ने 6 मार्च को प्लांट से प्रोडक्शन शुरू करने अनुमति दी है।
बनाया जाएगा खाद
             प्रभाकर पाण्डेय ने बताया कि  योजना अंतर्गत कचरा प्लांट में 75 एम.एम., 25 एम.एम., 4 एम.एम. के ट्रा मिल लगाये गये हैं।  ट्रा मिल में मिश्रित कचरों से आर्गेनिक और इन-आर्गेनिक कचरों को अलग किया जाएगा। आर्गेनिक कचरों से नमी को अलग कर खाद बनाया जायेगा। इन-आर्गेनिक कचरों से आर.डी.एफ. तैयार किया जाएगा। आर.डी.एफ. का उपयोग सीमेंट कारखानों को अनिवार्य रुप से इंधन के रुप में होता है।
तीन महीने में डंप कचरा का निपटारा
                                 कमिश्नर ने जानकारी देते हुए कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 और एन.जी.टी. के आदेशों में कचरे का निपटान अनिवार्य किया गया है।  ग्राम कछार में पिछले दो सालों से कचरा डंप किया जा रहा है। वर्तमान में 93850 टन कचरा डंप किया जा चुका है। प्लांट की क्षमता 1000 टन प्रति दिवस प्रोसेसिंग की है। डंप कचरों से 3 माह के अन्दर खाद और आर.डी.एफ. का निर्माण किया जा सकेगा। पुराने डंप के प्रोसेसिंग के बाद प्रति दिन निकलने वाले कचरे की डंपिंग की आवश्यकता नहीं होगी।  चूंकि प्रति दिवस प्राप्त होने वाले कचरे का उसी दिन प्रोसेसिंग कर दिया जाएगा।प्रभाकर ने बताया कि प्लांट का निर्माण 35 करोड़ की लागत से कम्पनी ने किया है। इसमें निगम ने केवल 25 एकड़ जमीन देने का काम किया है।
प्लांट की जानकारी
भूमि क्षेत्रफल—- – 25 एकड़
परियोजना लागत – 36.73 करोड़
निर्माण पूर्ण तिथि – 16 सितम्बर 2018
प्लांट के अंग :-
कम्पोस्ट प्लांट – 10,450 वर्गमीटर (2.60 एकड़), साईटिंफिक लैण्ड फिल – 38598 वर्ग मीटर (9.54 एकड़), ग्रीन बेल्ट एवं वृक्षारोपण क्षेत्र – 36818 वर्ग मीटर (9.1 एकड़), सोलर इवेपोरेशन पौंड – 2100 वर्ग मीटर (0.52 एकड़), प्रशासनिक भवन, केंटीन, – 1800 वर्ग मीटर (0.45 एकड़), रेस्ट रुम और वर्क शॉप
रोड एवं ड्रेन्स – 8300 वर्ग मीटर (2.05 एकड़) पर है।

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