जब पालकों ने दिखाया तेवर..स्कूल प्रबंधन बौखलाया..डीईओं की फटकार से बैकफुट पर प्रबंधन..जीत गए पालक


बिलासपुर– सैकड़ों की संख्या में बच्चों के पालकों ने आज कलेक्टर और जिला शिक्षा विभाग का घेराव किया। कलेक्टर अलंग और डीईओ हीराधर से मुलाकात कर माडर्न स्कूल प्रबंधन की मनमानियों के बारे में बताया। पालकों ने लिखित शिकायत कर कहा कि स्कूल प्रबंधन ने बिना त्रिपक्षाय बैठक कर 41 से 66 प्रतिशत फीस बृद्धि की है। विरोध करने पर धमकी दी जा रही है कि फीस स्ट्रक्चर में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। जबकि प्रबंधन ने मामले की जानकारी भी नहीं दी है। अब बढ़ी फीस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। पालकों ने बताया कि हम अपने बच्चों को ऐसी लूट की सूरत में स्कूल नहीं भेजेंगे। कलेक्टर आदेश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने पालकों से मुलाकात कर मार्डन स्कूल सरंकडा को ना केवल लगाई बल्कि आदेश को तत्काल वापस लेने का फरमान भी जारी किया। अपनी सफलता पर पालकों ने खुशी जाहिर की है।सीजीवालडॉटकॉम के WhatsApp ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक करे 

                       चुनावी सरगर्मियों के बीच आज सरकंडा स्थित मार्डन स्कूल के बच्चों के पालकों ने कलेक्टर कार्यालय और जिला शिक्षा विभाग का घेराव किया। पालकों ने बताया कि 23 मार्च को रिजल्ट घोषणा के साथ स्कूल प्रबंधन ने फीस स्ट्रक्चर थमाया। फीस स्ट्रक्चर देखने के बाद हाथ से तोते उड़ गए।  दरअसल स्ट्रक्चर में स्पष्ट बताया गया कि स्कूल प्रबंधन ने फीस स्ट्रक्चर में बदलाव किया है। यह बदलाव 41 से लेकर 66 प्रतिशत तक है। जबकि फीस स्ट्रक्चर में बदलाव के पहले शासन के निर्देशानुसार प्रबंधन,पालक और शासन के साथ बैठक होना जरूरी होता है। बावजूद इसके प्रबंधन ने मनमानी रवैया दिखाते हुए अपने निर्णय को थोप दिया गया।

                      पालकों ने बताया कि इसका विरोध किया गया। 30 मार्च को महिला प्राचार्य ने प्रबंधन के साथ बैठक कराई। लेकिन किसी को कुछ बोलने नहीं दिया गया। एक तरफा फरमान जारी किया गया कि 11 माह की फीस ली जाएगी। इसमें किसी प्रकार बदलाव नहीं किया जाएगा।

प्रबंंधन का चालाकी भरा निर्णय

                 पालकों ने बताया कि प्रबंधन ने लोगों को बेवकूफ बनाने चालाकी भरा फरमान जारी किया। स्ट्रक्चर में बताया गया कि मात्र 11 महीने की शुल्क बृद्धि हुई है। लेकिन उन्होने इसे कम दिखाने के लिए 12 महीने में बांट दिया। मार्डन स्कूल प्रबंधन के अनुसार यदि बच्चा 8 वीं पास कर 9 वीं में जाता है तो बच्चे को मासिक शुल्क 2750 देना होगा। जबकि आठवी में शुल्क 1650 रूपए था। इसका मतलब है कि प्रबंधन ने 1100 रूपए फीस बढ़ाया है जो कुल बढ़ी हुई फीस का 66 प्रतिशत होता है। इसी तरह यदि बच्चा कक्षा दो से तीन में जाता है तो उसे अब मासिक शुल्क 650 रूपए की जगह 46 प्रतिशत अधिक देना होगा।

पालकों का बहिष्कार फिर घेराव

                      पालकों ने बताया कि हमने स्कूल प्रबंधन के आदेश का वहिष्कार किया है। अब कलेक्टर से गुहार लगाई है। कलेक्टर ने जल्द से जल्द निराकरण का आदेश दिया है।

डीईओ का फरमान..पालकों में खुशी

               पालकों ने डीईओ कार्यालय का भी घेराव किया। कलेक्टर की सूचना पर डीईओ हीराधर को मामले की जानकारी मिली। हीराधर ने जल्द ही पालकों के प्रतिनिधिमण्डल की पीड़ा को समझा। डीईओ ने फीस स्ट्रक्चर को ना केवल गलत बताया। बल्कि स्कूल प्रबंधन को भी फटकारा। फटकार के बाद मार्डन स्कूल प्रबंधन को फरमान को वापिस लेना पड़ा।

पालकों में जश्न..कहा सच की जीत

         डीईओ के फरमान के बाद स्कूल प्रबंधन के बैकफुट होने पर पालकों ने खुशी जाहिर की है। बच्चों के पालक शिवनाथ,सूर्यकांत समेत अन्य लोगों ने कहा कि सच की जीत हुई है। पालकों ने खुशी जाहिर कर जिला प्रशासन के प्रति आभार भी जाहिर किया है।

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