बाबा की रीति नीति से हुआ सकारात्मक बदलाव…झा ने कहा…भारत रत्न ने कराया अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित

बिलासपुर— एसईसीएल में बाबा साहेब डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर की 128 वीं जयंती मनाई गयी। निदेशक (कार्मिक) डाॅ. आर.एस. झा के मुख्य आतिथ्य, विभिन्न विभागाध्यक्षों, विभिन्न श्रमसंघ प्रतिनिधियों, एससी/एसटी एसोसिएशन, सिस्टा के पदाधिकारियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, महिलाओं और बच्चों की उपस्थिति में भारत रत्न के जीवन पर प्रकाश डाला गया। मनाई गई।सीजीवालडॉटकॉम के WhatsApp ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक करे 

                           मुख्य अतिथि निदेशक (कार्मिक) डाॅ. आर.एस. झा ने कहा कि बाबा साहेब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के समाजोन्मुख सोच का परिणाम है कि भारतीय समाज में एक नयी चेतना का विस्तार हुआ।  समाज में सकारात्मक बदलाव आए। झा ने बताया कि बाबा साहेब भारतीय संविधान के रचनाकार हैं।  संविधान से हम सभी अपने अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित हुए। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने समाजोद्धार के लिए जो भी संदेश, विचार, क्रियाकलाप, सिद्धांत हमें दिया उसका उपयोग हमें समाज की उन्नत्ति में करना है।

                     इस अवसर पर श्रम संघ प्रतिनिधि कृष्णा सूर्यवंशी, ओ.पी. नवरंग, अजय सिंह, डी.पी. दिवाकर, एम.ए. हनीफी, राम सिंह ने भी संबोधित किया। भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के जीवन पर प्रकाश डाला। हुए कार्यक्रम के आयोजन पर प्रबंधन को धन्यवाद भी जाहिर किया।

                        इसके पहले मुख्य अतिथि ने गौतम बुद्ध और बाबा साहेब के चित्र के समीप दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। गौतम बुद्ध और बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। भीमराव अम्बेडकर की स्थापित पर माल्यार्पण के बाद विभागाध्यक्षों, श्रमसंघ पदाधिकारियों, एससी/एसटी एसोसिएशन, सिस्टा के पदाधिकारियों, अधिकारियों, कर्मचारियों ने बारी-बारी से बाबा साहेब की प्रतिमा तक पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

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