ग्रीष्मकालीन अवकाश में स्कूल लगाने के आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया,शिक्षक संगठनों में नाराज़गी

रायपुर।पहिली से आठवी कक्षा तक का परिणाम कब निकलेगा कोई भी अधिकारी समय सीमा बताने से बच रहे है। मिल रही जानकारी के अनुसार  30 अप्रैल तक प्रदेश के सभी जिलों में किसी भी हालात में परीक्षा परिणाम घोषित नही हो सकता है। और तो और चढ़ते हुए पारे के बीच प्रदेश में  समर कैम्प के बहाने शिक्षा अधिकारी  शिक्षकों और छात्रों पर प्रयोग करके शाला अनुदान मद से  राशि खर्च करने का मन बना चुके है।सीजीवालडॉटकॉम के Whatsapp ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

24 अक्टूबर को राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा  के प्रबंध संचालक पी दयानंद ने  प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरो को अर्ध शासकीय पत्र लिखा सम्भवतः सभी कलेक्टरो ने जिला शिक्षा अधिकारियों को उचित निर्देश दिए होंगे। पर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों में एक ही पत्र के अलग अलग मायने निकाल लिये है।

जबकि मिल रही जानकारी के अनुसार शिक्षा सचिव की ओर से समर कैंप या ग्रीष्मकालीन अध्यन को लेकर कोई निर्देश नही दिए गए है।

2018- 2019 का शैक्षणिक सत्र पूर्व निर्धारित आदेश दिनांक 03/05/2018 ,के अनुसार ही चल रहा है।  जिसमे लिखा है कि 1 मई से 15 जून 2019 तक ग्रीष्म कालीन अवकाश रहेगा ..प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों में पूर्व में पंचायत विभाग का कब्जा हुआ करता था। शिक्षा कर्मीयो के संविलियन के बाद एक लाख से अधिक शिक्षक स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारी हो गए है।

ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग अपने कर्मचारियों के लिए वार्षिक कैलेंडर में दिये हुए अवकाश को बदल सकता है। परंतु प्रदेश के कई जिलों में अलग अलग आदेशो की बारिश हो रही है। जिससे शिक्षक व शिक्षक संघो में नाराजगी चल रही है।

नवीन शिक्षा कर्मी संघ के प्रांताध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने बताया कि अधिकारियों के  नए फरमानों से शिक्षक संघ सहित पालकों में भी बहुत नाराजगी चल रही है। इस वक़्त अधिकांश शिक्षक उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन कार्य पर संलग्न है ऊपर से समर कैम्प के नाम से कई जिलों में अधिकारी शिक्षकों को जबर्दस्ती भीषण गर्मी में स्कूल संचालित करने का आदेश जारी कर रहे हैं ,गर्मी मे विद्यार्थी वैसे भी स्कूल नही आते  है।

अधिकांश विद्यार्थी अपने माता-पिता के साथ घूमने अन्य स्थानों पर चले जाते है।विकास राजपूत ने बताया कि ऐसा लगता है की इस वर्ष शासन शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का निर्णय ले लिया है।

सबसे बड़ी विडम्बना यह है की बीते गुरुवार को स्कूल शिक्षा सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से सभी जिला शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिया है की गर्मी अवकाश मे 1 मई से 15 जून तक शाला संचालित करने वालो पर जुर्माना लगाया जायेगा जो समाचार पत्रों मे प्रमुखता से प्रकाशित हुआ है,किन्तु जिलों से निकल रहे आदेश से ऐसा प्रतीत होता है की स्कूल शिक्षा सचिव का आदेश भी उनके ही मातहत कर्मचारी नही मान रहे हैं।

शिक्षक नेता आलोक पाण्डेय ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र परीक्षा के बाद  वैसे भी स्कूल कम ही आते है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र 15 जुलाई से शुरू होता है। ऐसे में छात्र नए सत्र में ही पढ़ना पसन्द करते है।

और यह उचित भी है गर्मी की छुट्टियों के बाद बच्चों का मन तरोताजा हो जाता है जिससे नवीन सत्र में बच्चे नई स्फूर्ति के साथ अध्ययन करते हैं। शायद ही किसी छात्र ने या छात्रों के पालकों ने समर कैंप की मांग किया है।यह आदेश तो उन अधिकारियों द्वारा ले लिए जाता है जो स्वयं इस भीषण गर्मी में अपने वातानुकूलित कमरों से बाहर नहीं निकलते।

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