शिक्षको की ड्यूटी तेंदूपत्ता की रखवाली मे लगाना शर्मनाक,प्रबल प्रताप सिंह ने की आदेश वापस लेने की मांग


जशपुर।
शिक्षको की डयूटी तेंदुपत्ता की रखवाली मे लगाना शर्मनाक है।भाजयूमो के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जुदेव ने आदेश वापस लेने की मांग की है।29 अप्रैल को रायगढ़ कलेक्टर ने तेंदुपत्ता के निरीक्षण के लिए शिक्षा विभाग के प्रधान पाठक,सहायक शिक्षक,पंचायत शिक्षको की डयूटी लगाने के लिए आदेश जारी किया था।इसे लेकर सोमवार को प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।उन्होने लिखा कि गुरु का दर्जा हर व्यक्ति की जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण होता है ऐसे में प्रदेश के रायगढ़ जिले के शिक्षकों की ड्यूटी तेंदूपत्ता अभिरक्षण जैसे कार्यों में लगाने की वन विभाग की सोच और फिर जिला कलेक्टर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी से सूची लेकर जारी करने से यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि शासन – प्रशासन प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की स्थिति को लेकर कितनी गंभीर है।सीजीवालडॉटकॉम के Whatsapp ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

प्रदेश के शिक्षक ऐसे भी निर्वाचन से लेकर लिखा पढ़ी के हर कार्य बेहतरीन तरीके से संपन्न कराने के लिए जाने जाते हैं और गांव में तो ग्रामीण अपने अधिकांश लिखा पढ़ी के कार्य के लिए इन्हीं के ऊपर आश्रित होते हैं और शिक्षक इस अतिरिक्त जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाते हैं यही कारण है कि हर क्षेत्र में शिक्षक की अपनी एक अलग पहचान और सम्मान होता है लेकिन सरकार अब इस प्रतिष्ठा को धूमिल करने में आमादा है ।

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कहां तो शिक्षकों से 2 वर्ष की सेवा पूर्ण होते ही संविलियन का वादा किया गया था और कहां उनकी ड्यूटी तेंदूपत्ता अभिरक्षण जैसे कार्यों में लगाई जा रही है जहां विशुद्ध रूप से केवल और केवल मजदूरों की ही जरूरत होती है, ऐसे कार्यों के लिए शिक्षकों को लगाना सरकार की दूषित मानसिकता का परिचायक है, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।

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शिक्षकों का सम्मान बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है और इसके साथ खिलवाड़ पूरी सामाजिक व्यवस्था को ही ध्वस्त करके रख देगी इसलिए हमारी मांग है कि तत्काल प्रभाव से ऐसे आदेश को निरस्त किया जाए और इस प्रकार के तुगलकी फरमान जारी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही किया जाए।

जो सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं जहां पहले से ही इस बात को निर्देशित किया जा चुका है की शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में न लगाया जाए ऐसे में इस प्रकार के निकृष्ट कार्यों में लगाया जाना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी स्पष्ट अवहेलना है ।

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  1. By Naresh yadav

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