जब पटवारियो ने सीएम को लिखा पत्र..कहा…साफ्टवेयर और प्रक्रिया में सुधार की जरूरत…बढ़ गया जालसाजी का खतरा

बिलासपुर— जिला पटवारी संघ के सभी पटवारियो ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी को पत्र दिया है। पटवारियों ने पत्र के माध्यम से बताया है कि भुइयां और दर्शन एप्प के माध्यम से काम करने के दौरान कई प्रकार की तकनीकि परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समय के साथ एप्प के आने से किसानों को फायदा हुआ है। लेकिन परेशानियां कई गुना बढ़ गयी हैं। कुछ ऐसी तकनीकि खामियां हैं जिसे दूर किया जाना जरूरी है। इससे जालसाजी की संभावनाएं तो कम तो होंगी ही साथ में किसानों और राजस्व विभाग को भी काम धाम में आसानी होगी। पटवारियों ने बताया कि तकनिकी प्रगति के साथ पटवारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण की आवश्यकता भी है।

                 राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ के बैनर तले आज बिलासपुर के पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी कीर्तिमान राठौर को ज्ञापन दिया। पटवारियों ने बताया कि समय के साथ राजस्व विभाग में तकनिकी का विस्तार हुआ है। लेकिन खतरे भी बढ़े हैं। उन्हें ठीक किया जाना बहुत जरूरी है। सब कुछ आन लाइन होने के बाद भी किसानों को तहसील का चक्कर काटना पड़ रहा है। शासन को इन्टरनेट स्पीड सुविधा समेत अन्य प्रक्रियाओं की तरफ ध्यान देना होगा। इससे ना केवल किसानों और पटवारियों को काम करने में आसानी होगी। बल्कि किसी भी प्रकार की जालसाजी से भी बचा जा सकता है।

                          पन्द्रह बिन्दु मांग पत्र में पटवारियों ने बताया कि पिछले चाल साल से पटवारियों को आनलाईन रिकार्ड दुरूस्त करने के बाद डिजीटल सिग्नेचर करना होता है। इसके लिए हाईस्पीड़ इन्टरनेट की सुविधा का होना बहुत जरूरी है। इससे समय की बचत होगी। पटवारियों को कम्प्यूटर सुविधा तो दूर तहसीलों में भी पर्याप्त कम्प्यूट का अभाव है।पटवारियों ने बताया कि लोगों ने भुइयां को ठीक से समझा भी नहीं है..। तेजी से हो रहे बदलाव के बीच पटवारियों को भी प्रशिक्षित नहीं किया गया है। जिसके कारण पटवारियों को काम करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

                          साफ्टवेयर को सरल और फ्रेंडली करने की जरूरत है। रिकार्ड दुरूस्त के दौरान पटवारी और किसान दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि रिकार्ड में किसी प्रकार की त्रुटि हो जाए तो किसान को दुबारा तहसीलदार न्यायालय का चक्कर लगाना पड़ता है। नए सिरे से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जानते हुए भी कि सारी जानकारी तहसील या उच्च अधिकारियों के न्यायालय के आदेश पर भी तैयार होती है। जरूरी है कि किसानों को छोटी-छोटी त्रुटिे के लिए बार बार न्यायालय का चक्कर ना लगाने पड़े। एप्प में कुछ ऐसी व्यवस्था किया जाए कि जाति, नाम पता,कान्ट्रेक्ट नम्बर जैसी छोटी गलतियों  को पटवारी सुधार सकें।

                     पटवारियों ने पत्र में बताया है कि एप्प में त्रुटि सुधार के बाद खसरा प्रदर्शित नहीं होता। ऐसी सूरत मे खाताधारकों को नया खाता बनवाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्हें फिर से जटिल प्रक्रिया से गुजरने को मजबूर होना पड़ता है। कालम 12 का भी आप्शन नहीं है। खसरा संशोधन आप्शन भी काम नहीं कर रहा है। खसरा संशोधन के बाद डिजीटल सिग्नेचर के लाग इन में अलग अलग जानकारी मिलती है। खाताधारकों को जोड़ने के लिए किसी प्रकार का  विकल्प भी नहीं है। जिसके कारण किसान परेशान हैं।

                  देखने में आता है कि जब कोई पटवारी अपना आईडी पासवर्ड डालता है तो दूसरे जिले का आईडी ओपन हो जाता है। इस बात को लेकर पटवारी परेशान और भयभीत हैं। एक समय भूमि का नकल पटवारी कार्यालय में आसानी से मिल जाता था। लेकिन अब तमाम परेशानियों के कारण किसानों को तहसील का चक्कर बार बार लगाना पड़ता है।

                 पटवारियों ने जानकारी दी है कि आनलाइन डिजिटल सिग्नेचर से भूमि की बिक्री नकल कोई भी निकाल सकता है। कोई भी जालसाज फर्जी रजिस्ट्री करवा सकता है। ऐसा हो भी रहा है। जिसका दण्ड या तो किसानों को भुगतना पड़ रहा है या फिर पटवारियों को। इतना ही नहीं अभी तक कई पटवारियों को कम्प्यूटर ज्ञान भी नहीं है।

                   पटवारियों ने कहा कि साफ्टवेयर में कई प्रकार की त्रुटियां है। त्रुटियों को दूर कर आनलाइन प्रक्रिया को सरल और सहज बनाए जाने की जरूरत है। अपनी शिकायत मेंं पटवारियों ने कहा कि हम लोगों को अन्य विभागों में सेवाओं के भेजा जाता है। जिसके चलते मुूल कार्य प्रभावित होता है। इसलिए शासन इस पर भी गंभीरता से विचार करे।

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