देखे VIDEO-दिल्ली के खिलाफ MS Dhoni ने साबित किया आखिर क्यों हैं वह DRS किंग


रायपुर।
आईपीएल (IPL) 2019 के दूसरे क्वालिफॉयर में एक बार फिर ऐसा मौका आया जब यह बात साबित हो गई कि डिसीजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस (DRS)) को फैन्स एमएस धोनी (MS Dhoni) रिव्यू सिस्टम क्यों कहते हैं. क्रिकेट के नियमों में जबसे डीआरएस (DRS) को लॉन्च किया गया है तब से अगर किसी खिलाड़ी का सबसे ज्यादा बार यह फैसला सही निकला है तो वह है डीआरएस किंग महेंद्र सिंह एमएस धोनी (MS Dhoni) का. एमएस धोनी (MS Dhoni) खेल को इतनी अच्छी तरह समझते हैं कि अधिकतर मामलों में उनका फैसला सही साबित होता है.

इसका एक उदाहरण चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) और दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) के बीच आईपीएल (IPL) 2019 के दूसरे क्वॉलिफायर के दौरान देखा गया जब उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) के युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) के खिलाफ इसे आजमाया.

शुक्रवार को विशाखापत्तनम में पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) 5 रन बनाकर खेल रहे थे तब तेज गेंदबाज दीपक चाहर की एक गेंद उनके पैड से टकराई. इसके बाद बोलर और एमएस धोनी (MS Dhoni) ने जोरदार अपील की लेकिन ऑन फील्ड अंपायर एस. रवि ने पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) को नॉट आउट दिया.

पहली नजर में ऐसा लगा कि गेंद विकेटों के ऊपर से जा रही है. लेकिन एमएस धोनी (MS Dhoni) ने इस पर रिव्यू लेने का फैसला किया. रीप्ले में साफ हो गया कि गेंद विकेटों से टकरा रही थी. और एक बार फिर एमएस धोनी (MS Dhoni) का फैसला सही साबित हुआ.

दीपक चहर ने पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) को टी20 क्रिकेट में 29 गेंद फेंकी है जिन पर 19 वर्षीय इस बल्लेबाज ने सिर्फ 27 रन बनाए हैं और चारों बार आउट हुए हैं. पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) के लिए इंडियन प्रीमियर लीग का यह सीजन बहुत अच्छा नहीं रहा है. इस साल खेले गए 16 मैचों में वह 22.06 के औसत से 353 रन ही बना पाए हैं. इस बीच उन्होंने सिर्फ दो अर्धशतक लगाए हैं.

2012 के बाद पहली बार प्लेऑफ में पहुंची दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) की टीम ने बुधवार को एलिमिनेटर में सनराइजर्स हैदराबाद (Sunrisers Hyderabad) को हराकर दूसरे क्वॉलिफायर में जगह बनाई थी. वहीं चेन्नई को पहले क्वॉलिफायर में मुंबई इंडियंस के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था. मुंबई की टीम ने इसके साथ ही फाइनल में जगह बना ली थी.

दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) की टीम कभी फाइनल में नहीं पहुंच पाई है वहीं तीन बार की चैंपियन टीम चेन्नई सात फाइनल मुकाबले खेल चुकी है.

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