BJP नेता काली पट्टी बांध जंतर-मंतर पर बैठे, जानें क्या है पूरा मामला


नई दिल्ली-
पश्चिम बंगाल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड-शो में हुई हिंसा पर राजनीति अब कोलकाता की सड़कों से निकल कर दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गई है. ममता बनर्जी के तानाशाही रवैये के विरोध में बीजेपी ने बुधवार को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरने का आयोजन किया. इसमें रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण समेत बीजेपी के जितेंद्र सिंह, डॉ हर्षवर्धन, विजय गोयल जैसे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे. सभी ने ममता बनर्जी के रवैये के विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधी थी.सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करे

रक्षा मंत्री ने कहा तानाशाही पर उतरीं ममता बनर्जी
धरने पर बैठी निर्मला सीतारमण ने कहा कि हार से बौखलाई ममता बनर्जी अब तानाशाही पर उतर आईं हैं. वह न सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत राजनीतिक रैलियों और रोड-शो को अनुमति देने से इंकार कर रही हैं, बल्कि टीएमसी के गुंडों के बल पर हिंसा को भी बढ़ावा दे रही हैं. अगर सीआपीएफ नहीं होती तो राष्ट्रीय अध्यक्ष वहां से नहीं निकल पाते. वहां लोकतंत्र की क्या स्थिति है यह कल के रोड शो में देखा जा सकता था. उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग की कि वह सातवें और अंतिम चरण के चुनाव में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की शत-प्रतिशत तैनाती करे.

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बीजेपी अध्यक्ष ने कहा सीआरपीएफ की वजह से बचे
गौरतलब है कि इस धरना-प्रदर्शन के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस वार्ता कर कुछ तस्वीरें दिखाकर दावा किया कि रोड शो में हिंसा टीएमसी के लोगों ने की और टीएमसी के ही गुंडों ने ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा भी तोड़ी. शाह ने बंगाल में टीएमसी के दिन खत्म होने का ऐलान करते हुए कहा कि बीजेपी बंगाल में क्लीन स्वीप करने जा रही है. यहीं उन्होंने कहा कि अगर सीआरपीएफ सुरक्षा नहीं होती तो वह मंगलवार को बच कर नहीं निकल सकते थे.

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