9 साल में 11 करोड़ की कमाई…PMO ने मांगी रिपोर्ट..आबकारी बाबू ने किया जमकर भ्रष्टाचार..कई अधिकारी शामिल

बिलासपुर— आबकारी बाबू के खिलाफ एसीबी छापामार कार्रवाई के बीच एक शिकायत तात्कालीन आबकारी के एक अधिकारी ने भ्रष्टाचार की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को आनलाइन की थी।  शिकायत 17 अगस्त साल 2017 में प्रधानमंत्री के वेवपोर्टचल के माध्यम से किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएमओ कार्यालय ने शिकायत पत्र के साथ एक पत्र  जिला कलेक्टर को भेजा है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करे

पत्र में कहा गया है कि सात दिन के अन्दर आबकारी बाबू दिनेश दुबे के खिलाफ आरोपों की जांच रिपोर्ट को पीएमओं को भेजा जाए। पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन ने आशय का पत्र आबकारी उड़न दस्ता विभाग को रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है।

                        जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी ने जांच रिपोर्ट रायपुर आयुक्त के हवाले कर दिया है।  रिपोर्ट में बताया गया है कि दिनेश दुबे के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप जांच के दौरान बिन्दुवार सही पाए गए हैं। दिनेश दुबे ने शराब माफियों के साथ सांठ गांठ कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। छानबीन की दौरान ज्यादातर आरोप प्रमाण के साथ सही हैं। दुबे ने भ्रष्टाचार कर 11 करोड़ रूपए से अधिक की चल अचल सम्पत्ति अर्जित किया है।

गिर सकती है कार्रवाई की गाज

                   बताते चलें कि तात्कालीन समय बिलासपुर आबकारी विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड तीन बाबू दिनेश दुबे के खिलाफ किसी पीसी अग्रवाल ने 12 अगस्त 2017 को प्रधानमंत्री कार्यालय मे आनलाइन भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि आबकारी बाबू दिनेश दुबे शराब ठेकेदारों, निर्माताओं से साठगांठ कर मात्र 9 साल में 11 करोड़ से अधिक राशि का आसामी बन गया है। मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय ने रायपुर स्थित मुख्य आबकारी कार्यालय को पत्र लिखकर जांच का आदेश दिया था। जांच अधिकारी बिलासपुर वेदराम लहरे जिला आबकारी अधिकारी उड़नदस्ता ने 13 जून 2019 को रिपोर्ट आबकारी आयुक्त रायपुर को सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि मामले में कभी भी आबकारी बाबू दिनेश दुबे पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

दिनेश दुबे पर लगाए गए आरोप और जांच बिन्दु

              दिनेश दुबे के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय को आन लाइन 17 अगस्त 2017 में की गयी शिकायत भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। शिकायत में बताया है कि दिनेश दुबे ने दस साल का वेतन अपने खाते से नहीं निकाला है। उसका खाता एसबीआई शाखा सरकण्डा में है। खाता क्रमांक 10597779727 है। दिनेश ने तीन नए मकान करीब तीन करोड़ से अधिक रूपयो से तैयार किया है। सभी मकान व्हीआईपी लोकेसन में है। जमीन बेशकीमती हैं। इसके अलावा रहने के लिए अलग से मकान बनवाया है।

                   दिनेश ने तीन महीनों में शासकीय दुकानों से दो करोड़ की वसूली की है। पत्नी मीनाक्षी, बेटी अदिति और पुत्र आदित्य दुबे का खाता एसबीआई कलेक्टोरेट ब्रांच में है। मीनाक्षी का खाता क्रमांक 20271235706 है। हर महीने पन्द्रह हजार रूपए जमा करता है। आदित्य दुबे का खाता क्रमांक 3372210721 और बेटी अदिति का खाता क्रमांक 33722909432 है। दोनों खाते में दिनेश दुबे हर महीने पांच पांच हजार रूपए जमा करता है।

                  शिकायत में बताया गया है कि नवम्बर दिसम्बर 2016 नोटबंदी के दौरान दिनेश दुबे ने कार्यालय में पदस्थ भृत्यों के खाते में पांच पाच लाख रूपए जमा कराया। इसके बाद  कमीशन देकर रूपया निकलवा भी लिया। साल 2015-16 में एफएल 3 बार लायसेंस को फर्जी परमिट देकर लाखों रूपए कमाए। शासन को करोड़ों रूपयों का नुकसान पहुंचाया। दिनेश ने शराब ढुलाई में 45 लाख रूपए नहींं मिलने पर ट्रांसपोर्टर का ठेका निरस्त करवा दिया। इसके बाद अपने चहेते को ठेका दिलाने के एवज में पांच लाख रूपए रिश्वत लिया। टांसपोर्ट बिल पर बीस प्रतिशत कमीशन भी लिया। दुबे ने फर्जी तरीके से स्टेशनरी और फर्नीचर बिल बनाकर हर महीने लाखों रूपए का वारा न्यारा किया है। ठेकेदारों के पंडों की तरह धनंजय गोस्वामी और भाजपा के छोटे नेताओं के साथ मिलकर सरकारी वाहनों में वसूली करता है।  दस प्रतिशत कमीशन देने के नाम पर जिले के 71 दुकानों में अवैध तरीके से अहाता चलाकर हर महीने चार से पांच लाख रूपयों की वसूली करता है।

                     शिकायत के अनुसार दिनेश दुबे नोटबंदी के दौरान कार्यालय के भृत्य गणेशराम  महार,महेश राम यादव नरेश कुमार सोमावार,हीरालाल छात्रे और संतोष कुमार के खाते में पांच पांच लाख रूपया डाला। बाद में कमीशन छोड़कर रूपए निकाल लिए। शिकायत कर्ता ने सभी लोगों का खाता क्रमांक भी दिया है। शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि  दिनेश दुबे ने मिलन चौक में 80 की लाख की लगात से मकान बनवाया है। 36 माल के पीछे मकान बनाने में एक करोड से अधिक रूपए खर्च किए हैं। भारतीय नगर में शीला टॉवर के पास एक करोड़ की लागत से बंगला बनवाया है। लायसेंस दिलाने के नाम पर लाखों रूपयों का कमीशन खाता है। अपने आलाधिकारियों को भी खिलाता है।

जांच के बाद पेश हुआ रिपोर्टर

                 प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे पत्र और राज्य शासन के आदेश  पर वेदराम लहरे जिला आबकारी अधिकारी संभागीय उडनदस्ता को जांच का जिम्मा दिया गया। 13 जून 2019 को जांच अधिकारी ने रिपोर्ट आयुक्त रायपुर के हवाले कर दिया गया है। रिपोर्ट में दिनेश दुबे के परिजनों खासकर बेटा बेटी और पत्नी के खाते से जुड़ी सभी जानकारियों को छाया प्रति के साथ पेश किया गया है। रिपोर्ट में दिनेश दुबे ने कब और कितना रूपया सभी खातों में डाला गया है सभी जानकारी को स्प्ष्ट किया गया है। नोटबंदी के दौरान पांचो भृत्यों के खाते में डाली गयी रकम की शिकायत को सही बताया गया है। रिपोर्ट में जानकारी दी गयी है कि किस किस तारीख को रूपये डाले और निकाले गए हैं। जांंच के दौरान करोड़ों रूपए की लागत से बनाए गए मकानों की शिकायत को भी पुख्ता होना बताया गया है। जांच अधिकारी ने खाता का स्टेटमेन्ट भी शासन के हवाले किया है।

                                   रिपोर्ट में बताया गया है कि दिनेश दुबे ने नोटबंदी के दौरान और इसके पहले और बाद में परिजनों के खाते में हर महीने और शिकायत में बतायी गयी रासि से कहीं ज्यादा मात्रा में रूपया जमा किया है। इसके अलावा दिनेश दुबे के पास बेनामी जमीन भी है।

               रिपोर्ट में जांच अधिकारी ने कहा है कि दिनेश दुबे के खिलाफ लगाए गए आरोप एवं शिकायत सही पाए गए हैं। बताए गए बिन्दुओं पर जांच के दौरान साक्ष्य भी पर्याप्त हैं। यह सच है कि दिनेश दुबे अब जिला आबकारी बिलासपुर में सहायक ग्रेड दो के पद पर कार्यरत है। इस समय दिनेश पर एसीबी की जांच कार्रवाई भी चल रही है।

                                                                                                                                                                                                क्रमशः अगली कड़ी में

Comments

  1. By V Sagar Mitra

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  2. By Manish agrawal

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