खतरे में जाबाज आबकारी बाबू…नोटबंदी में भृत्यों के खातों में डाला था लाखों रूपए…विशेष सचिव ने कहा होगी कार्रवाई

बिलासपुर— करोड़पति जाबाज आबकारी बाबू की परेशानी कम होते नजर नहीं आ रही है। आबकारी विशेष सचिव ने कहा किे जिस दिन मामला कोर्ट में पहुंचेगा…दुबे को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। विशेष सचिव ए.पी.त्रिपाठी ने पहले तो कहा कि हमें पीएमओ को शिकायत और जांच रिपोर्ट से मतलब नहीं..बाद में बताया शिकायत और जांच रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। मामले का पता लगाएंगे। उचित कार्रवाई भी करेंगे। इधर पीएमओ से पत्र मिलने के बाद जिला कलेक्टर ने जिला आबकारी अधिकारी को टीम गठन कर दुबे के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करने को कहा है। जिला आबकारी अधिकारी ने चार  सदस्यीय टीम का गठन कर सात दिनों के अन्दर रिपोर्ट देने को कहा है।

                      बताते चलें कि पीएमओ को तात्कालीन जिला आबकारी अधिकारी पीसी अग्रवाल के नाम से एक शिकायत की गयी थी। 17 अगस्त 2017 को आनलाइन भेजी गयी शिकायत में बताया गया कि आबकारी बाबू दिनेश दुबे सहायक ग्रेड तीन ने नियम कानून को ताकपर रखकर 11 करोड़ की सम्पति अर्जित की है। मात्र 9 साल की नौकरी में  जिले और शहर के पॉस इलाकों में करोड़ों की जमीन खरीदा। करोड़ों रूपए खर्च कर आलीशान मकान बनवाया । बच्चों के खाते में हर महीने 25 हजार रूपए जमा करता है। पंडो की तरह जिले के 71 दुकानों से वसूली करता है। जिला आबकारी अधिकारी के साथ रूपयों का बंदरबांट भी करता है।

                     शिकायत में यह भी बताया गया कि दिनेश दुबे ठेकेदारों को टेंडर दिलाने और बिल निकालने के लिए कमीशन लेता है। कमीशन लाखों रूपयों में होता है। नोटबंदी के दौरान ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने  विभाग के भृत्यों का उपयोग किया। बाद मे निश्चित कमीशन देने के बाद रूपयों को दिनेश दुबे ने निकलवा भी लिया।

                     शिकायत पर रायपुर के निर्देश में जिला आबकारी अधिकारी उडनदस्ता वेदराम लहरे की अगुवाई में आरोपो की जांच हुई। रिपोर्ट में सभी आरोपों को सही पाया गया।  ना जाने किन कारणों से करीब एक साल से अधिक समय तक रिपोर्ट को दबा कर रखा गया। जब दिनेश दुबे का स्थानांतरण उडनदस्ता से जिला आबकारी कार्यालय में किया गया। ठीक उसी दिन यानि 12 और 13 अप्रैल को रिपोर्ट को रायपुर भेजा गया। कारण जानने संंभागीय उड़नदस्ता उपायुक्त से संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन उन्होने फोन नहीं उठाया। बहरहाल रिपोर्ट को सालों दबा कर रखने को लेकर लोगों में जमकर काना फूसी हो रही है।

भृत्यों के खाते में जमा..फिर निकाला गया

                               रिपोर्ट में बताया गया है कि दुबे प्रत्येक दिन दो से तीन लाख रूपए कमाता है। इस समय एसीबी की छापामार कार्रवाई के बाद दुबे जांजगीर में प्रमोशन के साथ पदस्थ है। दिनेश दुबे तात्कालीन जिला आबकारी अधिकारी की विधायक पत्नी के प्रयास से बिलासपुर संभागीय कार्यालय में स्थानांतरण करवा लिया।

                    रिपोर्ट में बताया गया है कि नोटबंदी के दौरान पांच भृत्यों के खाते में रूपया डाला। जांच के समय पूछताछ के दौरान भृत्यों ने स्वीकार किया रूपया दुबे का है। दुबे के पास चिचिरदा में करोड़ो की जमीन है। विभाग में रहते हुए वह सब काम किया…जिससे गलत रास्ते से रूपए हासिल हो सके। उसने इसके लिए तात्कालीन जिला आबकारी अधिकारी को भी विश्वास में लिया। यहां तक कि अधिकार क्षेत्र के बाहर होते हुए भी सीनियर को दरकिनार कर अनाप शनाप रूपए लेकर शराब लायसेंस देने का काम किया।  सारी जानकारी प्रमाण के साथ रिपोर्ट में संलग्न है।

चार सदस्यीय टीम का गठन

                  12 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय से पत्र मिलने के बाद कलेक्टर ने जिला आबकारी अधिकारी को जांंच करने को कहा। कलेक्टर को जानकारी मिली कि जिस कार्यालय में दुबे का स्थानांतरण किया गया..उसी कार्यालय में रहते हुए उसने अकूत काली कमाई की। एक शिकायत के बाद कलेक्टर को संज्ञान में आया कि दुबे गवाहों को देख लेने और अधिकारी से निपट लेने की बात करता है। इसके अलावा दस्तावेज प्रभावित करने का भी प्रयास कर सकता है।

              मामले को ध्यान में रखकर कलेक्टर अलंग ने एक पत्र जिला आबकारी अधिकारी को लिखा । टीम गठन कर सात दिनों में  रिपोर्ट देने को कहा है। जिला आबकारी अधिकारी विजय सेन शर्मा ने बताया कि तीन सदस्यी टीम का गठन किया गया है। टीम की अगुवाई एडीईओ महेश्वर नारायण सिन्हा करेंगे। टीम में समीर मिश्रा,अनिल मित्तल और उमेश अग्रवाल की भी भूमिका होगी। जांच में पीएमओ कार्यालय को भेजी गयी शिकायत और रिपोर्ट का भी अध्ययन किया जाएगा। अन्य शिकायतों पर भी जांच होगी। चाहे वह धमकी जैसी ही बात क्यों ना हो।

कमिश्नर ने कहा बाहर हूं..सोमवार को बात करूंगा

            शिकायत के करीब डेढ़ साल बाद रिमांड पर जांच रिपोर्ट भेजा गया। कैसा इत्तफाक है कि विभाग ने उसी दिन रिपोर्ट रायपुर भेजा। जिस दिन दुबे का स्थानांतरण जिला आबकारी कार्यालय में किया गया। सीजी वाल के सवाल पर कमिश्नर निरंजन दास ने बताया कि फिलहाल मैं नेटवर्क से अन्दर बाहर हो रहा हूं। जहां तक समझ में आ रहा है कि मामला दिनेश दुबे को लेकर है। सोमवार को विस्तार से सवाल का जवाब दूंगा। बाहर जा रहा हूं। अधिक जानकारी के लिए आबकारी विभाग के विशेष सेक्रेटरी एपी.त्रिपाठी से सम्पर्क कर सकते हैं।

कोर्ट में चालान पेश होने पर..जाएगी नौकरी

                   निरंजन दास से पूछे गए सवाल को एक बार फिर सीजी वाल ने दुहराया। पहले तो विशेष सेक्रेटरी एपी त्रिपाठीने प्रधानमंत्री को भेजी गयी शिकायत और विभागीय रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में बात संभालते हुए कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। दिनेश दुबे के बाेर में इस बात की जानकारी जरूर है कि एसीबी ने छापामार कार्रवाई की थी। अकूत संपत्ति का मामला सामने आया है। सरकारी रिपोर्ट के आधार पर हम कार्रवाई करेंगे। जिस दिन मामला कोर्ट में पहुंचेगा दिनेश को नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

रिपोर्ट की जानकारी नहीं होना समझ से परे..मामला गड़बड़

                        समझ से परे है कि उडनदस्ता संभागीय कार्यालय को रायपुर से निर्देश मिलता है कि शिकायत की जांच की जाए। वेदराम लहरे को जांच की जिम्मेदारी दी जाती है। फिर भी बड़े अधिकारी कहते हैं कि जानकारी नहीं है। हमारे लिए एसीबी की रिपोर्ट मायने रखता है। ऐसे में फिर प्रधानमंत्री की शिकायत पर जिला आबकारी अधिकारी को जांच करने का कलेक्टर निर्देश का क्या अर्थ रह जाता है। बहरहाल दिनेश दुबे को बचाने का प्रयास किया जा रहा है ।कौन कर रहा है यह तो आने वाला समय ही बताएगा। जानकारी यह भी है कि एसीबी ने रिपोर्ट तैयार कर लिया है। लेकिन मामला अभी तक कोर्ट तक नहीं पहुंचा है।

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