शिक्षकों की बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर प्रतिक्रिया जारी..शिक्षक जैसे गरिमामय पद पर पहरा क्यों लगा रही सरकार.?

बिलासपुर।कोरबा कलेक्टर द्वारा दिया आदेश प्रदेश में एक नया बवाल खड़ा करने जा रहा है शिक्षाकर्मियों को पूर्व की सरकार ने जो शाला कोष टेबलेट दिया था  जिसमें बायोमेट्रिक उपस्थिति सहित विभाग की कई जानकारियां आदान प्रदान होनी थी। वह 19 महीने मे क्या हुई किसी के पास जानकारी नही है।ताजा हालात पर गौर करे तो कॉसमॉस योजना के तहत स्कुलो को शालाकोष से जोड़ने की यह योजना खटाई में या बंदरबांट में चली गई ऐसा लग रहा है।

टेबलेट वितरण के शुरुवात से ही इसमें खराब होने औऱ हैंग होने की समस्या आम थी कई स्कूलो में इसके हैक होने की शिकायतें आई थी।जिसमे की टेबलेट ओपन करते ही कई बार अश्लील तस्वीरें आ रही थी।

फिर से वही मुद्दा एक बार गरमा गया है।हमने टेबलेट से बायोमेट्रिक हाजरी और उसके आधार पर वेतन भुगतान व टेबलेट के उपयोग पर कई शिक्षाकर्मियों से जो बस, ट्रेन में और निजी वाहन से स्कूल आना-जाना करते हैं उन से चर्चा की तब एक बात सामने आई कि आखिर अधिकारी और सरकारें शिक्षक जैसे गरिमामय पद पर पहरा क्यो लगा रही है?

देश में शालाये जिला मुख्यालय या तहसील मुख्यालय में नही है ये शहर से लेकर गांव के कोने कोने में है। सभी शिक्षको का शाला स्थल के करीब निवास करना संभव नही है। शाला से निवास आने जाने यातायात से जुड़ी कुछ व्यवहारिक दिक्कतें होती है।जिसमे महिलाओं को ज्यादा होती है।

कोई शिक्षक कभी 10 से 20 मिनट विलम्ब से पहुँचता है। किसी शिक्षक को  10 मिनट से 30 मिनट जल्दी किसी कारणवश कभी-कभार जाना पड़ता है। इतना ही सामान्य आम शिक्षकों के जीवन मे होता है। जिसे संस्था प्रमुख और सहकर्मी शिक्षक आपसी तालमेल से काम करते है।

चर्चा में शिक्षक बताते है कि-सरकार या उनके बड़े अधिकारियों को लगता है कि शिक्षक स्कूल जाते ही नही है। घर बैठे हाजरी लग जाती है। औऱ वेेेतन उनके खाते में आ जाती है। तो यह सोचना गलत है।शिक्षकों पर संस्था प्रमुख प्राचार्य, हेड मास्टर, ग्राम शिक्षा समिति, संकुल कार्यालय, विकास खंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी इतने लोगों का नियंत्रण रहता है। स्कूल की छुट्टी होती है तो पूरे गाँव को पता चल जाता है। सड़क पर राहगीर समझ जाते है। स्कूल की छुट्टी हो गई है।

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के एक प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने प्रेस नोट रिलीज किया जिसमे उन्होंने ने आरोप लगाया कि बायोमेट्रिक मशीन है पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार के घोर भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है। इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए। बायोमैट्रिक मशीन की वास्तविक बाजार मूल्य प्रति मशीन मात्र चार हजार रुपये है जिसे  रमन सरकार ने प्रति मशीन 16 हजार रुपये के दर पर कम्पनी से खरीदी की है, इस प्रकार कम्पनी के साथ सांठ-गांठ कर सरकार ने पूरे प्रदेश भर में अरबों रुपये का बड़ा घोटाला किया है।

जाकेश साहू ने प्रदेश की वर्तमान भूपेश सरकार से मांग की है कि स्कूलों में लगे बायोमैट्रिक मशीन की खरीदी घोटाले की एक कमेटी गठित कर जांच की जाय व दोषियों पर सख्त कार्यवाही करते हुए भ्रष्टाचार व भारी भरकम घोटाले की वसूली की जाय।

शिक्षक नेता विकास राजपूत ने बताया कि बायोमेट्रिक्स हाजरी से वेतन बनाने के पहले शासन को चाहिए की ये व्यवस्था सिर्फ शिक्षा विभाग मे ही क्यो लागू किया जा रहा है बाकी अन्य विभागों मे लागू क्यो नही किया जा रहा शिक्षक तो जब स्कूल पहुचते है तो घण्टी बजाकर व जब स्कूल से विद्यार्थीयो को छुट्टी देकर अपने घर के लिए निकलते है तो घण्टी बजाकर स्कूल से बाहर निकलते है जबकि अन्य विभागों मे ऐसी कोई व्यवस्था नही है,खराब टेबलेट जो बार बार हैंग हो जाता है तो कही कही टेबलेट फटने की घटना भी हो चुका है ऐसे मे टेबलेट से हाजरी लेकर वेतन भुगतान की व्ययवस्था शिक्षको को सिर्फ परेशान करने वाले आदेश है ,इस आदेश के पहले पूरी व्यवस्था को सुधार कर सभी विभागों मे लागू किया जाना उचित रहेगा।

महिला शिक्षा कर्मी नेेता गंगा पासी ने बताया की हम शिक्षको सरकार ऐसा ऑनलाइन निगरानी से दूर रखें । शिक्षक संदिग्ध कर्मचारी नही होता हैं। कभी किसी शिक्षक के घर आयकर या लोकायुक्त के छापे नही पड़ते है। शिक्षक जिम्मेदार होता है।  शालाकोश  का ऐसा उपयोग हो शिक्षा गुणवत्ता के साथ शाला भवन से जुड़ी हुई शाला संचालन के समस्त गतिविधियों का बायोमेट्रिक मशीन से संपादित किया जा सके। ताकि शिक्षकों को स्कूल छोड़ कर कार्यालयों के चक्कर लगाना ना पड़े। प्रदेश की महिला शिक्षक कोरबा में बायोमेट्रिक के फरमान का विरोध करती है।

कोरबा जिले के शिक्षाकर्मी नेता मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि बायोमेट्रिक जब  शिक्षा को थोपा गया उस वक्त भी हमने स्वागत ही किया था। उस वक़्त बताया गया कि बायोमैट्रिक से वेतन भुगतान होगा..! शिक्षको को कोई आपत्ति नही थी। लेकिन बायोमेट्रिक लगे 18-19 माह हो गया छ.ग.मे कही  ऐसा भुगतान नही हुआ है ….! कारण बायोमैट्रिक मशीन का क्वालिटी ठिक नही,नेटवर्ट ठिक नही,सिंक आटोमैटिक होना चाहिये,जिले में लगभग60% मशीन पुरी तरह से खाराब होने के कगार पर आ गया है। जब मशीन नई थी। साथ मे IT विभाग खड़ा था तब की स्थिति मे बायोमैट्रिक मशीन से वेतन भुगतान नही हुआ तो अब भी  संभव नही है ,और सम्भव हो भी जाये, तो सिर्फ शिक्षको का ही क्यो? सभी विभागों में चालू किया जाये हम तो ईमानदार है हमे कोई फर्क नही पड़ेगा।

छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक संघ कोरबा के जिला अध्यक्ष मनोज चौबे ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में प्रांतीय आवाहन पर 19 जून को शिक्षकों के लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री  के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस दौरान बायोमेट्रिक की बाध्यता पर संघ द्वारा कलेक्टर महोदया से अलग से तर्कपूर्ण चर्चा किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *