सरकार की स्थानांतरण नीति को लेकर एमपी में घमासान, जिस नीति का विरोध था वही फिर थमा दी गई

भोपाल।मध्यप्रदेश में स्थानांतरण पाॅलिसी पर घमासान मचा हुआ है।मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग और अनुसूचित जनजाति विभाग में पूर्व सरकार में जिस ऑनलाईन स्थानांतरण पॉलिसी का विरोध शैक्षणिक कर्मचारी कर रहे थे वही स्थानांतरण पॉलिसी आंशिक परिवर्तन के साथ थमा दी गई है। सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

मध्यप्रदेश के अध्यापक बताते है कि पूर्व की सरकार ने नो स्थानांतरण पाॅलिसी प्राथमिक-माध्यमिक शालाओं के लिए बनाई थी वह आज तक पूरी नही हो पाई। उसी से आशंका उत्पन्न हो रही है कि यह नवीन घोषित प्रक्रिया भी पूरी हो पायेगी। घर वापसी का सपना देखने वाले शैक्षणिक कर्मचारियों में आक्रोश भडकने लगा है।

ऑनलाइन पाॅलिसी आने के पहले ही बहुत से शैक्षणिक कर्मचारी बगैर किसी परेशानी के घर वापसी कर चुके है। शैक्षणिक कर्मचारियो की आसानी से घर वापसी होते देख कुछ अध्यापक नेताओं के पेट में दर्द होना चालू हो गया था।

उन अध्यापक नेताओं को हमेशा इस बात का दंभ रहता है कि वे पाॅलिसी मेकर है उनके हस्तक्षेप के बगैर कुछ नही हो सकता। अपने वजूद को बचाने के लिए अध्यापक नेताओं ने ऑफलाइन स्थानांतरण का विरोध करना प्रारम्भ कर दिया और ऑनलाइन स्थानांतरण की मांग करने लगे। कारण प्रचारित किया गया की भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। लाखों का लेन-देन हो रहा है। सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा सुविधा शुल्क मांगी जा रही है। सच्चाई इसमें ना के बराबर है।

जबकि देखने में ये आया है कि हमारे ही कर्मचारी स्थानांतरण के बदले छोटे-मोटे नेताओं के पास अपने काम की बोली खुद ही लगाते देखे गये है। ऑफलाइन स्थानांतरण पर अध्यापक नेताओ द्वारा मचाये गये हंगामे से अधिकारियों को स्थानांतरण मामले में हस्तक्षेप का अवसर मिल गया और उन्होने अपनी आदतानुसार बहुत से रोडे शैक्षणिक कर्मचारियों के घर वापसी के मार्ग में खडे कर दिए है।

पूर्व सरकार में प्रचलित बंधनयुक्त और ऑनलाइन स्थानांतरण प्रक्रिया के हश्र को देखकर अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश कभी भी ऑनलाइन प्रक्रिया का समर्थन नही करती है। अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश ने हमेशा बंधनमुक्त स्थानांतरण नीति का समर्थन किया है जो ऑफलाइन से ही संभव था। ऑनलाईन की सबसे बडी कमजोरी यही है कि इस प्रक्रिया के पूरे होने की कोई ग्यारंटी नही है। यह बंधनयुक्त है।

केवल अतिशेष शैक्षणिक कर्मचारियों का ही स्थानांतरण होना है। कुल संख्या के 5% से अधिक का स्थानांतरण नही होना है। ऊपर से 20 शालाओं की च्वाइस और स्थानांतरण होने पर जाने की बाध्यता भले ही स्थानांतरित शाला आपके लिए सुविधाजनक हो या ना हो।

स्थानांतरण के लिए नये कैडर में नियुक्ति की शर्त भी रख दी गई है जिससे अभी तक बहुत बडी संख्या में अध्यापक वंचित है। प्राथमिक/माध्यमिक शाला में कार्यरत शैक्षणिक कर्मचारियों पर पुनः संकट के बादल छाने लगे है क्योंकि वहा अतिशेष की स्थिति न के बराबर है। विभागीय पद स्थापना का रिकार्ड भी अपडेट नही है।

इसी सरकार के कार्यकाल में ऑफलाइन स्थानांतरण द्वारा स्थानांतरित हो चुके शैक्षणिक कर्मचारियों की शाला में पदस्थापना नियमों के अनुसार ही हो रही थी और स्थानांतरण के लिए प्राथमिक शाला में 2 और माध्यमिक शाला में 3 का कोई बंधन नही था इसलिए अधिक से अधिक लाभान्वित हो रहे थे और भविष्य में भी होते।

ऑनलाईन स्थानांतरण पाॅलिसी का समर्थन केवल कर्मचारियों की नेतागिरी करने वाले लोग कर रहे है। उन्हे शैक्षणिक कर्मचारियों की घर वापसी से कोई मतलब नही है। जिन अध्यापकों का नये कैडर में नियुक्ति नही हुई है वे स्थानांतरण के पात्र नही होगे।

जिन प्राथमिक शालाओं में 2 शिक्षक और माध्यमिक शालाओं में 3 शिक्षक है वे भी स्थानांतरण के पात्र नही होगे। खेल शिक्षक, उद्योग शिक्षक और विज्ञान शिक्षक के लिए स्थानांतरण के स्पस्ट दिशा-निर्देश नही है। स्वाभाविक है असंतुष्ट शैक्षणिक कर्मचारी माननीय न्यायालय की शरण लेगे और पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया बाधित हो जाएगी। इससे इंकार नही किया जा सकता।
अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश बंधनमुक्त स्थानांतरण पाॅलिसी की समर्थक रही है और भविष्य में भी रहेगी ताकि अधिकतम शैक्षणिक कर्मचारियो को घर वापसी का लाभ मिल सके।

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