केंद्र ने घटाया छत्तीसगढ़ के लिए मिट्टी तेल का कोटा, गरीब विरोधी फैसले से बढ़ी परेशानी, सीएम भूपेश बघेल ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

bhupesh baghel,congress,amit jogi,mayawati,chhattisgarh,vidhansabha election,news,cgwallरायपुर।छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों को मिट्टी तेल नहीं मिलने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही स्थिति प्रदेश के लिए केंद्र की ओर से केरोसिन का कोटा कम किए जाने की वजह से बन रही है ।केंद्र सरकार की ओर से गरीबों के विरोध में लिया गया यह दूसरा अहम फैसला है ।पहले छात्रावासों और दाल भात सेंटर के लिए अनाज बंद किया गया और अब मिट्टी तेल का कोटा बढ़ाने की मांग के बावजूद कोटा घटा दिया गया है। इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चिट्ठी लिखी है । जिसमें छत्तीसगढ़ के लिए मिट्टी तेल का कोटा बढ़ाने का आग्रह किया गया है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि राज्य में उज्ज्वला योजना साल 2016 में शुरू की गई थी।आज दिनांक तक राज्य में योजना अंतर्गत 26.79 लाख कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं।भारत सरकार की नीति अनुसार उज्जवला योजना के अंतर्गत वितरित कनेक्शनों की संख्या में वृद्धि के आधार पर राज्य के वर्ष 2015-16 के केरोसिन का आवंटन 1.72 लाख लीटर के जगह पर सा 2018-19 में 1.15 लाख किलो लीटर कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि उज्जवला योजना के हितग्राहियों द्वारा यदि नियमित रूप से सिलेंडरों को रिफिल कराया जाता तब उस परिस्थिति में केरोसिन का आवंटन कम किया जाना औचित्यपूर्ण होता। यदि राज्य में उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों द्वारा सिलेंडरों की संख्या का अवलोकन किया जाए तो यह विदित होता है कि साल 2018-19 में कुल रिफिल कराएं गैस सिलेंडरों की संख्या 25,23,664 मात्र है।जिससे स्पष्ट है कि प्रत्येक हितग्राही द्वारा हर साल औसतन एक ही सिलेंडर रिफिल कराया गया है।

सिलेंडरों के रिफिल कम कराये जाने का प्रमुख कारण यह है कि रिफिल के लिए गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को सिलेंडर की पूरी कीमत जो कि राज्य में ₹773 है पर खरीदना पड़ता है और सब्सिडी की राशि 270.18 है जो बाद में हितग्राही के बैंक खाते में आती है।

गरीब परिवारों के लिए एकमुश्त राशि देना संभव नहीं होने और दूरस्थ अंचलों में एलपीजी वितरकों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि ना होना कम रिफिलिंग का मुख्य कारण है।आप सहमत होंगे कि छत्तीसगढ़ राज्य का क्षेत्रफल 1.35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है,में वितरको की संख्या आनुपातिक रूप से बहुत कम है। दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में निवास करने वाले ग्राहकों के लिए कई किलोमीटर यात्रा कर रिफिल सिलेंडर प्राप्त करना अत्यंत दुष्कर कार्य है। और घर पहुंच सेवा भी दूरस्थ एलपीजी वितरकों द्वारा बहुत ज्यादा विश्वसनीय नहीं है।

इन सभी तथ्यों के परिणाम स्वरूप गरीबी रेखा से नीचे आने वाले परिवारों के लिए घरेलू एलपीजी कनेक्शन विद्यमान होते हुए भी केरोसिन का उपयोग खाना पकाने के ईंधन के रूप में किए जाने की आवश्यकता होती है।

राज्य को आवंटित अपर्याप्त कोटे के कारण राज्य शासन 12.90 लाख राशन कार्ड धारकों को केरोसिन का वितरण नहीं कर रहा है। एलपीजी सिलेंडरों के रिफिल कीमत के युक्तयुक्तिकरण होते तक और एलपीजी वितरकों की संख्या में पर्याप्त प्रसार होने तक ईंधन के रूप में केरोसिन की आवश्यकता बनी रहेगी।

केरोसिन की मात्रा में कटौती से गरीब परिवारों को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।मैं आपका ध्यान आकर्षित करते हुए राज्य को केरोसिन आबंटन कोटे को वर्तमान 1.15 लाख किलोलीटर से 1.58 किलोलीटर किए जाने का अनुरोध करता हूं।यह राज्य के सभी गरीब परिवारों को उनके सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पात्रता के अनुरूप केरोसिन प्रदान करने में सहायक होगी। मैं आशा करता हूं कि इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने का कष्ट करेंगे।

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