लोहण्डीगुडाः मीडिया ने बनाया गंभीर…कुलपति

IMG-20150925-WA0005(भास्कर मिश्र)बिलासपुर—बिलासपुर जिले ने आज तक भीख नहीं मांगा । अपने हक को अधिकार के साथ हासिल किया है। शहर की तासीर ही कुछ ऐसी है कि कभी लाख बख्श हो जाता है तो कभी हक के ले सीना सामने कर देता है। फिर हासिल करके ही दम लेता हैं। इसके लिए लोगों को संगठित करने का प्रयास भी नहीं करना पड़ता। चाहे रेल जोन हो या फिर एनटीपीसी। सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी हो या फिर एसईसीएल । बिलासपुर वालों ने चाहा हासिल कर लिया। नहीं चाहा तो खोने का परवाह भी नहीं करता है।

               आने के बाद अहसास हुआ कि बिलासपुर को ऊपर वाले का वरदान हासिल है। बिना किसी शासकीय प्रयास से शिक्षा का हब बन गया। प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए बिलासपुर से बेहतर प्रदेश में कोई दूसरा शहर नहीं है। रायपुर में रहते हुए मुझे अरपा को देखने की इच्छा होती थी। जानते हुए भी कि यह नदी साल के ज्यादातर दिनों में सूखी रहती है। इसके प्रति लोगों के दिल में बहुत सम्मान और प्यार है। इसमें मै भी शामिल हूं।

                       डॉ. वंश गोपाल ने सीजी वाल को बताया कि मेरा बचपन कष्ट में बीता। नाना के घर रहकर पढ़ाई की। जैसे तैसे कालेज पास किया। गोरखपुर से भिलाई घूमने आया । आने के दूसरे दिन रविशंकर विश्वविद्यालय में लेक्चरर बन गया। ज्वाइनिंग के दूसरे दिन रिसर्च के लिए गाइड मिल गया। फिर डाक्टरेट भी कर लिया। इस दौरान कुछ विघ्नसंतोषियों ने परेशान किया। बनारस विश्वविद्यालय में रीडर बनकर चला गया। 13 महीने बाद प्राध्यापक बनकर फिर रविशंकर विश्वविद्यालय आ गया।IMG-20150925-WA0007

                         सीजी वाल से कुलपति सुन्दर लाल शर्मा विश्वविद्यालय ने बताया कि उनके जीवन में अरपा नदी हमेशा आकर्षण का केन्द्र रही है। प्रदेश बनने से पहले बिलासपुर हरा भरा हुआ करता था। तब बिलासपुर और रायपुर में बहुत अंतर नहीं भी नहीं था। रायपुर तेजी से विकासित हुआ है। फिर भी रायपुर के लोगों में वह ऊर्जा नहीं है जो बिलासपुर वासियों में है। यहां के लोगों ने जब भी प्रयास किया, हासिल कर के ही माना। शांत शहर कब रौद्र हो जाए किसी को पता नहीं चलता। इस शहर को जब लगता है कि यह उसका है, तो फिर कोई छीन नहीं सकता । मैन ऐसे बहुत कम शहर देखे हैं। अपने दम पर इसने रेल जोन, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, एनटीपीसी, एसईसीएल,हाईकोर्ट पाया है। बिना किसी राजनैतिक प्रयास से ।

                         डॉ.वंश गोपाल ने बताया कि बिलासपुर शिक्षा हब अपने प्रयास से बना है। ऊपर वाले की करामात ही कहेंगे कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय के तात्कालीन कुलपति ने गुरूघासी दास विश्वविद्यालय को अन्य कालेजों की सम्बधता को इंकार कर दिया। बिलासपुर विश्वविद्यालय का जन्म हो गया। सुन्दर लाल शर्मा विश्वविद्यालय, रायपुर में कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के होते हुए भी बन गया। हो सकता है आने वाले समय में एक विश्वविद्यालय शहर को हासिल हो जाए। इसके लिए राजनैतिक प्रयास भी नहीं चल रहा है। सीवी रमन निजी विश्वविद्यालय भी है यहां है । लोग शिक्षा के महत्व को समझते हैं तभी तो छोटे से शहर में चार पांच विश्वविद्यालय है।

         sundarlal            डॉ.वंश गोपाल ने बताया कि यदि प्रशासन चाहे तो कालेजों में ऐसा सिलेबस चलाए जो प्रशासनिक सेवाओं के लिए कोचिंग संस्थानों में पढ़ाया जाता है। इससे ना केवल सभी छात्रों को लाभ मिलेगा,बल्कि छात्रों का समय भी बचेगा। गरीब लोग शोषण का शिकार नहीं होंगे। फिर तो पूरा भारत यहां शिक्षा के लिए लाइन में खड़ा दिखेगा।

           डॉ.वंश गोपाल ने बताया कि लोहण्डीगुड़ा फर्जी परीक्षा मामले को मीडिया ने ज्यादा विवादास्पद बना दिया। इसे आसानी से निपटा जा सकता था। जब इसे राजनीति से जोड़कर देखा जाने लगा तो हमने मामले को पुलिस के हवाले कर दिया।

                   कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के पास हैण्ड्स और आर्थिक संसाधनों की भारी कमी है। लोहण्डीगुड़ा मामला इन्ही कमियों के कारण हुआ । हमारे पास नियमित वैतनिक कर्मचारी सेन्टरों में नहीं है। सब कुछ कृपा पर चल रहा है। नियमित कर्मचारी होता तो मामला इतना गंभीर नहीं होता।

pic1                वंश गोपाल ने बताया कि पहले से ही यहां बहुत अनियमितिता है। धीरे-धीरे ठीक हो चला है। मेरी प्राथमिकता है कि विश्वविद्यालय से जुड़े कर्मचारियों को किसी तरह नियमित किया जाए। प्रयास भी चल रहा है। पुरानी गलतियां पीछा नहीं छोड रही हैं। अभी तक यहां किताबें नहीं लिखी गयी हैं। संसाधनों की कमी को देखते हुए सेन्टरों को कालेजों और स्कूलों से जोड़ाकर जिम्मेदार हाथों में दिये जाने का प्रयास चल रहा है।

                                                                      परीक्षार्थी,अब असाइनमेंट घर से नहीं,बल्कि सेंटर में सामने लिखेंगे। परीक्षा की कापियों को सेन्टर से विश्वविद्यालय को तत्काल पोस्ट किया जाएगा। लोग मन से इस धारणां निकाल दें कि फार्म भरने के बाद घर बैठे डिग्रियां मिलेंगी। जितने जल्दी हो लोग इस बात को समझ जाएं। विश्वविद्यालय नकल करने के लिए नहीं है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हम मोटिवेशन कार्यशाला भी करेंगे।

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