खुले आसमान के निचे सड़ गई करोड़ो की धान,अफसरों से सांठगांठ कर मिलर भी लगा रहे हैं शासन को चुना

रामानुजगंज (पृथ्वीलाल केशरी ) खरीदी वर्ष 2018-19 में खरीदे गए धान को ज्यादातर नजदीकी क्षेत्रों में ही खुले छत के नीचे संग्रहण केंद्र बनाकर करोड़ो का धान डम्प करा दिया गया है,रामानुजगंज मंडी प्रांगण में संग्रहण किए गए धान की बात करें तो यहां अब तक करोड़ो की धान सड़ चुकी है। रामानुजगंज में डम्प किए गए धान की कुल मात्रा और बचत मात्रा क्या है।
इसकी भी जानकारी विभाग के बड़े अफसरों के पास नहीं है,इस संबंध में जब डीएमओ से पूछा गया कि रामानुजगंज में कुल कितना धान डम्प हुआ था और कुल कितना उठाव हुआ कितना शेष बचा है तो ओ भी संतोषप्रद जवाब नहीं दे सके उन्होंने किसी प्रभारी का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक प्रभारी है उसी के पास रिकार्ड है।
यदि सूक्ष्मता से रिकार्ड खंगाला जाए तो संग्रहण केंद्र में कुल धान की आवक और कुल उठाव और कुल शेष की मात्रा में काफी अनियमितता पाई जा सकती है शायद यही कारण है कि जानबूझकर धान को सड़ाया जा रहा है ताकि जिस उपार्जन केंद्र से पैसे खाकर सिर्फ कागजों में उठाव करके संग्रहण केंद्र में डम्प कराया जाना दिखाया गया हो उसे सड़े हुए धान की खाते में डालकर मामला रफा दफा किया जा सके।
एक तरफ जहां धान को सड़ाकर अनियमितता छुपाने की कोसिस की जा रही है वहीं संबंधित विभाग के बड़े अधिकारियों द्वारा मिलरों से सांठगांठ कर शासन को भी लाखों का चूना लगाया जा रहा है,रामानुजगंज के लोकल मिलर यदि रामानुजगंज से धान का उठाव करते हैं तो उनको परिवहन खर्च बिल्कुल न के बराबर मिलती है।
इसलिए एक शातिर चाल चली गई कि राजपुर में स्थित सरगुजा संभाग का सबसे बड़ा संग्रहण केंद्र डकवा क्षेत्र के मिलर रामानुजगंज से उठाव करेंगे और रामानुजगंज क्षेत्र के मिलर डकवा से उठाव करेंगे तो इससे मिलरों को भी उठाव की मोटी रकम मिलेगी और उसका एक हिस्सा संबंधित विभाग के पास पहुंचेगा, शिकायत तो ये भी है कि भले ही रामानुजगंज क्षेत्र के मिलरों को डकवा से उठाव का किराया मिलता है।
मगर रामानुजगंज से ही मिल जाता है,ठीक उसी प्रकार डकवा क्षेत्र के मिलरों को भले ही रामानुजगंज का किराया दिया जा रहा है मगर धान डकवा से ही मिल जा रहा है। खुले में सड़ रही करोड़ो की धान का यह तस्वीर शासन और प्रसासन की पोल खोलने के लिए काफी है।

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