महज पांच रुपये के लिए छात्रों एवं दुकानदारों ने किया सिर फुटौव्वल

रामानुजगंज(पृथ्वीलाल केशरी) पांच रुपए के लेन-देन का विवाद इतना बढ़ा कि पॉलीटेक्निक कालेज के तीन छात्रो व दुकानदार के बीच मारपीट सुरु हो गई। हिंसक झड़प में छात्रों व दुकानदार व उसके भाई घायल हो गए हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। रामानुजगंज थाना अंतर्गत सागर फियूल्स से महज दो किलोमीटर कि दूरी पर स्थित लाइन होटल के समीप राजा कुशवाहा के दुकान में स्पेशल विश्वास,नवजीत मंडल व विदुर मंडल अपने बाइक में पेट्रोल भरवाने गए थे। 500 ग्राम पेट्रोल लेने के बाद दुकानदार ने छात्रों से ₹45 की मांग की छात्रों ने कहा कि पेट्रोल पंप में ₹70 बिक रहा है
आप 80 का भाव ले लीजिए बस इतनी सी बात पर ₹5 को लेकर दोनों में बहस बाजी होने लगा पांच रुपये को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हो गर्ई। दोनों पक्षों को सिर में एवं शरीर के अन्य हिस्सों में चोटे लगी हैं। संतोष कुशवाहा एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्र नवजीत मंडल को सिर पर चोट आई। दोनों पक्ष ने रामानुजगंज थाने पहुंच रिपोर्ट दर्ज कराई है।
 
पांच साल से जमे मुंशी नहीं उठाते फोन
रामानुजगंज थाने में बिगत पांच वर्षों से पद प्रधान आरक्षक अनिल पटेल 171 से उक्त संबंध में धारा की जानकारी लेने के लिए इनको जब फोन लगाया गया तो घंटी बजती रही।लेकिन इन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। तत्पश्चात एसआई के.सी.भारती से पूछ गया तो उन्होंने बताया कि 294 323 506 34 आईपीसी की धारा के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है जब भारती जी से पूछा गया कि दोनोंं पक्ष पर सेम धारा लगा है तो उन्होंने कहा कि  इसके संबंध में थाने के मुंशी अनिल पटेल ही बता सकते हैं जब अनिल पटेल को फोन किया गया तो उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया।
पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 5 वर्षोंं से लगातार रामानुजगंज थाने में पदस्थ अनिल पटेल बैच नंबर 171 द्वारा कुछ चुनिंदा लोगों का ही फोन रिसीव किया जाता है बाकी किसी का फोन रिसीव नहींं करते। जिले के आला अधिकारी समय-समय पर पुलिस मित्र बनाने की संदेश लोगोंं को दे रहे हैं और जिलेे का सबसे बड़ा थाना रामानुजगंज जो बॉर्डर एरिया से लगा हुआ है उसी थाने में पदस्थ मुंशी अनिल पटेल द्वारा फोन ना उठाना घोर लापरवाही का संदेश आम लोगों में जा रहा है उक्त मुंशी के कार्यप्रणाली से आला अधिकारियों की भी छवि धूमिल हो रही हैं।

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