सदन में साव का सवाल…जनजाति मंत्री ने कहा…स्थानीय भाषा और उच्चारण से आयी खामियां…जल्द करेंगे दूर

बिलासपुर—बिलासपुर सांसद अरूण साव ने लोकसभा में अनुसूचित जनजातियों में कई जातियों के नामों में असमानता के चलते आरक्षण की सुविधाओं से वंचित होने का मामला उठाया है। सांसद अरूण साव ने तारांकित प्रश्न लगाकर जनजाति कार्य मंत्री से जानना चाहा कि क्या राष्ट्रपति अधिसूचना में उल्लेखित जनजाति के नामों से प्रचलित जाति के नामों में उच्चारण या मात्रात्मक भिन्नता से  बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति के लोग आरक्षण की सुविधा से वंचित हो रहे है? क्या छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से इस संबंध में संशोधन को लेकर किसी प्रकार का प्रस्ताव प्राप्त हुआ  है? यदि हॉ तो क्या केन्द्र सरकार इन प्रस्तावों पर विचार कर रही है?
केन्द्रीय जनजाति कार्य मंत्री अर्जुन मुण्डा ने बताया कि मामले में सबसे अधिक प्रस्ताव छत्तीसगढ़ सरकार से प्राप्त हुए हैं। इनकी संख्या करीब 28 है। प्रावधानों के अनुसार केवल उन प्रस्ताओं पर विधान के संशोधन पर विचार किया जाता है, जिस पर भारत के महापंजीयक (आर.जी.आई) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से सहमति प्राप्त हो।  अर्जुन मुंडा ने बताया कि अभी तक भारत के महापंजीयक और अनुसूचित जनजाति आयोग की सहमति प्रस्ताव प्राप्त नही हुई है। जैसे ही सहमति प्राप्त होगी केन्द्र सरकार उस पर निर्णय लेगी। ऐसी चीजों को अध्ययन करते हुए केन्द्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। ताकि सब चीजों को ठीक किया जा सके।
                     मुण्डा ने बताया कि पर्यायवाची शब्द या उच्चारण के कारण कई राज्यों की बोली या भाषा से शब्दों में थोड़ा बहुत अंतर आ जाता है। विषमता को दूर करने की कोशिश की जा रही है। लगातार बैठकें भी चल रही है।
                                      सांसद अरूण साव ने पूरक प्रश्न किया कि केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ राज्य के प्रस्तावों पर कब तक निर्णय लेगी।  कब तक लोगों को इसका लाभ मिलेगा? सवाल के जवाब में मंत्री अर्जुन मुण्डा ने बताया कि यह एक राज्य का नहीं बल्कि कई राज्यों का विषय है। हम कोशिश कर रहे है कि जल्द से जल्द मामले का निपटारा किया जाएगा।

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