तुलसीदेवी अग्रिम पंक्ति की कहानीकार….विमोचन कार्यक्रम में अतिथियों ने कहा…कहानी में दिखता है समाज का चेहरा

बिलासपुर— कहानीकार तुलसी देवी तिवारी की 31 वीं पुस्तक का विमोचन गरीमामय माहौल में किया गया। तुलसी देवी की कहानी संग्रह आना मेरे घर का विमोचन जिलाधीश संजय अलंग,  राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष विनय पाठक प्रसिद्ध साहित्यकार परदेशी राम वर्मा नंदकिशोर तिवारी ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर संजय अलंग और अध्यक्षता कर रहे डॉ.विनय पाठक ने कहानीकार को शुभकामनाएं दी।
                  निजी प्रतिष्ठान में आयोजित कहानी संग्रह आना मेरे घर विमोचन कार्यक्रम में नंदकिशोर तिवारी , संपादक छत्तीसगढ़ी पत्रिका लोकाक्षर, डाॅ. परदेशी राम वर्मा, बरिष्ठ कथाकार भिलाई, विक्रम सिंह, राजभाषा अधिकारी, दक्षिण, मध्य, पूर्व रेलवे बिलासपुर , प्रभात कुमार राजभाषा अधिकारी एसईसी एल .बिलासपुर, के विशेष रूप से मौजूद थे।
            पुस्तक विमोचन से पहले अतिथिय़ों ने माँ वीणा पाणि के छाया चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित किया। अतिथियों के स्वागत सत्कार पश्चात तुलसी देवी तिवारी की एकतिसवीं पुस्तक  कहानी संग्रह ’आना मेरे घर का विमोचन किया गया। संदर्भ साहित्यिक संस्था के अध्यक्ष कृष्णकुमार भट्ट’पथिक, महासचिव डाॅ राजेश कुमार ’ मानस और उपाध्यक्ष डाॅ बुधराम यादव ने लेखिका का शाॅल श्रीफल से सम्मान किया।
                  अपनी लेखन प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए तुलसी तिवारी ने कहा- समाज ही मेरा साँचा है । इसमें मौजूद विषय मेरी कहानियों की पीठिका बनते हैं । कहानी के बहाने समाज को सही दिशा देना हमारा दायित्व है। इस दिशा में मैंने बहुत छोटा लेकिन प्रयास किया है।
                                    मुख्य अतिथि कलेक्टर  डॉक्टर संजय ने कहा कि तुलसी देवी तिवारी की कहानियां आज परिदृष्य में बहुत प्रासंगिक है। संग्रह की सभी कहानियां सामाजिक परिवेश और  स्त्री शक्ति पर केन्द्रित हैं। कहानी संग्रह  कि एक एक पंक्तियां…दिल को छूने वाली हैं। एक पंक्ति में कहा गया कि महिला का कोई धर्म नहीं होता…निश्चित रूप से यह पंक्ति अपने आप सारांश  है। श्रीमती तुलसी तिवारी को कहाी के बहाने समाज से किए गए जीवन्त संवाद के लिए शुभाकामनाएं देता हूं।
                    डाॅ. परदेशीराम वर्मा ने कहा तुलसी देवी तिवारी की कहानियां विभिन्न परिवेश से विभिन्न विषयों को केन्द्रित कर लिखी गयी  है। कहानियों में कहीं भी एकरसता  दिखाई नहीं देती । कहानीकार को कई भाषाओं का ज्ञान है…कहानीकार सदैव अपनी कहानी में उपस्थित रहता है। तुलसी देवी अपनी सभी कहानियों में दिखाई देती हैं।
                    डाॅ रेखा पालेश्वर, डाॅ अनिता सिंह ने कहा-तुलसी तिवारी ने अपनी कहानियों में गहरे अनुभव के साथ पैनी सामाजिक दृष्टि,युगयुगान्तर से समाज में उभरते स्वरों को जीवन्त किया है। डाॅ राजेश मानस, और कृष्णकुमार भट्ट ’पथिक ने  ’आना मेरे घर’ में संग्रहित कहानियों को समय का दर्पण बताया। डाॅ राजेशकुमार मानस ने सविमोचन की गयी कहानी संग्रह पर प्रकाश डाला।
                       इस दौरान विक्रम सिंह, प्रभात कुमार ने भी अपनी बातों को रखा। नंदकिशोर तिवारी ने कहानी संग्रह की जमकर सराहना की। उन्होने कहा कि तुलसी देवी तिवारी की कहानियां पाठक को अंत तक बांध कर रखती हैं।
                     डाॅ विनय कुमार पाठक ने तुलसी देवी तिवारी को छत्तीसगढ़ की अग्रिम पंक्ति की कहानीकार बताया। तुलसी देवी की कहानियों को केन्द्र में रखकर शोध किए जा रहे हैं। कहानी आना मेरे घर उनकी लोकप्रिय कहानियों का संग्रह है। जिस पर रिसर्च किया जाना बाकी है। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार हरबंश शुक्ला ने किया।
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