विवादित सदस्यों की बनी जांच टीम…शिक्षकों में नाराजगी…कहा..क्यों करें न्याय की उम्मीद…जिन्होने बेच दिया सरकारी पद

बिलासपुर—- जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में स्थानांतरण विवाद थमने का नाम नही ले रहा है। अपने लोगो को पदस्थापना देने की होड़ में पल पल नए आदेश जारी हो रहे हैं।  कुछ आदेश मौखिक है तो कुछ लिखित मेंं सामने आ रहे हैं।  ताजा उदाहरण जिला शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी एक आदेश आज सामने आया है।  जिसमे स्थानांतरण संबंधित प्रकरणों के निराकरण के लिए एक चार सदस्यीय समिति बना दी गयी है। समिति आम शिक्षको की स्थानांतरण समस्याओं का निराकरण करेगी। ऐसी उम्मीद स्वयं शिक्षको को भी नही है। क्योंकि खास शिक्षको की समस्याओं का निराकरण कार्यालय ने आज निपटा लिया गया है। फिर समिति का क्या औचित्य ? लोगों की माने तो समिति में ऐसा भी चेहरा…जिस पर पद को गायब करने का आरोप है?
                              स्थानांतरण सूची जारी होने के तीसरे दिन भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में परेशान आम शिक्षको का दिन भर जमावड़ा देखने को मिला। शिक्षकों को पूरा विश्वास था कि आज उन्हें स्थान्तरित संस्था के लिए कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। पर इन शिक्षकों को क्या पता था कि प्रति दिन निर्धारित समय से देर से आने वाले बाबू साहब आज भी सुबह 8 बजे ही कार्यालय अपने सहायक शिक्षक कंप्यूटर ऑपरेटर को लेकर पहुँचेंगे। लेन देन के बाद शिक्षकों को शाला के लिए आदेश जारी कर देंगे। , शहर और आस पास के स्कूलों में  एक पद के लिए दो और तीन लोगों की पदस्थापना के बाद भी दिन भर चले लेनदेन के बाद कुछ शिक्षको को आदेश जारी कर दिया गया।  जिले में बाहर से आने वाले सभी शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति जिला कार्यालय में दे दी है ।।
              बहरहाल जिला शिक्षा अधिकारी की समिति पर शिक्षको को  भरोसा नहीं है।  समिति के कई सदस्य पहले भी विवादों में रह चुके हैं। एक पर तो आरोप है कि उसने सरकारी पद को ही गायब कर दिया था। लेकिन बाद में मनपसंद शिक्षक से मिलने के बाद पद को सुरक्षित बचा लिया। समिति का सदस्य स्वयं लंबे समय से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमे हुए है। जबकि उनकी पदस्थापना  आदिवासी बाहुल्य गौरेला ब्लॉक में है। उनका वेतन भी शासकीय गुरुकुल उच्यतर माध्यमिक विद्यालय पेंड्रारोड से निकलता है।  उन्होने अपनी मूल शाला में कभी जाना ही नही चाहा। वही स्थापना खंड के बाबू की सबसे अधिक संदेहास्पद भूमिका के बाद भी ऐसे सदस्यों की उपस्थित वाली समिति से क्या पीड़ित शिक्षको को न्याय मिलेगा…कहना मुश्किल है।
पुनः खुली शिक्षक नेताओ की पोल 
                  जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षक संघ होने का दावा करने वाले संघ के पदाधिकारियों का आगमन हुआ। पीड़ित शिक्षको को थोड़ी राहत की उम्मीद बंधी लेकिन इन पदाधिकारियो को भी विवादित बाबू अकेले बंद कमरे में चर्चा कर चलता कर दिया।  बाद में ऐसी खबर लगी कि इन नेताओं ने भी केवल अपने लोगो के लिए पैसे लेनदेन की बात कर शाम को मामला सुलझाने की बात की है। इस बात को लेकर पीड़ित शिक्षको में आक्रोश है।
पानी एवं प्रसाधन के लिए तरसे शिक्षक
पीड़ित शिक्षक प्रतिदिन कार्यालय में उम्मीद के साथ बड़ी संख्या में आ रहे है। लेकिन जिले के सबसे बड़े शिक्षा विभाग के कार्यालय में पीने का पानी , प्रसाधन और बैठने की जगह जैसी मुलभुत सुविधाओं का टोंटा है। दूर दराज से आये शिक्षको और खास कर महिला शिक्षको को सबसे अधिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कुछ महिला शिक्षक अपने छोटे बच्चो के साथ दिन भर कार्यलय की सीढ़ियों पर जमीन में बैठी दिखाई दीं।
माननीय उच्य न्यायालय जाने की तैयारी में शिक्षक
                लगातार दो दिनों से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में चक्कर लगा रहे शिक्षको की उम्मीद अब उच्य न्यायालय से है।  कुछ पीड़ित शिक्षक अपने परिचित अधिवक्ताओ से संपर्क कर शीघ्र न्यायालय की शरण मे जाने के लिए कहा है।
                    एक स्कूल में एकल पद के खिलाफ तीन शिक्षकों का स्थानांतरण को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने समिति गठन कर जांच का आदेश दिया है। समिति की विश्वनीयता को लेकर लोगों में अच्छी स्थिति नहीं है। नाम नहीं छापने की सूरत में कई शिक्षकों ने बताया कि…जिला शिक्षा में जमकर नौटंकी हो रही है। समिति में उन्ही लोगों को रखा गया है..जिनकी इन सारे विवाद में अहम् भूमिका है। अब उनसे से पारदर्शिता की उम्मीद करना नादानी है।
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