अजीत जोगी बोले – आयुष्मान योजना की दर पर बेहतर इलाज मिलना मुमकिन नहीं,व्यापक सुधार जरूरी

रायपुर।पूर्व मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के सुप्रीमो अजीत जोगी ने मरीजों को आयुष्मान योजना से मिलने वाला लाभ पर सवाल उठाया है। जोगी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को पत्र लिख आयुष्मान योजना के बेहतर क्रियान्वन के लिए सुझाव दिए हैं। पत्र में जोगी ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डॉ. हर्ष वर्धन के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवा में व्यापक स्तर पर सुधार देखने को मिला है।

देश में डॉक्टरों की कमी को महसूस करते हुए केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में 75 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का जो निर्णय लिया गया है वह स्वागत योग्य है। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं को आम आदमी की पहुँच में लाने के लिए पिछले वर्ष जो आयुष्मान योजना की शुरुवात की थी वह एक बहुत ही सराहनीय कदम है।

हालांकि कुछ पहलुओं पर विचार कर इस योजना को और बेहतर रूप से क्रियान्वित किया जा सकता है। आयुष्मान योजना में सुधार के लिए अजीत जोगी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को सुझाव दिए हैं कि:

1. आयुष्मान योजना में स्वीकृत दरों में बढ़ोतरी जरुरी:

जोगी ने लिखा है कि इस योजना के तहत विभिन्न बिमारियों/स्थितियों के लिए जो दर स्वीकृत की गयी है, उन दरों पर अच्छे निजी अस्पतालों में मरीज का ईलाज किया जान पूर्णतः अव्यवहारिक है। उद्दाहरण के लिए जोगी ने बताया कि –

i) मेडिकल मरीज (जिनको ऑपरेशन की जरुरत नहीं है) उनके लिए प्रतिदिन की दर मात्र 1100 रूपए निर्धारित है जिसमें बेड चार्ज, डॉक्टर की फीस, जांचें और दवाइयां सभी शामिल हैं।

ii) ICU में बिना वेंटीलेटर के मरीजों के उपचार के लिए प्रतिदिन का 2500 रूपए और वेंटीलेटर के साथ प्रतिदिन का 4500 रूपए निर्धारित है। इसमें भी ICU चार्ज, डॉक्टरों की फीस, विभिन्न जांचें और दवाइयां सभी कुछ शामिल हैं। अच्छे अस्पतालों में केवल ICU चार्ज ही इस दर से अधिक होता है। ICU के मरीज को लगने वाली दवाइयां भी मरीज की स्थिति के ऊपर निर्भर करती हैं।

iii) हड्डी के ऑपरेशन की दरें सभी शुल्कों, जांचों और दवाइयों को मिलकर 8,000 रूपए से 15,000 रूपए तक निर्धारित हैं। स्पाइन सर्जरी का पैकेज 40,000 रूपए है। ये दरें अच्छे अस्पतालों में प्रचलित दर से एक तिहाई से भी कम है।

जोगी ने कहा कि यह दरें CGHS की प्रचलित दरों से भी कम हैं। इतनी कम दरों में अच्छे अस्पतालों द्वारा ईलाज किया जाना असंभव है। अस्पताल नुकसान उठा कर तो मरीज का ईलाज नहीं करेंगे। परिणामस्वरूप या तो आम आदमी अच्छे अस्पतालों में इस योजना के माध्यम से ईलाज करवाने से वंचित रह जाता है या अस्पताल को ईलाज से पहले यह सहमति देता है कि बची हुई राशि का भुगतान वह स्वयं करेगा। इस वजह से आयुष्मान योजना का कार्ड एक बीमा कार्ड नहीं होकर के “डिस्काउंट कार्ड” जैसा बन गया है। माना की योजना के नियमों के तहत अस्पताल द्वारा अतिरिक्त राशि लेना नियम विरुद्ध है लेकिन नियमों के पालन की व्यवहारिकता देखना भी अत्यंत आवश्यक है। अजीत जोगी ने कहा कि एक सर्वे के अनुसार देश के 95% अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत इलाज़ में मरीजों से अतिरिक्त राशि लेने को विवश हैं।

2. अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटों के भीतर आयुष्मान कार्ड प्रस्तुत करने की बाध्यता हो समाप्त :

अजीत जोगी ने कहा कि नियमों के तहत मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर अस्पताल में आयुष्मान कार्ड जमा करवाना आवश्यक है। ऐसा नहीं करने की स्थिति में मरीज को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिलता। पहले यह समय सीमा 24 घंटा थी जिसे कुछ दिनों पहले बढाकर 48 घंटा किया गया है। जोगी ने कहा कि उनका मानना है कि 48 घंटे की समय सीमा भी अव्यवहारिक है। इसे और बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि बहुत सी परिस्थितियों में विशेषकर गंभीर मरीजों की स्थिति में शुरुवात के दिनों में परिजनों का पूरा ध्यान मरीज की स्थिति सँभालने में रहता है। साथ ही कई बार दूर दराज से भी मरीज के परिजन आपाधापी में मरीज को अस्पताल लाते हैं। ऐसे में उन्हें आयुष्मान कार्ड को ढूंढ कर लाकर जमा करने में कुछ वक्त लगता है। जोगी ने कहा कि यह सभी व्यावहारिक परेशानियां हैं।

3. गंभीर स्थिति में आयुष्मान कार्ड जमा करने से पहले ऑपरेशन करने की स्थिति में ऑपरेशन के शुल्क का भुगतान नहीं होता

अजीत जोगी पत्र में लिखा है कि अपातकालीन परिस्थितियों में यदि मरीज का ऑपरेशन करना पड़े और उस समय तक उसका आयुष्मान कार्ड अस्पताल में जमा नहीं हो पाने के कारण अस्पताल द्वारा आयुष्मान कार्ड से इलाज़ की अनुमति नहीं ली गयी है तो उस ऑपरेशन के शुल्क का भुगतान अस्पताल को नहीं किया जाता है। जोगी ने लिखा है कि यह नियम बहुत ही अव्यवहारिक है क्योंकि गंभीर परिस्थिति में अस्पताल और डॉक्टर का कर्तव्य मरीज की जान बचाना है न कि आयुष्मान कार्ड की औपचारिकताओं को पूरा करना। यहाँ तक कि माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने भी कहा है कि गंभीर स्थितियों में अस्पतालों को सर्वप्रथम मरीज की जान बचानी है, अन्य सभी कागज़ी औपचारिकताएं बाद में की जाएँ।

अजीत जोगी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को आगे लिखा है कि चूँकि आप स्वयं एक चिकित्सक हैं अतः आयुष्मान योजनाओं की उपरोक्त वर्णित कठिनाईओं को भली भाँति समझ सकते हैं। जोगी ने सुझाव दिया है कि अन्य बीमा कंपनियों द्वारा पालन की जा रही प्रक्रिया की तरह ही आयुष्मान योजना में भी इलाज़ की दर अस्पतालों के साथ मिलकर तय की जाए और उस दर पर अस्पताल को भुगतान किया जाए। साथ ही अस्पतालों द्वारा आयुष्मान कार्ड की सूचना के संबंध में भी थोड़ा लचीला रूख अपनाया जाना चाहिए जैसा अन्य बीमा कंपनियों द्वारा किया जाता है।

इस पत्र की प्रतिलिपि अजीत जोगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सुदन को भी भेजी है और उम्मीद की है कि उपरोक्त विषयों पर विचार कर आयुष्मान योजना के नियमों में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाये जाएंगे जिससे योजना का बेहतर क्रियान्वन हो सके और हर व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँच सके।

इसी विषय पर अजीत जोगी ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव को भी पृथक से पत्र लिखा है जिसमें जोगी ने कहा है कि चूँकि आयुष्मान योजना के प्रीमियम की 40% राशि का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाता है अतः यह अत्यावश्यक है कि राज्य सरकार द्वारा इस योजना के क्रियान्वन में हो रही कठिनाइओं से केंद्र सरकार को अवगत करवाया जाए। अजीत जोगी ने आशा की है कि सिंहदेव आयुष्मान योजना के नियमों में सुधार के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और जिम्मेदार अधिकारीयों के समक्ष आवश्यक पहल करेंगे।

मीडिया प्रमुख

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