जिला शिक्षा विभाग का कारनामा…मार्गदर्शक टीम की आंख में झोंका धूल..सूची से बैक डेट पर करवा दिया ज्वाइनिंग

बिलासपुर— बिलासपुर का विवादास्पद जिला शिक्षा विभाग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। शासन प्रशासन से शिकायतों के बीच बाबू और अधिकारियो का गोरखधंधा अब भी बदस्तुर जारी है। मार्गदर्शन के लिए भेजी गयी सूची से बैक डेट पर लेन देन कर शिक्षकों को पद बांटा जा रहा है। यह जानते हुए भी कि मामला जाहिर होने के बाद सचिव स्तर से बड़ी कार्रवाई हो सकती है। बावजूद इसके स्थापना शाखा से हटाए गए बाबू का खेल जारी है। जाहिर सी बात यह खेल अकेले दम का नहीं है। फिर भी जिला शिक्षा अधिकारी अपना दामन बेदाग बताते नहीं थक रहे हैं। जबकि मालूम सबको है कि लेन देन का खेल कप्तान के इशारे पर ही होता है।  चर्चा का बाजार गर्म है कि मार्गदर्शन तो केवल दिखावा है।
                     बिलासपुर का जिला शिक्षा विभाग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। शासन और प्रशासन स्तर पर लगातार शिकायतों के बाद भी अधिकारी अपने गोरखधंधे से बाज नहीं आ रहे हैं। अब तो शिक्षक जमात भी मानने लगा है कि विवाद का दूसरा नाम जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय है। दरअसल जिला शिक्षा अधिकारी और स्थापना शाखा का पुराना बाबू आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। रोज नया काण्ड रच रहे हैं। बताते चलें कि सीजी वाल ने जिला शिक्षा विभाग की नई स्थानांतरण नीति का खुलासा कर अधिकारियों और तथा कथित बाबू के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने संशोधित फाइल पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया है। जिसके चलते गोरखधंधे में शामिल लोगों को लाखों रूपयों का नुकसान हुआ है। वहींं शिक्षकों को अब चिंता सताने लगी है कि दी गयी थाती वापस होगी भी या नहीं।
शासन से मार्गदर्शन की नौटंकी…बैक डेट से हो रहा स्थानांतरण
               स्थानांतरण को लेकर बिलासपुर समेत प्रदेश में  शिक्षा विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है। मामले में कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंंह भी नाराजगी जता चुके हैं। फिर भी प्रतिबंधों और दबावों के बीच बिलासपुर शिक्षा विभाग में स्थानांतरण का गोरखधंधा जमकर फल फूल रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर स्थापना शाखा से हटाए गए बाबू का जलवा अब भी बरकरार है।
                  जानकारी हो कि राज्य सरकार ने एक फरमान जारी किया है कि जिन स्कूलों में खाली पद के विरुद्ध एक से अधिक शिक्षकों का तबादला हुआ है, उनका निराकरण सरकार करेगी। समस्या सुलझाने के लिए शासन ने आरपी मण्डल समेत वरिष्ठ सचिवों की तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है। टीम जिला से भेजी गयी सूची का निराकरण करेगी। लेकिन बिलासपुर में जिला शिक्षा विभाग अपने अधिकारियों की आंख में धूल झोकने से बाज नहीं आ रहे हैं।
                    जिले से कुल 51 शिक्षकों का नाम संचालक के पास मार्गदर्शन के लिए भेजा गया है। मार्गदर्शक टीम ने अभी सूची को फायनल भी नहीं किया है। लेकिन बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग ने मार्गदर्शकों को भेजी गयी सूची से कुछ शिक्षकों को बैक डेट में पोस्टिंग आदेश दिया है।
                                                        जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा विभाग बिलासपुर की तरफ से भेजी गयी मार्गदर्शन सूची में भारी भरकम वसूली हो रही है।  सूची के सरल क्रमांक 2 , 3 और 11 में कर्मचारियों के पूर्व सूची में कार्यभार ग्रहण कर लेने के कारण स्थान रिक्त नही दिखाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि  विभाग ने पारदर्शी तरीके से कार्यभार ग्रहण का आदेश दिया है। सवाल उठता है कि फिर पहली सूची में शामिल अन्य शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण क्यों नही करवाया गया। इसी तरह का गोरखधंधा का खेल दूसरी सूची में भी है। जिसकी पुख्ता जानकारी सीजी वाल के पास  है।
मार्गदर्शन टीम को दिखाया अंगूठा
                    मजेदार बात है कि मार्गदर्शन सूची में भेजे गए शिक्षको में पदांकन का खेल भी जारी है। राज्य स्तर पर मार्गदर्शन सूची में शामिल शिक्षको के संबंध में अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है। बताते चलें कि जिले की सूची को 30 अगस्त को राज्य मार्गरदर्शन कमेटी को भेजी गयी है। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ तथाकथित बाबू और अधिकारी ने राज्य मार्गदर्शन समिति की निर्णय आने से पहले ही लेनदेन कर तीन चार शिक्षको का पदस्थापना भी कर दिया है।
                      मार्गदर्शन सूची क्रम संख्या 44 में ओम प्रकाश राठौर को जिला शिक्षा विभाग ने गुपचुप लेन देन कर उच्यतर माध्यमिक विद्यालय सकरी में जॉइनिंग करवा दिया है। ऐसा ही एक मामला पटवारी की पत्नी का भी है। फिलहाल मामले को लेकर पीड़ित शिक्षको में गहरा आक्रोश है। शिक्षकों ने बताया कि मामले की शिकायत वरिष्ठ सचिव आरपी मण्डल से करेंगे।
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